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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविताएँ : Suryakant Tripathi Nirala Kavita

 सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (1896–1961) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। वे छायावाद के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति, मानव जीवन, सामाजिक विषमता, स्वतंत्रता और मानवीय संवेदनाओं के भाव दिखाई देते हैं। ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘सरोज स्मृति’, ‘वह तोड़ती पत्थर’ और ‘कुकुरमुत्ता’ उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल हैं। निराला ने हिंदी कविता को नई भाषा, नए भाव और स्वतंत्र अभिव्यक्ति दी। उनका साहित्य अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ था। हिंदी साहित्य में अपने मौलिक और प्रभावशाली लेखन के कारण निराला का विशेष स्थान है। Suryakant Tripathi Nirala राम की शक्ति-पूजा सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' रवि हुआ अस्त : ज्योति के पत्र पर लिखा अमर रह गया राम-रावण का अपराजेय समर आज का, तीक्ष्ण-शर-विधृत-क्षिप्र-कर वेग-प्रखर, शतशेलसंवरणशील, नीलनभ-गर्ज्जित-स्वर, प्रतिपल-परिवर्तित-व्यूह-भेद-कौशल-समूह,— राक्षस-विरुद्ध प्रत्यूह,—क्रुद्ध-कपि-विषम—हूह, विच्छुरितवह्नि—राजीवनयन-हत-लक्ष्य-बाण, लोहितलोचन-रावण-मदमोचन-महीयान, राघव-लाघव-रावण-वारण—गत-युग्म-प्रहर, उद...
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सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के गीत : Suryakant Tripathi Nirala Geet

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (1896–1961) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे। वे छायावाद के प्रमुख कवियों में गिने जाते हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति, मानव जीवन, सामाजिक विषमता, स्वतंत्रता और मानवीय संवेदनाओं के भाव दिखाई देते हैं। ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘सरोज स्मृति’, ‘वह तोड़ती पत्थर’ और ‘कुकुरमुत्ता’ उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में शामिल हैं। निराला ने हिंदी कविता को नई भाषा, नए भाव और स्वतंत्र अभिव्यक्ति दी। उनका साहित्य अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ था। हिंदी साहित्य में अपने मौलिक और प्रभावशाली लेखन के कारण निराला का विशेष स्थान है। Suryakant Tripathi Nirala वर दे, वीणावादिनि वरदे! सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' वर दे, वीणावादिनि वरदे! प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे! काट अंध-उर के बंधन-स्तर बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर; कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर जगमग जग कर दे! नव गति, नव लय, ताल-छंद नव, नवल कंठ, नव जलद-मंद्ररव; नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर, नव स्वर दे! स्नेह-निर्झर बह गया है सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' स्नेह-निर्झर बह गया...

रामधारी सिंह दिनकर कविता : Ramdhari Singh Dinkar Ki Kavita

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908–1974) हिंदी के प्रसिद्ध कवि, लेखक और विचारक थे। उनका जन्म बिहार के सिमरिया गाँव में हुआ था। उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, वीरता, सामाजिक चेतना, संघर्ष और मानव जीवन के भाव प्रभावशाली रूप में दिखाई देते हैं। ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘उर्वशी’ उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। साहित्य और संस्कृति पर उनकी महत्वपूर्ण पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ भी प्रसिद्ध है। हिंदी साहित्य में उनके ओजपूर्ण काव्य के कारण उन्हें विशेष स्थान प्राप्त है। उन्हें पद्म भूषण और ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित कई सम्मान मिले। रामधारी सिंह दिनकर परिचय जन्म–निधन 1908 – 1974 जन्म स्थान सिमरिया, बेगूसराय, बिहार प्रमुख रचनाएँ रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी, संस्कृति के चार अध्याय पुरस्कार पद्म भूषण, ज्ञानपीठ पुरस्कार (उर्वशी), साहित्य अकादमी पुरस्कार Amazon पर पुस्तकें यहाँ देखें [not available ] सिंहासन खाली करो कि जनता आती है : रामधारी सिंह "दिनकर" सदियों की ठण्डी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन...