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लॉरी ड्राइवर (कहानी) | Loree Draaivar : अल्बर्टो मोराविया

मैं निहायत कमज़ोर, लाचार और भावुक इंसान हूँ। मरियल-सी बाँहें, लंबी-लंबी टांगें हैं, और मेरा पेट तो इतना अंदर धंसा हुआ है कि मेरी पतलून सब समय नीचे ही खिसकती रहती है। कहने का तात्पर्य यह है कि एक अच्छे लॉरी ड्राइवर बनने के लिए जो कुछ मसाला नितांत आवश्यक है, मेरे पास सब कुछ ठीक उसके विपरीत ही है। कभी आपने ध्यान से लॉरी ड्राइवरों को देखा है? सभी तो हट्टे-कट्टे, बैल बराबर कंधों वाले होते हैं। साथ ही भारी-भरकम पीठ, घने बालों से ढकी भुजाएँ और एक छोटी-मोटी तोंद। लॉरी ड्राइवर की सफलता उसके तीन अंगों की शक्ति पर ही निर्भर होती है। बाँहें, पीठ और पेट। लॉरी के हाथ-चक्के का व्यास लगभग एक हाथ लंबा होता है, पहाड़ी रास्तों के मोड़ों पर अक्सर उन्हें पूरा ही घुमाना पड़ता है और इसके लिए बांहों का मज़बूत होना ज़रूरी है। घंटों एक ही स्थिति में लॉरी की सीट पर अक्लांत बैठे रहने के लिए पीठ का पक्का होना आवश्यक है और झटके संभाल ले, ऐसी तोंद होना भी ज़रूरी है। ख़ैर इतनी तो हुई शारीरिक उपयुक्तता, रही मानसिकता तो उसके लिए मैं और भी अधिक अनुपयुक्त हूँ। लॉरी ड्राइवर के मन में किसी प्रकार की कोमलता नहीं होनी चाहिए, ...