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हत्यारे (कहानी) | Hatyaare : अर्नेस्ट हेमिंग्वे

हेनरी के ढाबे का दरवाज़ा खुला और आदमी अंदर आए। वे काउंटर पर जा बैठे। “आप लोग क्या खाएँगे...?” जार्ज ने उनसे पूछा। “मुझे नहीं मालूम,” उनमें से एक ने कहा, “तुम क्या खाना चाहते हो एल?” “मुझे नहीं मालूम,” एल ने कहा, “मैं नहीं जानता कि मैं क्या खाना चाहता हूँ।” बाहर अँधेरा छा रहा था। खिड़की के बाहर से सड़क की रोशनी भीतर आ रही थी। काउंटर पर बैठे दोनों आदमी 'मीनू' को देखने लगे। काउंटर की दूसरी तरफ़ से निक एडम्ज उनको देख रहा था। जब वे अंदर आए थे, तब वह जार्ज से बातें कर रहा था। “मुझे तंदूरी पोर्क, सेब की चटनी और आलू का भरता चाहिए।” पहले आदमी ने कहा। “वह अभी तैयार नहीं है…।” “फिर तुमने उसे फ़ेहरिस्त में क्यों डाल रखा है…?” “वह रात के खाने के लिए है…,” जार्ज ने समझाया, “आपको शाम छह बजे के बाद वह मिल सकता है।” जार्ज ने काउंटर के पीछे दीवार पर लगी घड़ी को देखा। “पाँच बजे हैं...।” “लेकिन घड़ी तो पाँच बजकर बीस मिनट बता रही है…।” दूसरे आदमी ने कहा। “वह बीस मिनट तेज़ है।” “गोली मारो घड़ी को, घड़ी जाए जहन्नुम में…” पहले आदमी ने कहा, “तुम्हारे पास खाने को क्या है…?” “मैं आपको किसी भी तर...