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हिंदी भजन लिरिक्स | भजन-संग्रह | Bhajan Lyrics in Hindi

लोकप्रिय हिंदी भजन लिरिक्स विभिन्न कलाकारों , भक्त कवियों और संतों द्वारा गाए और रचाए गए भजन गीत भक्ति गीत का लिखित संग्रह क्लिक कर पढ़ें एवं आनंद की अनुभूति करें  धरनीदास जी के भजन | Dharnidas Bhajan Sangrah 8/9/2025 संतो कहा गृहस्त कहा त्यागी धरनीदास भजन / Santo Kaha Grihast Kaha Tyagi Dharanidas Bhajan श्याम प्यारे दिलदार अपनी झलक दिखा दो बिन्दु जी भजन 12/17/2024 Shyam Pyare Dildar ApniJhalak Dikha Do Bindu Ji Bhajanश्याम प्यारे दिलदार अपनी झलक दिखा दो।श्याम प्यारे दिलदार, मुरली वाले दिलदार॥है दिल में याद तुम्ह... श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम.भजन / Shyam Teri Bansi Pukare Radha Naam Bhajan 12/17/2024  श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम..लोग करें मीरा को यूँही बदनाम..सांवरे की बंसी को बजने से कामराधा का भी श्याम वो तो मीरा का भी श्याम…जमुना की लहरें बंसी बजती... श्याम तेरी छटा प्यारी जो पिया करते हैं बिन्दु जी भजन / Shyam Teri Chhata Pyari Jo Piya Karte Hain Bindu Ji Bhajan 12/17/2024  श्याम तेरी छटा प्यारी जो पिया करते हैं,यही अपनी है गिजा जिससे जिया करते...

श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह – Mahavir Swami Aarti (4 Versions) in Hindi

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भगवान महावीर की आरती के कई सुंदर रूप प्रचलित हैं — कहीं कुंडलपुर का जिक्र है तो कहीं चाँदनपुर का। यहाँ हमने चार अलग-अलग प्रचलित आरतियाँ एक ही जगह क्रमांक देकर रख दी हैं, जो भी पसंद आए वो गाइए। 1. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 1) जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो | कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो | ॐ जय महावीर प्रभो || सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी-2 | बाल ब्रह्मचारी व्रत-2, पाल्यो तपधारी | ॐ जय महावीर प्रभो || आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी-2 | माया मोह विनाशक-2, ज्ञान ज्योति जारी | ॐ जय महावीर प्रभो || जग में पाठ अहिंसा, आपहि विस्तार्यो-2 | हिंसा पाप मिटाकर-2, सुधर्म परचार्यो | ॐ जय महावीर प्रभो || इह विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो-2 | ग्वाल मनोरथ पूर्यो-2, दूध गाय पायो | ॐ जय महावीर प्रभो || अमरचंद को सपना, तुमने प्रभु दीना-2 | मंदिर तीन शिखर का-2, निर्मित है कीना | ॐ जय महावीर प्रभो || जयपुर-नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी-2 | एक ग्राम तिन दीनो-2, सेवा-हित यह भी | ॐ जय महावीर प्रभो || जो कोर्इ तेरे दर पर, इच्छा कर आवे-2 | होय मनोरथ-पूरण-2, सं...

