परिचय नागार्जुन (1911–1998) हिंदी और मैथिली के प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार एवं पत्रकार थे। उनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे प्रगतिशील तथा जनपक्षधर साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘अकाल और उसके बाद’, ‘बलचनमा’, ‘रतिनाथ की चाची’ और ‘युगधारा’ शामिल हैं। उनकी कविता की विशेषता आम जनता के जीवन, सामाजिक विषमता, राजनीतिक विडंबनाओं और लोकभाषा की सहज अभिव्यक्ति है। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1969) और मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हुए। वे अपनी निर्भीक, व्यंग्यात्मक और जनसरोकारों से जुड़ी रचनाशीलता के कारण ‘जनकवि’ के रूप में प्रसिद्ध हैं। बादल को घिरते देखा नागार्जुन अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलों पर गिरते देखा है, बादल को घिरते देखा है। तुंग हिमालय के कंधों पर छोटी बड़ी कई झीलें हैं, उनके श्यामल नील सलिल में समतल देशों से आ-आकर पावस की ऊमस से आकुल तिक्त-मधुर बिषतंतु खोजते हंसों को तिरते देखा है। बादल को घिरते देखा ...