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अल्बर्ट और उसका जहाज़ (कहानी) | Albart Aur Usakaa Jahaaz : कीथ वॉटरहाउस

शहर के मेन मार्केट के बीचोबीच, घंटों वाली फ़ौजी घड़ी के ठीक नीचे खिलौनों की एक आलीशान दुकान हुआ करती थी और जहाँ तक मुझे मालूम है। आज भी है। यह दुकान एक सुसज्जित जादुई गुफा जैसी थी, जिसका एक हिस्सा चिड़ियाघर जैसा था तो दूसरा सरकसनुमा। कहीं रेलगाड़ियों की प्रदर्शनी थी, तो कहीं चाभी से चलने हिलने वाले बेशुमार प्राणियों का जमघट, कहीं गुड्डे-गुड़ियों के खेल, तो कहीं किताबों की मोहक लायब्रेरी। कहीं खेल-कूद के अनगिनत सामान तो कहीं बच्चों के लिए बक्सों में बंद गेमों का एक पूरा संग्रहालय। बस यूँ समझिए कि सर्दियों की छुट्टियों का भरपूर मज़ा लेने का अंतहीन सिलसिला यहाँ मौजूद था। पर पहले उस घंटों वाली फ़ौजी घड़ी की बात। साल में एक बार हमें घंटाघर की उस घड़ी में दुपहर के बारह घंटों की टंकार सुनाने के लिए वहाँ ले जाया जाता। बकिंघम पैलेस के सिपाहियों की ‘टूपिंग ऑफ दि कलर’ रस्म की तरह यह हमारी ज़िंदगी की सबसे रंगीन, स्थायी और महत्वपूर्ण घटना बन चुकी थी। भव्य शोभायात्रा के शानदार प्रदर्शन में अपने आप में अनोखी। बारह बजने से कुछ मिनट पहले ही शहर के सारे विशिष्ट बाशिंदे फ़ौजी घड़ी के नीचे, घिसी टूटी टा...