आरती जय चंद्रप्रभु देवा – Chandraprabhu Aarti (Tijara) in Hindi

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तिजारा के चन्द्रप्रभु भगवान की यह एक और खूबसूरत आरती है, जिसमें उनके जन्म से लेकर केवलज्ञान तक की पूरी यात्रा का वर्णन मिलता है। जय चंद्रप्रभु देवा, स्वामी जय चंद्रप्रभुदेवा । तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी, तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी पार करो देवा, स्वामी पार करो देवा ॥ जय चंद्रप्रभु देवा… मात सुलक्षणा पिता तुम्हारे महासेन देवा चन्द्र पूरी में जनम लियो हैं स्वामी देवों के देवा तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥ जय चंद्रप्रभु देवा… जन्मोत्सव पर प्रभु तिहारे, सुर नर हर्षाये रूप तिहार महा मनोहर सब ही को भायें तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥ जय चंद्रप्रभु देवा… बाल्यकाल में ही प्रभु तुमने दीक्षा ली प्यारी भेष दिगंबर धारा, महिमा हैं न्यारी तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥ जय चंद्रप्रभु देवा… फाल्गुन वदि सप्तमी को, प्रभु केवल ज्ञान हुआ खुद जियो और जीने दो का सबको सन्देश दिया तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥ जय चंद्रप्रभु देवा… अलवर प्रान्त में नगर तिजारा, देहरे में प्रगटे मूर्ति तिहारी अपने अपने नैनन, निरख निरख हर्षे तुम हो विघ्न वि...

श्री नन्दीश्वर द्विप आरती – Nandishwar Dweep Aarti Lyrics in Hindi

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नंदीश्वर द्वीप पर स्थित 52 जिनालयों की महिमा गाने वाली यह आरती जैन भूगोल और भक्ति का अनूठा संगम है। जय बावन जिन देवा, जय बावन जिन देवा | आरती करूँ तुम चरणे-२ भवजल नदि न्हावा || जयदेव-२ प्रथमो जंबु द्वीप, घातकी वर बीजो-२ | पुष्कर पूरव शोभित, पुष्कर वर त्रीजो || जयदेव-२ || चोथो वारूण द्वीप, पंचम क्षीरवर-२ | छठ्ठो घृतवर शोभित, सप्तम इक्षुवर || जयदेव-२ || अष्टम शोभे द्वीप नन्दीश्वर नामा-२ | प्रति दश तेरह अकृतिम जिन धामा || जयदेव-२ || अन्जम भूधर एक, दधिमुख नग्र चार-२ | गज मति रविकर पर्वत, तेरह गिरि सार || जयदेव-२ || एवं चौदिशी बावन, पृथ्वी धर लम्बा-२ | गिरिपति ज्येष्ठ जिनालय, मणिमय जिनबिम्बा || जयदेव-२ || शुभ अषाढे कारतक, फाल्गुन, सुदी पक्षा-२ | इन्द्रादिक करे पूजा, अष्टानिक दक्षा || जयदेव-२ || अष्टम दिन थी मंडित, पूनम परियंता-२ | जिनगुणसागर गावे, पावे सुव कांता || जयदेव-२ || जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

पारस देवा आरती (बड़ागांव) – Baragaon Parshvanath Aarti in Hindi

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बड़ागांव के टीले से जुड़े चमत्कारी प्रसंगों का जिक्र करती यह आरती पार्श्वनाथ भगवान की महिमा को अलग ही अंदाज़ में बयां करती है। ओं जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा | आरति हम सब करते, मिले मुक्ति मेवा || टेक || बड़ागांव टीले से, स्वप्न दिया तुमने | चमत्कार कर प्रगटे, शरण लही हमने || ओं .. लक्ष्मण बचे तोप से, महिमा जग छायी | तन निरोग कितनों ने, नेत्र ज्योति पायी || ओं .. स्याद्वाद गुरुकुल में, इन्द्र शीश राजे | शतक आठ फण छाया, सौम्य मूर्ति साजे || ओं .. जो भी शरण में आते, वांछित फल पाते | भूत-प्रेत, करमों-कृत, संकट कट जाते || ओं .. स्याद्वाद ध्वज धरती पर, आपहि फहराया | किया समर्पण सन्मति, अनुभव लहराया || ओं .. जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

