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फटा हुआ बूट (कहानी) | Phataa Huaa Boot : ग्रेज़िया मारिया कुसिमा डेमियाना डेलेडा

एलिया कचहरी में बेकार-सा रहता था। उन दिनों लोग कचहरी से दूर ही रहना पसंद करते थे। बड़े से बड़े वकील भी छोटे-छोटे मुक़दमे लेने के लिए मज़बूर थे। एलिया के पास तो कोई भी मुक़दमा न आता, फिर भी वह कचहरी में जाता और वहाँ एकांत में बैठकर अपनी पत्नी को संबोधित करके कविताएँ लिखा करता। एक दिन रास्ते में एक परिचित गाड़ीवान ने एलिया को रोकते हुए कहा, मैं अभी-अभी तेर्सनोवा से आ रहा हूँ, वहाँ मैं तुम्हारे चाचा से मिला था। वे सख़्त बीमार हैं। एलिया घर लौटा तो उसकी पत्नी घर के सामने धूप में खड़ी उसकी प्रतीक्षा कर रही थी। एलिया ने चाचा की बीमारी की ख़बर उसे सुनाई तो उसके शांत-गंभीर चेहरे पर बेचैनी की बजाय रहस्यमयी मुस्कराहट आई। उसे देखकर एलिया के होंठों पर भी मुस्कराहट आई। तो मैं जाता हूँ, एलिया ने कहा। आगे वह कुछ न बोला। पत्नी उसके मन की बात समझ गई। चाचा मरने पर अपनी सारी संपत्ति उसे दे जाने वाला था। तभी उसने पति के फटे हुए बूट की ओर देखते हुए पूछा, रास्ते के ख़र्चे का भी कुछ ख़याल किया है? “इसकी चिंता न करो। मेरे पास थोड़े से पैसे हैं। एलिया अपने चाचा के शहर के लिए रवाना हो गया। रास्ते में वह तेज़ी से चल...