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बजे कुण्डलपुर में बधाई – Baje Kundalpur Mein Badhai (Bhajan Lyrics)

बजे कुण्डलपुर में बधाई

के नगरी में वीर जन्मे, महावीर जी
जागे भाग हैं त्रिशला माँ के,
के त्रिभवन के नाथ जन्मे, महावीर जी

हो… शुभ घडी जनम की आई,
सवरग से देव आये, महावीर जी
तेरा नवन करें मेरु पर
के, इंद्र जल भर लाए, महावीर जी

हो.. तुझे देवीआं झुलाये पलना,
मन में मगन हो के, महावीर जी
तेरे पलने में हीरे मोती,
के. गोरिओं में लाल लटके, महावीर जी

हो… अब ज्योति तेरी जागी
के सूर्य चाँद छिप जाए, महावीर जी
तेरे पिता लुटावें मोहरें
खजाने सारे खुल जाएंगे, महावीर जी

हो… हम दरश को तेरे आए
के पाप सब काट जाएंगे, महावीर जी
बजे कुण्डलपर में बधाई,
के नगरी में वीर जन्मे, महावीर जी

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Ke nagari mein veer janme, Mahaveer ji  

Jaage bhaag hain Trishala maa ke,  

Ke tribhavan ke naath janme, Mahaveer ji  


Ho… shubh ghadi janam ki aai,  

Savarag se dev aaye, Mahaveer ji  

Tera navan karen Meru par  

Ke, Indra jal bhar laaye, Mahaveer ji  


Ho.. tujhe deviyaan jhulaayen palna,  

Man mein magan ho ke, Mahaveer ji  

Tere palne mein heere moti,  

Ke. goriyon mein laal latke, Mahaveer ji  


Ho… ab jyoti teri jaagi  

Ke surya chaand chhip jaaye, Mahaveer ji  

Tere pita lutaaven moharen  

Khazaane saare khul jaayenge, Mahaveer ji  


Ho… hum darash ko tere aaye  

Ke paap sab kat jaayenge, Mahaveer ji  

Baje Kundalpur mein badhaai,  

Ke nagari mein veer janme, Mahaveer ji

मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा – Mantra Namokar Hamein Prano Se Pyara

मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा

यह हो वो जहाज जिसने लाखों को तारा 

णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं

अरिहंतों को नमन हमारा, अशुभ धर्म अरि हनन करें
सिद्धों के सुमिरन से आत्मा सिद्ध क्षेत्र को गमन करे
भव भव में ना हो जनम दोबारा,
मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा…

आचार्यों के आचारों से निर्मल निज आचार करें
उपाधयाय को ध्यान धरें हम संवारता सत्कार करें
सर्व साधू को नमन हमारा,
मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा…

णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं

सोते उठते, चलते फिरते इसी मंत्र का जाप करे
ताप हमारे तो उनका भी छेदअपने आप करें
इसी मंत्र का लेलो सहारा,
मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा…

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Yah ho vo jahaaj jisne laakhon ko taara


Namo Arihantaanaṃ  

Namo Siddhaanaṃ  

Namo Aayariyaanaṃ  

Namo Uvajjhaayaanaṃ  

Namo Loe Savva Saahuunaṃ  


Arihanton ko naman hamaara, ashubh dharm ari hanan karen  

Siddhon ke sumiran se aatma siddh kshetra ko gaman kare  

Bhav-bhav mein na ho janam dobaara,  

Mantra Namokaar hamen praanon se pyaara…


Aachaaryon ke aachaaron se nirmal nij aachaar karen  

Upadhyaay ko dhyaan dharen, hum sanvarta satkaar karen  

Sarv saadhu ko naman hamaara,  

Mantra Namokaar hamen praanon se pyaara…


Namo Arihantaanaṃ  

Namo Siddhaanaṃ  

Namo Aayariyaanaṃ  

Namo Uvajjhaayaanaṃ  

Namo Loe Savva Saahuunaṃ  


Sote uthte, chalte phirte isi mantra ka jaap karen  

Taap hamaare to unka bhi chhed apne aap karen  

Isi mantra ka le lo sahaara,  

Mantra Namokaar hamen praanon se pyaara…

जीवन है पानी की बूँद – Jeevan Hai Pani Ki Boond (Bhajan Lyrics)

जीवन है पानी की बूँद

जीवन है पानी की बूँद कब मिट जाए रे
होनी अनहोनी कब क्या घाट जाए रे

जितना भी कर जाओगे, उतना ही फल पाओगे
करनी जो कर जाओगे, वैसा ही फल पाओगे
नीम के तरु में नहीं आम दिखाए रे
जीवन है पानी की बूँद…

चाँद दिनों का जीवन है, इसमें देखो सुख काम है
जनम सभी को मालूम है, लेकिन मृत्यु से ग़ाफ़िल है
जाने कब तन से पंक्षी उड़ जाए रे
जीवन है पानी की बूँद…

किस को मने अपना है, अपना भी तो सपना है
जिसके लिए माया जोड़ी क्या वो तेरा अपना है
तेरा हो बेटा तुझे आग लगाए रे
जीवन है पानी की बूँद…

गुरु जिस को छू लेते हैं वो कुंदन बन जाता है
तब तक सुलगता दावानल, वो सावन बन जाता है
आतंक का लोहा अब पारस कर ले रे
जीवन है पानी की बूँद…

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मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है – Madhuban Ke Mandiro Mein Bhagwan Bas Raha Hai

मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है

मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है ।
पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥

आध्यात्म का यह सोना पारस ने खुद दिया है,
ऋषिओं ने इस धरा से निर्वाण पद लिया है ।
सदिओं से इस शिखर का स्वर्णिम सुयश रहा है,
पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥
मधुबन के मंदिरों में…

तीर्थंकरों के तप से पर्वत हुआ यह पावन,
केवल्य रश्मिओं का बरसा यहां सावन ।
उस ज्ञानामृत के जल से पर्वत सरस रहा है,
पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥
मधुबन के मंदिरों में…

पर्वत के गर्भ में है रत्नो का है वो खजाना,
जब तक है चंन्द सूरज होगा नहीं पुराना ।
जन्मा है जैन कुल में तू क्यों तरस रहा है,
पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥
मधुबन के मंदिरों में…

नागो को भी यह पारस राजेन्द्र सम बनाए,
उपसरग के समय जो धेन्द्र बन के आए ।
पारस के सर पे देवी पद्मावती यहाँ है,
पारस प्रभु के दर पे सोना बरस रहा है ॥
मधुबन के मंदिरों में…

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मैं थाने पूजन आयो – Main Thane Pujan Aayo (Bhajan Lyrics in Hindi)

मैं थाने पूजन आयो

श्री जी! मैं थाने पूजन आयो | मेरी अरज सुनो दीनानाथ |
श्री जी! मैं थाने पूजन आयो |१|

जल चन्दन अक्षत शुभ लेके, ता में पुष्प मिलायो |
श्री जी! मैं थाने पूजन आयो |२|
चरु अरु दीप धूप फल लेकर, सुन्दर अर्घ बनायो |
श्री जी! मैं थाने पूजन आयो |३|
आठ पहर की साठ जु घड़ियां, शान्ति शरण तोरी आयो |
श्री जी! मैं थाने पूजन आयो |४|
अर्घ बनाय गाय गुणमाला, चरणन शीश झुकायो |
श्री जी! मैं थाने पूजन आयो |५|
मुझ सेवक की अर्ज यही है, जामन मरण मिटावो |
मेरा आवागमन छुटावोI श्री जी मैं थाने पूजन आयो |६|

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मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है – Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है

करते हो तुम गुरुवर, मेरा नाम हो रहा है

पटवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है
बिन मांगे मेरे गुरुवर हर चीज मिल रही है
हर वार दुश्मनो का नाकाम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से…

