सावन आया छाने लगे घोर घन / 'अमीक' हनफ़ी

करते हैं फिर दिल को परेशान चित चोर बादल

जंगल जंगल सनकी हवा बाँस बन झूम उठे
नाचे कूदे गरजे मचाने लगे शोर बादल

ढोलक नक़्क़ारे बाँसुरी झाँझनें बज रही हैं
उस पर ये सत-रंगी धनक बन गए मोर बादल

बिजली का पहलू गुदगुदाया भरीं चुटकियाँ भी
झूमा झटकी कर के दिखाने लगे ज़ोर बादल

दिल में दुःख आँखों में नमी आसमाँ पर घटाएँ
अन्दर बाहर इस ओर उस ओर हर ओर बादल

श्रेणी: ग़ज़ल

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