शांतिनाथ भगवान आरती (रूप 2) – Shantinath Aarti Lyrics in Hindi

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शांतिनाथ भगवान की यह दूसरी आरती एक अलग धुन और शैली में है, फिर भी भाव वही — शांति और सुख की कामना। दोनों रूप गाकर देखें, कौन सा ज्यादा पसंद आता है। शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे। आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे शांतिनाथ भगवान हस्तिनापुर में जनम लिये हे प्रभु देव करे जयकारा हो । जन्म महोत्सव करें कल्याणक, नाचे झूमे गाये हो ॥ ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान धन्य है माता ऐरा देवी तुम्हें जो गोद उठाईं है । विश्वसेन के कुलदीपक ने ज्ञान की ज्योति जगाई है । ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान पंचम चक्रवर्ती पद पाये, जग सुख बढा अपार था । द्वादस कामदेव अति सुन्दर जग में बढा ही नाम था । ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान शांति नाथ प्रभु शांति प्रदाता शुचिता सुख अपार दो । जनम मरण दुःख मेटो प्रभुजी लेना शरण में आप हो । ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे। जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

आरती वासुपूज्य – Vasupujya Ji Aarti Lyrics in Hindi

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चंपापुरी के बारहवें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान बाल ब्रह्मचारी थे — यह आरती उनके इसी अनूठे जीवन का सुंदर वर्णन करती है। ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी। पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० चंपापुर नगरी भी धन्य हुई तुमसे स्वामी धन्य० जयराम वासुपूज्य २, मात पिता हर्षे ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० बाल ब्रह्मचारी बन, महाव्रत को धारा २ । प्रथम बालयति जग ने २, तुमको स्वीकारा ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० गर्भ जन्म तप एवं केवल ज्ञान लिया स्वामी केवल०। चंपापुर में तुमने २, पद निर्वाण लिया ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० वासवगण से पूजित, वासुपूज्य जिनवर स्वामी वासु० । बारहवें तीर्थंकर २, है तुम नाम अमर ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० जो कोई तुमको सुमिरे सुख सम्पति पावे स्वामी सुख० । पूजन वंदन करके २, वंदित हो जावे ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० घृत आरती ले हम सब तुम आरती करते स्वामी तुम। उसका फल मिले चंदना २, मति शुद्ध करदे ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥ ॐ जय वासुपूज्य स्वामी० जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आ...

आरती विमलनाथ जी – Vimalnath Ji Aarti Lyrics in Hindi

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कम्पिलपुरी में जन्मे तेरहवें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान की यह आरती पंचकल्याणकों का बड़ा विस्तृत और सुंदर वर्णन करती है। आरती करो रे, आरती करो रे । आरती करो रे, आरती करो रे ॥ तेरहवे जिनवर विमलनाथ की आरती करो रे, आरती करो रे । कृतवर्मा पितु राजदुलारे, जयश्यामा के प्यारे । कम्पिल पूरी में जनम लिया हैं, सुर नर वन्दे सारें २ ॥ आरती करो रे० निर्मल त्रय ज्ञान सहित, स्वामी की आरती करो रे आरती करो रे० शुभ ज्येष्ठ वदि दशमी प्रभु की गर्भागम तिथि मानी जाती है जन्म और दीक्षा कल्याणक, माघ चतुर्थी सुदी आती २ आरती करो रे० मनः पर्याय ज्ञानी तीर्थंकर की, आरती करो रे । आरती करो रे० सित माघ छट को ज्ञान हुआ, धनपति शुभ समवशरण रचता । दिव्य ध्वनि प्रभु की खिरी और, भव्यो का नाम कुमुद खिलता 2 । आरती करो रे० केवल ज्ञानी अर्हन्त प्रभु की आरती करो रे० आषाढ़ वदि दशमी तिथि थी, पंचम गति प्रभुवर ने पायी । शुभ लोक शिखर पर राजे जा, परमातम ज्योति प्रगटाई २। आरती करो रे० उन सिद्धप्रिया के अधिनायक की आरती करो रे० हे विमल प्रभु तव चरणों में बस एक आशा हे यह मेरी । मन विमल मति हो जावे प्रभु, मिल ज...