मेरी जिंदगी में तुम हो, किस बात की कमी है
मुझे और अब किसी की परवाह भी नहीं है
तेरी बदौलतों से सब काम हो रहा है
मेरा आपकी कृपा से…

दुनिया में होंगे लाखों, तेरे जैसा कौन होगा
तुझ जैसा बंदापरवर भला ऐसा कौन होगा
तेरे नाम का ही सुमिरन, आराम दे रहा है
मेरा आपकी कृपा से…

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जब कोई नहीं आता मेरे बाबा आते है – Jab Koi Nahi Aata Mere Baba Aate Hai

जब कोई नहीं आता मेरे बाबा आते है

जब कोई नहीं आता मेरे बाबा आते है ।
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है ॥

मेरे नैया चलती है, पतवार नहीं चलती ।
किसी और को अब मुझको तरकर नहीं चलती ॥
मै डरता नहीं जग से, बाबा साथ आते है ।
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है ॥

कोई याद करे उनको दुःख हल्का हो जाए ।
कोई भक्ति करे उनकी, वो उनका हो जाए ॥
ये बिन बोले सब कुछ पहचान जाते है ।
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है ॥

ये इतने बड़े होकर, दीनो से प्यार करे ।
अपने भक्तो के दुःख को वो पल में दूर करे ॥
सब भक्तो का कहना बाबा मान जाते है ।
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है ॥

मेरे मन के मंदिर में बाबा का वास रहे ।
कोई रहे ना रहे बस बाबा पास रहे ॥
मेरे व्याकुल मन को बाबा जान जाते है ।
मेरे दुःख के दिनों में वो बड़े काम आते है ॥

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भजन चाँदनपुर के महावीर – Bhajan Chandanpur Ke Mahaveer (Lyrics in Hindi)

भजन चाँदनपुर के महावीर

चाँदनपुर के महावीर! हमारी पीर हरो | टेक |
जयपुर राज्य गाँव चाँदनपुर, तहाँ बनो उन्नत जिनमंदिर |
निकट नदी-गम्भीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||१||

पूरब बात चली यों आवे, एक गाय चरने को जावे |
झर जाय उसका क्षीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||२||

एक दिवस मालिक संग आयो, देख गाय टीलो खुदवायो |
खोदत भयो अधीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||३||

रैन माँहि तब सुपनो दीनों, धीरे-धीरे खोद जमीनो |
इसमें है तस्वीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||४||

प्रात होत फिर भूमि खुदाई, वीर जिनेश्वर प्रतिमा पाई |
भई इकट्ठी भीड़, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||५||

तब ही से हुआ मेला जारी, होय भीड़ हर साल करारी |
चैत मास आखीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||६||

लाखों मीना गूजर आवें, नाचें गावें गीत सुनावें |
जय बोलें महावीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||७||

जुडें हजारों जैनी भाई, पूजन पाठ करें सुखदाई |
मन वच तन धरि धीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||८||

छत्र चमर सिंहासन लावें, भरि भरि घृत के दीप जलावें |
बोलें जै गम्भीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||९||

जो कोई सुमरे नाम तुम्हारा, धन संतान बढ़े व्यौपारा |
होय निरोग शरीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर हमारी पीर हरो ||१०||

‘मक्खन’ शरण तुम्हारी आयो, पुण्य योग से दर्शन पायो |
खुली आज तकदीर, हमारी पीर हरो |
चाँदनपुर के महावीर! हमारी पीर हरो ||११||

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सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी – Saj Dhaj Kar Jis Din Maut Ki Shahjadi Aayegi

सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं,
सामान सो बरस का है, पल की खबर नहीं।

सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी,
ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी।

छोटो सा तू, कितने बड़े अरमान तेरे,
मिट्टी का तु, सोने के सब सामन हैं तेरे।
मिट्टी की काया मिट्टी में जिस दिन समाएगी,
ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥

पर तोल ले, पंची तू पिंजरा तोड़ के उड़ जा,
माया महल के सारे बंधन छोड़ के उड़ जा।
धड़कन में जिसदिन मौत तेरी गुनगुनायेगी,
ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥

काहे करे नादान तू दुनिया में नादानी,
काया तेरी यह राजसी है राख हो जानी।
‘राजेंदर’ तेरी आत्मा विदेह जायेगी,
ना सोना काम आएगा, ना चांदी आएगी॥

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नवकार मंत्र ही महामंत्र – Navkar Mantra Hi Mahamantra (Bhajan Lyrics)

नवकार मंत्र ही महामंत्र

नवकार मंत्र ही महामंत्र, निज पद का ज्ञान कराता है।
निज जपो शुद्ध मन बच तन से, मनवांछित फल का दाता है॥1॥
नवकार मंत्र ही महामंत्र…
पहला पद श्री अरिहंताणां, यह आतम ज्योति जगाता है।
यह समोसरण की रचना की भव्यों को याद दिलाता है॥2॥
नवकार मंत्र ही महामंत्र…
दूजा पद श्री सद्धाणं है, यह आतम शक्ति बढ़ाता है।
इससे मन होता है निर्मल, अनुभव का ज्ञान कराता है॥3॥
नवकार मंत्र ही महामंत्र…
तीजा पद श्री आयरियाणां, दीक्षा में भाव जगाता है।
दुःख से छुटकारा शीघ्र मिले, जिनमत का ज्ञान बढ़ाता है॥4॥
नवकार मंत्र ही महामंत्र…
चौथा पद श्री उवज्ज्ञायणं, यह जैन धर्म चमकता है।
कर्मास्त्रव को ढीला करता, यह सम्यक्‌ ज्ञान कराता है॥5॥
नवकार मंत्र ही महामंत्र…

पंचमपद श्री सव्वसाहूणं, यह जैन तत्व सिखलाता है।

दिलवाता है ऊँचा पद, संकट से शीघ्र बचाता है॥6॥

नवकार मंत्र ही महामंत्र…

तुम जपो भविक जन महामंत्र, अनुपम वैराग्य बढ़ाता है।

नित श्रद्धामन से जपने से, मन को अतिशांत बनाता है॥7॥

नवकार मंत्र ही महामंत्र…

संपूर्ण रोग को शीघ्र हरे, जो मंत्र रुचि से ध्याता है।

जो भव्य सीख नित ग्रहण करे, वो जामन मरण मिटाता है॥8॥

नवकार मंत्र ही महामंत्र…

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कभी वीर बन के महावीर बन के – Kabhi Veer Banke Mahaveer Banke (Tirthankar Vandana)

कभी वीर बन के महावीर बन के

कभी वीर बन के, महावीर बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तुम ऋषभ रूप में आना, तुम अजित रूप में आना।

संभवनाथ बन के, अभिनंदन बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तुम सुमति रूप में आना, तुम पद्‍म रूप में आना।

सुपार्श्वनाथ बन के, चंदा प्रभु बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तुम पुष्पदंत रूप में आना, तुम शीतल रूप में आना।

श्रेयांसनाथ बन के, वासुपूज्य बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तुम विमल रूप में आना, तुम अनंत रूप में आना।

धरमनाथ बन के, शांतिनाथ बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तुम कुंथु रूप में आना, तुम अरह रूप में आना।

मल्लिनाथ बन के, मुनि सुव्रत बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥
तुम नमि रूप में आना, तुम नेमि रूप में आना।

पार्श्वनाथ बन के, महावीर बन के चले आना,
दरश मोहे दे जाना॥

कभी वीर बन के, महावीर बन के चले आना,

दरश मोहे दे जाना॥

तीर्थंकर वंदना ( Tirthankar Vandana )

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एक बार प्रभु आओ चाहे आके चले जाना – Ek Baar Prabhu Aao Chahe Aake Chale Jana

एक बार प्रभु आओ चाहे आके चले जाना

जाने नहीं देंगे हम, तुम जाके तो दिखलाना

वो कौन घड़ी होगी, वो कौन सा पल होगा,

तेरा दर्शन कर भगवन, मेरा जनम सफल होगा,

एक पल की खातिर तुम, अब और ना तरसाना…

एक बार प्रभु आओ, चाहे आके चले जाना,

जाने नहीं देंगे हम, तुम जाके तो दिखलाना…..

हमने तुझे पुजा है, मन वाणी कर्मों से,

दीदार की प्यासी है, आंखे कर्इ जन्मों से,

इक झलक दिखाके तुम, ये प्यास बुझा जाना…

एक बार प्रभु आओ, चाहे आके चले जाना,

जाने नहीं देंगे हम, तुम जाके तो दिखलाना…..

मेरी आस बंधी तुमसे, ये आस ना तोड़ोगे,

ये दुनिया देख रही, विश्वास ना तोड़ोगे

हूं पूर्ण समर्पित मैं, मुझको नही ठुकराना…

एक बार प्रभु आओ, चाहे आके चले जाना,

जाने नहीं देंगे हम, तुम जाके तो दिखलाना…..

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तेरे पाँच हुए कल्याणक प्रभो – Tere Panch Hue Kalyanak Prabho (Bhajan Lyrics)

तेरे पाँच हुए कल्याणक प्रभो

तेरे पाँच हुए कल्याणक प्रभो, इक बार मेरा कल्याण कर दों।
अन्तर्यामी-अन्तर्ज्ञानी, प्रभु दूर मेरा अज्ञान कर दों॥ टेक॥

गर्भ समय में रत्न जो बरसें, उनमें से एक रतन नहीं चाहूँ।।
जन्म समय क्षीरोदधि जल से, इन्द्रों ने किया वो न्हवन नहीं चाहूँ।
जो चित्त को निर्मल शान्त करे, वही गन्धोदक मुझे दान कर दो… ॥१॥

धार दिगम्बर वेश किया तप, तपकर विषय विकार को त्यागा।
निर्ग्रन्थों का पथ अपनाकर, निज आतम को ही आराधा।
अपने लिए बरसों ध्यान किया, मेरी ओर थोड़ा-सा ध्यान कर लो ॥२॥

केवलज्ञान की खिल गई ज्योति, लोकालोक दिखानेवाली।
समवशरण में खिरती वाणी, सबकी समझ में आने वाली।
हे वीतराग सर्वज्ञ प्रभो, मुझे मेरा दरश आसान कर दो ॥३॥

तीर्थंकर होकर तुम प्रगटे, स्वाभाविक ही मुक्ति तुम्हारी।
सिद्धालय में बैठ प्रभु ने, शाश्वत सुख की धारा पाली।
यहाँ कौन है ऐसा तेरे सिवा, औरों को जो अपने समान कर दो।।४।।

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जन्म लिया है महावीर ने – Janm Liya Hai Mahaveer Ne (Bhajan Lyrics)

जन्म लिया है महावीर ने

जैनम जयति शासनं ये जैन धर्म की शान है ||

चैत्र सुदी तेरस तिथि आयी, शुक्रवार का दिन प्यारा |
माँ त्रिशला के गर्भ से आये लिया प्रभु ने अवतारा |
दर्शन को आते नर-नारी, गाते मंगल गान हैं || (1)

कुण्डलपुर में खुशियां छाई, सिद्धार्थ जी हर्षाये |
वर्द्धमान शुभ नाम रखाया, मेरु शिखर पर वो आये |
न्वहन पूजा करें सभी, मंत्रों की गूंजे तान है || (2)

हिंसा पशु बलि आडम्बर से वर्द्धमान मन द्रवित हुआ |
मन में करुणा भर आयी, फिर जैन धर्म था उदित हुआ |
सत्य अहिंसा धर्म जियो, और जीने दो का ज्ञान है || (3)

बारह वर्ष की घोर तपस्या, खपा दिए थे कर्म सभी |
कैवल्यज्ञान को पाकर के फिर,जान लिए थे मर्म सभी |
निर्मल मन से महावीर का हम करते गुण-गान हैं || (4)

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वर्तमान को वर्धमान की – Vartman Ko Vardhman Ki (Bhajan Lyrics)

वर्तमान को वर्धमान की

परदृष्टि होके व्याकुल, महावीर पे रुकी हैं,
महावीर….महावीर….महावीर…..महावीर..
हिंसा पीडित विश्व राह महावीर की तकता है,
वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है,
पापों के दलदल में फ़सकर धर्म सिसकता हैं ||वर्तमान…||

हिंसा के बादल छायें संसार पर,
सर्वनाश के दुनिया खडी कगार पर,
नहीं शास्त्रों में अब शस्त्रों में होड हैं,
मानवता रोती हैं अपनी हार पर
महावीर ही पथभूलों को समझा सकता है || हिंसा पीडित...॥(1)

यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचित,
समं भ्रान्ति धौव्य-व्यय-जनि-लसन्तौऽन्तरहिता।
जगत्साक्षी मार्ग-प्रगटन-परो-भानुरिव यो,
महावीर स्वामी नयन-पथ-गामी-भवतुममे॥

बांधो प्रभु को भक्ति भाव की डोर से,
करो प्रार्थना सब जीवों की ओर से,
वीतराग व्यथितों के दुख पर ध्यान दें,
हमको करे कृतार्थ कृपा की कोर से,
प्रभु के नयनों से करुणा का नीर झलकता है ||हिंसा पीडित…||(2)

वर्धमान के आदर्शो पर ध्यान दो,
हितोपदेशों को अंतर में स्थान दो,
तुम जिसके वंशज जिसकी संतान हो,
होकर एक उसे पूरा सम्मान दो,
मिलकर जीने में ही जीवन की सार्थकता हैं || हिंसा पीडित…||(3)

महामोहांतक-प्रशमनःप्राकस्मिक-भिषड,
निरापेक्षो बन्धुर्विदित-महिमा मड्गलकरः।
शरण्यः साधूनां भव भयभृतामुत्तमगुणो,
महावीर स्वामी नयन-पथ-गामी-भवतुममे॥

वह आये तो हर संकट को प्राण हो,
अभय सुरक्षित सर्व सुखी हर प्राण हो,
जियो और जीने दो के महामंत्र से,
विश्व शांति पाये सबका कल्याण हो,
प्रभु की मृदु वाणी में आध्यामिक मादकता हैं ||हिंसा पीडित…||(4)

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मेरे महावीर झूले पलना – Mere Mahavir Jhule Palna (Bhajan Lyrics)

मेरे महावीर झूले पलना

काहे को प्रभु को बनो रे पालना, काहे के लागे फुँदना |
रत्नो का पलना मोतियों के फुँदना, जगमग कर रहा अंगना |
ललना का मुख निरख के बोले, सूरज चाँद निकलना || (1)

कौन प्रभु को पलना झुलावे, कौन सुमंगल गावे |
देवीय आवें पलना झुलावे, देव सुमन बरसावें |
पालनहारे पलना झूले, बन त्रिशला के ललना || (2)

त्रिशला रानी मोदक लावे, सिद्धारथ हर्षावें |
मणि-मुक्ता और सोना-रूपा दोनों हाथ उठावें |
कुण्डलपुर से आज स्वर्ग का स्वाभाविक है जलना || (3)

निर्मल नैना निर्मल मुख पर, निर्मल हास् की रेखा |
यह निर्मल मुखड़ा सुरपति ने सहस नयन कर देखा |
निर्मल प्रभु का दर्श किये बिन भाव होये निर्मल ना || (4)

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नाम है तेरा तारण हारा – Naam Hai Tera Taran Hara (Bhajan Lyrics)

नाम है तेरा तारण हारा

नाम है तेरा तारण हारा कब तेरा दर्शन होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा – 2
तुमने तारे लाखो प्राणी
यह संतो की वाणी है
तेरी छवि पर मेरे भगवन
ये दुनिया दीवानी है – 2
भाव से तेरी पूजा रचाओं, जीवन में मंगल होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी सुन्दर, वो कितना सुन्दर होगा – 2
सुरवर मुनिवर जिनके चरण में
निशदिन शीश जुकते है
जो गाते है प्रभु की महिमा
वो सब कुछ पा जाते है – 2
अपने कष्ट मिटाने को तेरे, चरणों का वंदन होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा – 2
मन की मुराते लेकर स्वामी
तेरे चरण में आये है ,
हम है बालक , तेरे जिनवर
तेरे ही गुण गाते है – 2
भाव से पार उतरने को तेरे, गीतों का सरगम होगा
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर, वो कितना सुंदर होगा – 2
नाम है तेरा तारण हारा ……

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मोक्ष के प्रेमी हमने – Moksh Ke Premi Hamne (Bhajan Lyrics in Hindi)

मोक्ष के प्रेमी हमने

मोक्ष के प्रेमी हमने, कर्मों से लड़ते देखें ।
मखमल पर सोनेवाले, भूमि पर चलते देखें ॥

सरसोंका भी एक दाना, जिनके तन पर चुबता था ।
काया की सुध छोड़ी, गीदड़ तन खाते देखें ॥(1)

ऐसे श्री पारस स्वामी, तदभव थे मोक्षगामी ।
कर्मों ने नाहीं बख्शा, पत्थर तक गिरते देखें ॥(2)

सेठो में सेठ सुदर्शन, कामी रानी का बंधन।
शील को नाहीं छोड़ा, सूली पर चढ़ते देखें ॥(3)

ऐसे निकलंक स्वामी, अध्ययन करने की ठानी।
जिनशासन नाहीं छोडा, मस्तक तक कटते देखें ॥(4)

भोगों को अब तो त्यागो, जागो चेतन अब जागो।
आशा ना पूरी होती, मरघट तक जाते देखें ॥(5)

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चेतो-चेतो आराधना में – Cheto Cheto Aaradhana Mein (Bhajan Lyrics)

चेतो-चेतो आराधना में

देखो-देखो यह जीव की, विराधना का फल।
चेतो-चेतो आराधना में, मत बनो निर्बल ॥टेक।।

पाषाण खण्ड कह रहे, कठोरता त्यागो।
विनम्र हो उत्साह से, शिवमार्ग में लागो।।
बहते हुए झरने कहें, धोओ मिथ्यात्व मल ।।देखो-देखो…॥१॥

ईर्ष्या त्यागो जलती हुई, अग्नि है कह रही।
मत चाह दाह में जलो, सुख अन्तर में सही ।।
वायु कहे भ्रमना वृथा, होओ निज में निश्चल ।।देखो-देखो…।।२।।

जड़ता छोड़ो प्रमाद को नाशो कहें तरुवर ।
शुद्धातमा ही सार है, उपदेश दें गुरुवर ।।
समझो-समझो निजात्मा, अवसर बीते पल-पल ।।देखो-देखो…।।३।।

मायाचारी संक्लेशता का, फल कहें तिर्यंच।
जागो अब मोह नींद से, छोड़ो झूठे प्रपञ्च।।
जिनधर्म पाया भाग्य से, दृष्टि करो निर्मल ।।देखो-देखो…।।४।।

श्रृंगार अरु भोगों की रुचि का, फल कहती नारी।
कंजूसी पूर्वक संचय का, फल कहते भिखारी ।।
बहु आरम्भ परिग्रह फल में, नारकी व्याकुल ।।देखो-देखो… ॥५॥

असहाय शक्ति हीन, देखो दरिद्री रोगी।
कोइ इष्ट वियोगी, कोई अनिष्ट संयोगी।
घिनावना तन रूप, अंगोपांग है शिथिल ।।देखो-देखो…॥६॥

यदि ये दु:ख इष्ट नहीं हैं, तो निज भाव सुधारो।
निवृत्त हो विषय कषायों से, निजतत्त्व विचारो।।
चक्री के वैभव भोग भी, सुख देने में असफल ।।देखो-देखो…|७||

पाकर किंचित अनुकूलताएँ, व्यर्थ मत फूलो।
है पराधीन आकुलतामय, नहीं मोह में भूलो ।।
ध्रुव चिदानन्दमय आत्मा, लक्ष्य करो अविरल ।।देखो-देखो…॥८॥

पुण्यों की भी तृष्णायतनता, अबाधित जानो।।
बन्धन तो बन्धन ही, उसे शिवमार्ग मत मानो।।
ज्यों अंक बिन बिन्दी त्यों स्वानुभव बिन जीवन निष्फल॥देखो-देखो…॥९॥

अब योग तो सब ही मिले, पुरुषार्थ जगाओ।
अन्तर्मुख हो बस मात्र, जाननहार जनाओ।।
सन्तुष्ट निज में ही रहो, ब्रह्मचर्य हो सफल ।।देखो-देखो…।।१०।।

सब प्राप्य निज में ही अहो, स्थिरता उर लाओ।
तुम नाम पर व्यवहार के, बाहर न भरमाओ ।।
निर्ग्रन्थ हो निर्द्वन्द हो, ध्याओ निजपद अविचल ॥देखो-देखो…॥११॥

निज में ही सावधान ज्ञानी, साधु जो रहते।।
वे ही जग के कल्याण में, निमित्त हैं होते।
ध्याओ ध्याओ शुद्धात्मा, पर की चिन्ता निष्फल ॥देखो-देखो…॥१२॥

निर्बन्ध के इस पंथ में, जोड़ो नहीं सम्बन्ध।
विचरो एकाकी निष्पृही, निर्भय सहज निशंक।
निर्मूढ़ हो निर्मोही हो, पाओ शिवपद अविचल ।।देखो-देखो…॥१३॥
Artist - ब्र. श्री रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’

रचनाकार: ब्र. श्री रवीन्द्र जी 'आत्मन्'

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मेरे मन मंदिर में आन पधारो – Mere Mann Mandir Mein Aan Padharo (Bhajan Lyrics)

मेरे मन मंदिर में आन पधारो

भगवन तुम आनंद सरोवर, रूप तुम्हारा महा मनोहर |
निश-दिन रहे तुम्हारा ध्यान, पधारो महावीर भगवान ||(1)

सुर किन्नर गणधर गुण गाते, योगी तेरा ध्यान लगाते |
गाते सब तेरा यशगान, पधारो महावीर भगवान ||(2)

जो तेरी शरणागत आया, तूने उसको पार लगाया |
तुम हो दयानिधि भगवान, पधारो महावीर भगवान ||(3)

भक्त जनों के कष्ट निवारे, आप तरें हमको भी तारें |
कीजे हमको आप सामान, पधारो महावीर भगवान ||(4)

आये हैं हम शरण तिहारी, भक्ति हो स्वीकार हमारी |
तुम हो करुणा दयानिधान, पधारो महावीर भगवान ||(5)

रोम रोम पर तेज तुम्हारा, भूमंडल तुमसे उजियारा |
रवि-शशि तुमसे ज्योतिर्मान, पधारो महावीर भगवान ||(6)

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जय जिनवाणी माता – Jai Jinvani Mata (Bhajan Lyrics in Hindi)

जय जिनवाणी माता

जय जिनवाणी २

आज सभा में मैया तोहे पुकारू २

आज सभा में तोहे पुकारू, जग की भाग्य विधाता ।।

रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।।

आन के मेरे कंठ विराजो मैया २

आन के मेरे कंठ विराजो, स्वर सरगम की गाथा ।।

रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।।

शाष्त्र ग्रंथो का बोध नहीं हैं मैया २

शाष्त्र ग्रंथो का बोध नहीं हैं, हमको कुछ नहीं आता ।।

रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।।

योगेन्द्र सागर तुम्हे पुकारे मैया २

योगेन्द्र सागर तुम्हे पुकारे, तुमको शीश नवाता ।।

रख लाज हमारी, जय जिनवाणी ०० ।।

जय जिनवाणी माता, रख लाज हमारी ।

जय जिनवाणी माता ।।

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पारस रे तेरी कठिन डगरिया – Paras Re Teri Kathin Dagariya (Bhajan Lyrics)

पारस रे तेरी कठिन डगरिया

पारस रे तेरी कठिन डगरिया
किस विधि मैं तोहे पाऊँ रे साँवरिया

कठिन तेरा जिन रूप में आना
कठिन तेरे शुभ दर्शन पाना
कठिन हटाना श्री मुख से नजरिया
पारस रे तेरी कठिन डगरिया

सयम नियम कठिन व्रत तेरे,
तेरी तरह सुन भगवन मेरे
ओढ़ना कठिन ब्रह्मचर्य की चदरिया
पारस रे तेरी कठिन डगरिया

कठिन महल तज वन में जाना
कठिन रात दिन ध्यान लगाना
टप अति कठिन, कठिन मुनिचर्या
रे जिनवर तेरी कठिन डगरिया

कठिन तुझे आहार कारण
अंतराय से कठिन बचाना
कठिन जिमाना बिन प्याली बिन थरिया
पारस रे तेरी कठिन डगरिया

कठिन प्रहार कमठ के सह के
कठिन उपसर्ग में अवचिल रह के
पायी कठिन केवल की उजरिया
पारस रे तेरी कठिन डगरिया

मोक्ष जहां से गया तू जिनराई
उस पर्वत की कठिन चढ़ाई
तुही ले चल मेरी थाम के उँगरिया
पारस रे तेरी कठिन डगरिया

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तुम से लागी लगन – श्री पार्श्वनाथ स्तुति – Tumse Lagi Lagan Shri Parshvanath Stuti

तुम से लागी लगन

कविश्री ‘पंकज’

तुम से लागी लगन,
ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा ।
निशदिन तुमको जपूँ,
पर से नेह तजूँ, जीवन सारा,
तेरे चरणों में बीत हमारा ॥टेक॥
अश्वसेन के राजदुलारे,
वामा देवी के सुत प्राण प्यारे।
सबसे नेह तोड़ा,
जग से मुँह को मोड़ा,
संयम धारा ॥
मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥
इंद्र और धरणेन्द्र भी आए,
देवी पद्मावती मंगल गाए ।
आशा पूरो सदा,
दुःख नहीं पावे कदा,
सेवक थारा ॥
मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥
जग के दुःख की तो परवाह नहीं है,
स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है।
मेटो जामन मरण,
होवे ऐसा यतन,
पारस प्यारा ॥
मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥
लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊँ,
जग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊँ ।
‘पंकज’ व्याकुल भया,
दर्शन बिन ये जिया लागे खारा ॥
मेटो मेटो जी संकट हमारा ॥
तुम से लागी लगन,
ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा ।

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केसरिया केसरिया – Kesariya Kesariya (Bhajan Lyrics in Hindi)

केसरिया केसरिया

तन केसरिया, मन केसरिया, पूजा के चावल केसरिया।
भक्ति में हम सब केसरिया॥ केसरिया...॥

हम केसरिया, तुम केसरिया, अष्ट द्रव्य सब हैं केसरिया।
मंदिर की है ध्वजा केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥
केसरिया...॥

इन्द्र केसरिया, इन्द्राणि केसरिया, सिद्धों की पूजन केसरिया।
पूजा के सब भाव केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥
केसरिया...॥

वीर प्रभु की वाणी केसरिया, अहिंसा परमो धर्म केसरिया।
जीयो जीने दो केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥
केसरिया...॥

पीछी केसरिया, कमण्डल केसरिया, दिगम्बर साधु भी केसरिया।
शत शत वंदन है केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥
केसरिया...॥

स्वर्णिम रथ देखो केसरिया, स्वर्ण वरण प्रभुजी केसरिया।
छत्र चंवर ध्वज सब केसरिया, भक्ति में हम सब केसरिया॥
केसरिया...॥

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तूने खूब दिया भगवान – Tune Khoob Diya Bhagwan (Bhajan Lyrics in Hindi)

तूने खूब दिया भगवान

हाथ ये फेले रहते , सामने तेरे
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

(1) याद है मुझे वो दिन खाली जेब थी मेरी
दर दर भटकता था में -2
गैरों की क्या कहूँ , आपनो की आंखों में
रह रह खटकता था में -2
चारो तरफ थे मेरे गम के अन्धेरे
आखित में आया बाबा काम तू मेरे-2
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

(2) लड़खड़ा गया अगर में , जीवन की राह में
तेरा सहारा मिला, तेरा सहारा -2
मुझसे दो कदम आगे किस्मत चली मेरी
पाके इशारा तेरा-2
देने को कुछ नही है पास में मेरे
दो आँशु चढ़ा देता हूँ , चरणों मे तेरे-2
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

(3) मांगना में छोर दूँ , हो नही सकता प्रभु
आदत न जाये मेरी आदत न जाये-2
और तुझसे लेने में बच्चो को कभी
लाज न आये बाबा, लाज न आये
दबा जा रहा हूँ मै तो कर्जे में तेरे
अहसान कितने बाबा ,मुझपे है तेरे -2
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

(4) लायक नही था में इतने के हे प्रभु ,
जितना दिया है तुमने -2
सूने से जीवन मे तूने खुशनसीबी का रंग भर दिया है बाबा
रंग भर दिया है
खाली दर से मुझे तू , अब न लौटना
इतना हंसाया तूने अब न रुलाना -2
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

(5) खुशियाँ जमाने भर की झोली में डाल दी
इनको संभाल पाऊँ इतना सऊर दे-2
गैरों के काम आऊं , औरो का दर्द लूं
ऐसी नियत मुझको तू बाबा जरूर दे
सब कुछ हो ले किन अभिमान न आये
भूले से किसी का भी सम्मान न जाये-2
तूने खूब दिया भगवान , तेरा बहुत बड़ा एहसान -2

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इक नाम सांचा इक नाम प्यारा – Ek Naam Saancha Ek Naam Pyara (Bhajan Lyrics)

इक नाम सांचा इक नाम प्यारा

एक नाम साँचा एक नाम प्यारा, लेले गुरु का अब तू सहारा-2
तेरे चरणों मैं हम सबका नमन हैं, विद्यासागर हैं नाम तिहारा-2
गुरुदेव मेरे गुरुदेव… बजले रे मन भजले…..

(1) सभी धर्मो के लोग हैं आते,-2
तेरी महिमा किले सब गुण गाते-2
भक्ति का तूने हैं मार्ग दिखाया
मिल जुल कर हैं रहना सिखाया….
एक नाम साँचा … गुरुदेव मेरे गुरुदेव…….

(2) धर्म के हैं ये पंथ निराले-2
गुरुवर को तू हृदय मैं बसा ले -2
नाम जपू मैं दिन रात तुम्हारा
नाम तुम्हारा हम सब का सहारा…..
एक नाम sancha… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(3) केसी ये महिमा तुमने दिखाई-2
सच की राह हैं तूने बताई -2
जो भी तेरे शरण मैं हैं आता
खाली हाथ कभी भी ना जाता…..
एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(4) विद्याधर से हुए विद्यासागर -2
रत्नत्रय के तुम हो सागर -2
तेरी वाणी हैं पावन वाणी
सुख पाते हैं लाखो प्राणी……..
एक नाम sancha… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(5) चरण शरण की शीतल छाया -2
हे परमेश्वर सदा तुम्हे ध्याया -2
पंच महाव्रत धारी तुम्ही हो
पंचम युग अवतारी तुम्ही हो……..
एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(6) धन्य वो भूमि जहा पर तूने -2
चौमासे का पर्व लगाया -2
चिंता मिटी जो तेरे दर आया
आचार्यो का मार्ग दिखाया…….
एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(7) दीप की सोभा ज्योति से होती-2
शीप की सोभा मोती से होती -2
धर्म गगन का tu ही सितारा
संयम नियम का पालनहारा……
एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

(8) गुरुकी सेवा से बढकर जगमे -2
कर्म नहीं हैं दूजा कोई -2
करती हवाएं ये जीवन नैया
तुम बन जाओ हमारे खिवइयां….
एक नाम सांचा… गुरुदेव मेरे गुरुदेव……..

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मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं – Main Gyananand Swabhavi Hun Lyrics

मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं

मैं हूं अपने में स्वयं पूर्ण, पर की मुझमें कुछ गंध नहीं ।
मैं अरस, अरूपी, अस्पर्शी, पर से कुछ भी सम्बन्ध नहीं ॥

मैं रंग-राग से भिन्न भेद से, भी मैं भिन्न निराला हूं ।
मैं हूं अखंड चैतन्य-पिण्ड, निज-रस में रमने वाला हूं ॥

मैं ही मेरा कर्ता-धर्ता, मुझमें पर का कुछ का काम नहीं ।
मैं मुझमें रमने वाला हूं, पर में मेरा विश्राम नहीं ॥

मैं शुद्ध-बुद्ध अविरुद्ध एक, पर परिणति से अप्रभावी हूं ।
आत्मानुभूति से प्राप्त तत्त्व, मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूँ ॥

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भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना – Bhagwaan Meri Naiyya Jain Bhajan (2 Versions) in Hindi

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना

1. भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना (रूप 1)

भगवान मेरी नैया, उस पार लगा देना
अब तक तोह निभाया है, आगे भी निभा देना
हम दिन दुखी निर्धन, नित नाम जपे प्रतिपल
यह सोच दरस दोगे, प्रभु आज नहीं तो कल
जो बाग़ लगाया है फूलो से सजा देना
अब तक तोह निभाया…

तुम शांति सुधाकर हो, तुम ज्ञान दिवाकर हो
मुम हँस चुगे मोती, तुम मानसरोवर हो
दो बूंद सुधा रूस की, हम को भी पिला देना
अब तक तोह निभाया…

रोकोगे भला कब तक, दर्शन दो मुझे तुम से
चरणों से लिपट जाऊं प्रभु शोक लता जैसे
अब द्वार खड़ा तेरे , मुझे रह दिखा देना
अब तक तोह निभाया है…

मझदार पड़ी नैया डगमग डोले भव में
आओ त्रिशाला नंदन हम धयान धरे मन में
अब दस करे विनती, मुझे अपना बना लेना
भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना
अब तक तोह निभाया है आगे भी निभा देना


2. भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना (रूप 2)

भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना ।
अब तक तो निभाया है, आगे भी निभा देना ॥

दल बल के साथ माया, घेरे जो मुझ को आ कर ।
तुम देखते ना रहना, झट आ के बचा लेना ॥

संभव है झंझटों में मैं तुझ को भूल जाऊं ।
पर नाथ दया कर के मुझ को ना भुला देना ॥

तुम देव मैं पुजारी, तुम इष्ट मैं उपासक ।
यह बात अगर सच है तो सच कर के दिखा देना ॥

तेरी कृपा से हमने हीरा जनम यह पाया ।
जब प्राण तन से निकले, अपने में मिला लेना ॥

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जिया कब तक उलझेगा संसार में – Adhyatmik Jain Bhajan Lyrics in Hindi


जिया कब तक उलझेगा संसार में

जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में।
कितने भव बीत चुके संकल्प-विकल्पों में।।टेक॥

उड़-उड़ कर यह चेतन गति-गति में जाता है।
रागों में लिप्त सदा भव-भव दुःख पाता है।।
पल भर को भी न कभी निज आतम ध्याता है।
निज तो न सुहाता है पर ही मन भाता है।।
यह जीवन बीत रहा झूठे संकल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ॥1जिया.॥

निज आत्मस्वरूप तो लख तत्त्वों का कर निर्णय ।
मिथ्यात्व छूट जाए समकित प्रगटे निजमय ।।
निज परिणति रमण करे हो निश्चय रत्नत्रय ।
निर्वाण मिले निश्चित छूटे यह भवदुःखमय ।।
सुख ज्ञान अनंत मिले चिन्मय की गल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ।।2जिया.॥

शुभ-अशुभ विभाव तजे हैं हेय अरे आस्रव ।
संवर का साधन ले चेतन का कर अनुभव ।।
शुद्धात्म का चिन्तन आनंद अतुल अनुभव ।
कर्मों की पगध्वनि का मिट जायेगा कलरव ।।
तू सिद्ध स्वयं होगा पुरुषार्थ स्वकल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में ।।3जिया.॥

तू कौन कहाँ का है अरु क्या है नाँव अरे ।
आया है किस घर से जाना किस गाँव अरे ।।
सोचा न कभी तूने होकर निज छाँव अरे ।
यह तन तो पुद्गल है दो दिन का ठाँव अरे।।
तू चेतन द्रव्य सबल ले सुख अविकल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में।।4जिया.॥

नर रे नर रे नर रे तू चेत अरे नर रे।
क्यों मूढ़ विमूढ़ बना कैसा पागल खर रे।।
अन्तर्मुख होजा तू निज का आश्रय कर रे।
पर अवलंबन तज रे निज में निज रस भर रे।।
पर परिणति विमुख हुआ तो सुखपल जल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में।।5जिया.॥

यदि अवसर चूका तो भव-भव पछताएगा।
फिर काल अनंत अरे दुःख का घन छाएगा ।।
यह नर भव कठिन महा किस गति में जाएगा।
नर भव पाया भी तो जिनश्रुत ना पायेगा।।
अनगिनती जन्मों में अनगिनती कल्पों में।
जिया कब तक उलझेगा संसार विजल्पों में।।6जिया.॥

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गुरु ने जहाँ-जहाँ भी ज्योति जलाई है – Vidyasagar Guru Bhajan Lyrics

गुरु ने जहाँ-जहाँ भी ज्योति जलाई है

काले-काले बादलों पर रोशनी सी छाई है।
विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव...

तन मन में वैराग्य जिनके समाया है।
शाश्वत सुख पाने छोड़ी जग माया है।
निर्मोही गुरुवर पे दुनिया रिसाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव...
अखियों को खोल जरा ज्ञान के उजाले में
रख विश्वास पूरा जग रखवाले में ।
कितनी ही बार मैंने खुद को समझाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव...

संकटों से भरा गुरु मुक्ति पथ हमारा है।
बीच भवर मैं नैया तेरा ही सहारा है।
हँसी खुशी आगे बढ़ो गुरु ने सिखाई है।
गुरु के सिवा हर चीज पराई है।
विद्यासागर गुरुदेव... विद्यासागर गुरुदेव...

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जैन धर्म के हीरे मोती – Jain Dharma Ke Heere Moti Bhajan Lyrics

जैन धर्म के हीरे मोती

ले लो रे कोइ प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली।

दौलत की दीवानों सुन लो, एक दिन ऐसा आयेगा।
धन दौलत और माल खजाना, पडा यहीं रह जायेगा।
सुन्दर काया मिट्टी होगी, चर्चा होगी गली गली ॥ ले लो रे...

क्यों करता तू तेरी मेरी, तज दे उस अभिमान को।
झूंठे झगडे छोड के प्राणी, भज ले तू भगवान को।
जग का मेला दो दिन का, अंत में होगी चला चली॥ ले लो रे...

जिन जिन ने ये मोती लूटे, वे ही माला माल हुए।
दौलत के जो बने पुजारी, आखिर में कंगाल हुए।
सोने चांदी वालों सुन लो, बात कहूं मैं भली भली॥ ले लो रे...

