गिरिजाकुमार माथुर (1919–1994) हिंदी के प्रसिद्ध कवि, लेखक और अनुवादक थे। उनका जन्म मध्य प्रदेश के गुना ज़िले के अशोकनगर में हुआ था। वे प्रयोगवाद और नई कविता के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में प्रेम, प्रकृति, मानवीय अनुभव और बदलते समय की झलक मिलती है। भाषा और शिल्प के नए प्रयोग उनकी रचनाओं की खासियत रहे। उनकी प्रमुख कृतियों में नाश और निर्माण , धूप के धान , शिलापंख चमकीले और जो बंध नहीं सका शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हुए Girija Kumar Mathur इतना मत दूर रहो गन्ध कहीं खो जाए : गिरिजाकुमार माथुर इतना मत दूर रहो गन्ध कहीं खो जाए आने दो आँच रोशनी न मन्द हो जाए देखा तुमको मैंने कितने जन्मों के बाद चम्पे की बदली सी धूप-छाँह आसपास घूम-सी गई दुनिया यह भी न रहा याद बह गया है वक़्त लिए मेरे सारे पलाश ले लो ये शब्द गीत भी कहीं न सो जाए आने दो आँच रोशनी न मन्द हो जाए उत्सव से तन पर सजा ललचाती मेहराबें खींच लीं मिठास पर क्यों शीशे की दीवारें टकराकर डूब गईं इच्छाओं की नावें लौट-लौट आई हैं मेरी सब झनकारें नेह फूल नाजुक न...
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो : राहत इंदौरी आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ले तो आए शाइरी बाज़ार में 'राहत' मियाँ क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के : राहत इंदौरी तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के आते जाते हैं कई रंग मिरे चेहरे पर लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद ...