यह एक बेहद दर्दनाक हादसा था जो मैंने अपनी आँखों से देखा था। पारुल और मैं बातें करती हुई कच्ची सड़क से गुज़र रही थी। रास्ते के मोड़ पर पारुल मुझसे थोड़ी आगे निकल गई, जबकि मेरे पैर में ईंट का टुकड़ा चुभने से मैं पीछे रह गई थी। जब मैं अपने को थोड़ा संभाल पाई मैं भी मोड़ तक पहुँची और पारुल के पास हो ली। और तुरंत वह दृश्य दिख गया। मैंने पिछले ही दिन जिन तीन लोफ़रों जैसे लड़कों को देखा था। उन्हीं में से एक ने पारुल पर एसिड से भरी बोतल फेंक मारी। उसी क्षण जलन से बिलखती-चिल्लाती पारुल ज़मीन पर लुढ़क गई। मुझे पूरा यक़ीन था कि उसे गुंडे ने पारुल पर एसिड ही फेंका था। जब तक मैं पास पहुँचकर अपना ग़ुस्सा उन पर उतारती, वे भाग चुके थे। मैं बेहद आतंकित और दुखी हो, एक असहाय स्थिति में खड़ी की खड़ी रह गई। चारों तरफ़ से लोग दौड़ पड़े थे। असह्य जलन के कारण पारुल चीख़ती जा रही थी, पर मैं किंकर्तव्यविमूढ़, अपना होशहवास खो चुकी थी। किसी तरह गिरते पड़ते पारुल तक आई तो देखा एसिड का सर्वाधिक प्रभाव उसके एक ओर के गाल और आँख पर हुआ था। भय से मैंने अपनी आँखें फेर लीं। गाँव के लोग पारुल को तुरंत अस्पताल ले जाने को ...