जीवन में दुख है तब तक ही, जब तक सम्यकज्ञान नहीं।
ईश्वर को जो भूल गया, वह सच्चा इंसान नहीं।
दो दिन को ये चमन खिला है, फ़िर मुर्झाये कली कली॥ ले लो रे...
जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली।
ले लो रे कोइ प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली।

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प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार – Navkar Mantra Bhajan Lyrics in Hindi

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार।
पांच पदों के पैतीस अक्षर, भव-भव के काँटे चक्कर ...
इसमें गर्भित है सारा आगमसर, इसके जपने से होता है भव पार।

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार।
अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय, सर्व साधु को मेरा नमन।
गुण समूह है ये एक सो आठ, अष्ट कर्मो को देते ये काट।
गुण सुमिरन करें हम भी जरा सा, जिनागम का है सार भरा सा...

पीले ये प्याला हम भी तो जरा सा, जपते जपते ही निकले मेरे प्राण।
वीर प्रभु से हम मांगे ये वरदान।

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार।
चंदना को भी तारा है सीता को भी, कुष्टी श्रीपाल की काया थी खिली।
तिरे सेठ सुदर्शन सोमासती, अर्जुनमाली और अंजनासती ...

हां कभी न कभी तिरे नैय्या मेरी, ध्याते ध्याते ही निकले मेरे प्राण।
वीर प्रभु से हम मांगे ये वरदान।

प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार, इसके जपने से होता है भव पार।
पांच पदों के पैतीस अक्षर, भव-भव के काँटे चक्कर ...
इसमें गर्भित है सारा आगमसर, इसके जपने से होता है भव पार।

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जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है – Jain Vairagya Bhajan

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है
संसार में रहकर प्राणी, संसार को तज सकता है ॥

कहीं दर्पण देख विरक्ति, कहीं मृतक देख वैरागी,
बिन कारण दीक्षा लेता, वो पूर्व जन्म का त्यागी,
निर्ग्रन्थ साधु ही इतने, सदगुण से सज सकता है ॥१॥

आत्मा तो अजर अमर है, हम आयु गिनें इस तन की,
वैसा ही जीवन बनता, जैसी धारा चिंतन की,
जो पर को समझ पाया है, वह खुद को समझ सकता है ॥२॥

शास्त्रों में सुने थे जैसे, देखे वैसे ही मुनिवर,
तेजस्वी परम तपस्वी, उपकारी मेरे गुरुवर ,
इनकी मृदु वाणी सुनकर, हर प्राणी सुधर सकता है ॥३॥

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स्वर्ग से सुंदर अनुपम है जिनवर का दरबार – Jain Bhajan Lyrics in Hindi

स्वर्ग से सुंदर अनुपम है जिनवर का दरबार

(तर्ज - स्वर्ग से सुन्दर सपनो से प्यारा, है अपना घर द्वार...)

स्वर्ग से सुंदर अनुपम है ये जिनवर का दरबार।
श्रद्धा से जो ध्याता निश्चित हो जाता भव पार,
यही श्रद्धान हमारा, नमन हो तुम्हें हमारा ।।टेक।।

कभी न टूटे श्रद्धा, तुम पर भगवान हमारी।
झुक जाएंगी जीवन, में प्रतिकूलता सारी।।
है विश्वास हमारा, इक दिन छूटेगा संसार।।
यही श्रद्धान…।।1।।

निर्वान्छक है भगवन, ये आराधना हमारी।
होवे दशा हमारी, बस जैसी हुई तुम्हारी।।
रत्नत्रय का मार्ग चलेंगे, पाएँ मुक्तिद्वार।।
यही श्रद्धान…।।2।।

स्याद्वाद वाणी ही, भ्रम का अज्ञान मिटाए।
निज गुण पर्यायें ही, अपना परिवार बतायें।।
ना भूलेंगे मुनिराजो का यह अनंत उपकार।।
यही श्रद्धान…।।3।।

लोकालोक झलकते, कैवल्यज्ञान है पाया।
फिर भी शुद्धातम ही, बस उपादेय बतलाया।।
मानो आज मिला मुझको, ये द्वादशांग का सार।।
यही श्रद्धान…।।4।।

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अमृत से गगरी भरो – Amrit Se Gagri Bharo Jain Bhajan Lyrics in Hindi

अमृत से गगरी भरो

अमृत से गगरी भरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे।
खुशी-खुशी मिल के चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे। टेक॥

सब साथी मिल कलश सजाओ, मङ्गलकारी गीत सुनाओ;
मन में आनन्द भयो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ।।१।। अमृत...

इन्द्र इन्द्राणी मिल हर्ष मनावें, प्रभु-चरणों में शीश झुकावें;
प्रभुजी की छवि निरखो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥२ ।। अमृत...

सुवर्ण कलश प्रभु उदकनि धारा, अङ्गे न्हावे जिनवर प्यारा;
स्वामी जगत को खरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥३॥ अमृत...

हे सुखकारी सब दु:खहारी, सेवा जिनकी प्यारी-प्यारी;
लेकर ‘सरस’ को चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥४॥ अमृत...

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Jain Bhajan Geet Lyrics : जैन भजन संग्रह हिन्दी लिखित


जैन भजन सुनना और गुनगुनाना हमारी परंपरा का वो हिस्सा है जो हर घर के पूजा-स्थान से लेकर मंदिर की आरती तक साथ चलता है। भगवान महावीर की स्तुति हो, नवकार मंत्र का जाप हो या फिर गुरु भक्ति के भाव — इन भजनों के बोल पीढ़ी-दर-पीढ़ी दिलों में बसे रहते हैं। इस पेज पर हमने अलग-अलग अवसरों और भावों से जुड़े जैन भजनों के बोल एक जगह इकट्ठा किए हैं, ताकि आपको हर बार अलग-अलग खोजने की ज़रूरत न पड़े। नीचे दिए गए किसी भी शीर्षक पर क्लिक करके आप पूरे भजन के बोल पढ़ सकते हैं।

  1. बजे कुण्डलपुर में बधाई – Baje Kundalpur Mein Badhai (Bhajan Lyrics)
  2. मंत्र णमोकार हमें प्राणो से प्यारा – Mantra Namokar Hamein Prano Se Pyara
  3. जीवन है पानी की बूँद – Jeevan Hai Pani Ki Boond (Bhajan Lyrics)
  4. मधुबन के मंदिरो में भगवान बस रहा है – Madhuban Ke Mandiro Mein Bhagwan Bas Raha Hai
  5. मैं थाने पूजन आयो – Main Thane Pujan Aayo (Bhajan Lyrics in Hindi)
  6. मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है – Mera Aapki Kripa Se Sab Kaam Ho Raha Hai
  7. जब कोई नहीं आता मेरे बाबा आते है – Jab Koi Nahi Aata Mere Baba Aate Hai
  8. भजन चाँदनपुर के महावीर – Bhajan Chandanpur Ke Mahaveer (Lyrics in Hindi)
  9. सज धज कर जिस दिन मौत की शहजादी आएगी – Saj Dhaj Kar Jis Din Maut Ki Shahjadi Aayegi
  10. नवकार मंत्र ही महामंत्र – Navkar Mantra Hi Mahamantra (Bhajan Lyrics)
  11. कभी वीर बन के महावीर बन के – Kabhi Veer Banke Mahaveer Banke (Tirthankar Vandana)
  12. एक बार प्रभु आओ चाहे आके चले जाना – Ek Baar Prabhu Aao Chahe Aake Chale Jana
  13. तेरे पाँच हुए कल्याणक प्रभो – Tere Panch Hue Kalyanak Prabho (Bhajan Lyrics)
  14. जन्म लिया है महावीर ने – Janm Liya Hai Mahaveer Ne (Bhajan Lyrics)
  15. वर्तमान को वर्धमान की – Vartman Ko Vardhman Ki (Bhajan Lyrics)
  16. मेरे महावीर झूले पलना – Mere Mahavir Jhule Palna (Bhajan Lyrics)
  17. नाम है तेरा तारण हारा – Naam Hai Tera Taran Hara (Bhajan Lyrics)
  18. मोक्ष के प्रेमी हमने – Moksh Ke Premi Hamne (Bhajan Lyrics in Hindi)
  19. चेतो-चेतो आराधना में – Cheto Cheto Aaradhana Mein (Bhajan Lyrics)
  20. मेरे मन मंदिर में आन पधारो – Mere Mann Mandir Mein Aan Padharo (Bhajan Lyrics)
  21. जय जिनवाणी माता – Jai Jinvani Mata (Bhajan Lyrics in Hindi)
  22. पारस रे तेरी कठिन डगरिया – Paras Re Teri Kathin Dagariya (Bhajan Lyrics)
  23. तुम से लागी लगन – श्री पार्श्वनाथ स्तुति – Tumse Lagi Lagan Shri Parshvanath Stuti
  24. केसरिया केसरिया – Kesariya Kesariya (Bhajan Lyrics in Hindi)
  25. तूने खूब दिया भगवान – Tune Khoob Diya Bhagwan (Bhajan Lyrics in Hindi)
  26. इक नाम सांचा इक नाम प्यारा – Ek Naam Saancha Ek Naam Pyara (Bhajan Lyrics)
  27. मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं – Main Gyananand Swabhavi Hun Lyrics
  28. भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना – Bhagwaan Meri Naiyya Jain Bhajan (2 Versions) in Hindi
  29. जिया कब तक उलझेगा संसार में – Adhyatmik Jain Bhajan Lyrics in Hindi
  30. गुरु ने जहाँ-जहाँ भी ज्योति जलाई है – Vidyasagar Guru Bhajan Lyrics
  31. जैन धर्म के हीरे मोती – Jain Dharma Ke Heere Moti Bhajan Lyrics
  32. प्रथमं मंगलम मंत्र नवकार – Navkar Mantra Bhajan Lyrics in Hindi
  33. जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है – Jain Vairagya Bhajan
  34. स्वर्ग से सुंदर अनुपम है जिनवर का दरबार – Jain Bhajan Lyrics in Hindi
  35. अमृत से गगरी भरो – Amrit Se Gagri Bharo Jain Bhajan Lyrics in Hindi

अगर आपको कोई खास भजन नहीं मिल रहा या आप किसी और तीर्थंकर, पर्व या भाव से जुड़े भजन खोज रहे हैं, तो कमेंट में बता सकते हैं — हम इस सूची को समय-समय पर अपडेट करते रहते हैं।

श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह – Mahavir Swami Aarti (4 Versions) in Hindi

श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह

भगवान महावीर की आरती के कई सुंदर रूप प्रचलित हैं — कहीं कुंडलपुर का जिक्र है तो कहीं चाँदनपुर का। यहाँ हमने चार अलग-अलग प्रचलित आरतियाँ एक ही जगह क्रमांक देकर रख दी हैं, जो भी पसंद आए वो गाइए।

1. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 1)

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी-2 |
बाल ब्रह्मचारी व्रत-2, पाल्यो तपधारी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी-2 |
माया मोह विनाशक-2, ज्ञान ज्योति जारी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जग में पाठ अहिंसा, आपहि विस्तार्यो-2 |
हिंसा पाप मिटाकर-2, सुधर्म परचार्यो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

इह विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो-2 |
ग्वाल मनोरथ पूर्यो-2, दूध गाय पायो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

अमरचंद को सपना, तुमने प्रभु दीना-2 |
मंदिर तीन शिखर का-2, निर्मित है कीना |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जयपुर-नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी-2 |
एक ग्राम तिन दीनो-2, सेवा-हित यह भी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जो कोर्इ तेरे दर पर, इच्छा कर आवे-2 |
होय मनोरथ-पूरण-2, संकट मिट जावे |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

निशि-दिन प्रभु-मंदिर में, जगमग-ज्योति जरे-2 |
हम सेवक चरणों में-2, आनंद-मोद धरें |
ॐ जय महावीर प्रभो ||
जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||


2. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 2)

करौं आरती वर्द्धमानकी । पावापुर निरवान थान की ॥ टेक
राग बिना सब जगजन तारे । द्वेष बिना सब कर्म विदारे ।

शील धुरंधर शिव तिय भोगी । मनवच कायन कहिये योगी । करौं०

रत्नत्रय निधि परिग्रह हारी । ज्ञानसुधा भोजनव्रतधारी । करौं०

लोक अलोक व्यापै निजमांहीं । सुखमय इंद्रिय सुखदुख नाहीं । करौं०

पंचकल्याणकपूज्य विरागी । विमल दिगंबर अबंर त्यागी । करौं०

गुनमनि भूषन भूषित स्वामी । जगत उदास जगंतर स्वामी । करौं०

कहै कहां लौ तुम सबजानौं । द्यानत की अभिलाषा प्रमानौ । करौं०


3. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 3)

ॐ जय महावीर प्रभो! स्वामी जय महावीर प्रभो ।
जग नायक सुखदायक, अति गंभीर प्रभो । ॐ जय ०

कुण्डलपुर में जन्में त्रिशला के जाए, स्वामी त्रिशला के जाए ०
पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए । ॐ जय ०

दीनानाथ दयानिधि हो मंगलकारी, स्वामी हो मंगलकारी ०
जगतहित संयम धारा, प्रभु पर उपकारी । ॐ जय ०

पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया, स्वामी सत्पथ ०
दया धर्म का झंडा, जग में लहराया । ॐ जय ०

अर्जुनमाली, गौतम, श्री चन्दनबाला, स्वामी श्री चन्दन ०
पार जगत से बेडा, इनका कर डाला । ॐ जय ०

पावन नाम तुम्हारा, जग तारणहारा, स्वामी जग तारण ०
निश दिन जो नर ध्यावे, कष्ट मिटे सारा । ॐ जय ०

करूणासागर! तेरी महिमा है न्यारी, स्वामी महिमा है ०
ज्ञान मुनि गुण गावे, चरणन बलिहारी । ॐ जय ०


4. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 4)

जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा ।
वर्द्धमान महावीर वीर अति, जय संकट छेवा ॥ टेक

सिद्धारथ नृप नन्द दुलारे, त्रिशला के जाये ।
कुण्डलपुर अवतार लिया, प्रभु सुर नर हर्षाये ॥ ऊँ जय०

देव इन्द्र जन्माभिषेक कर, उर प्रमोद भरिया ।
रुप आपका लख नहिं पाये, सहस आंख धरिया ॥ ऊँ जय०

जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये, घर में बाल यती ।
राजपाट ऐश्वर्य छाँड सब, ममता मोह हती ॥ ऊँ जय०

बारह वर्ष छद्मावस्था में, आतम ध्यान किया ।
घाति कर्म चकचूर, चूर प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥ ऊँ जय०

पावापुर के बीच सरोवर, आकर योग कसे ।
हने अघातिया कर्म शत्रु सब, शिवपुर जाय बसे ॥ ऊँ जय०

भूमंडल के चांदनपुर में, मंदिर मध्य लसे ।
शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी, दर्शन पाप नसे ॥ ऊँ जय०

करुणासागर करुणा कीजे, आकर शरण गही ।
दीन दयाला जगप्रतिपाला, आनन्द भरण तुही ॥ ऊँ जय ०

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आरती जय चंद्रप्रभु देवा – Chandraprabhu Aarti (Tijara) in Hindi

आरती जय चंद्रप्रभु देवा

तिजारा के चन्द्रप्रभु भगवान की यह एक और खूबसूरत आरती है, जिसमें उनके जन्म से लेकर केवलज्ञान तक की पूरी यात्रा का वर्णन मिलता है।

जय चंद्रप्रभु देवा, स्वामी जय चंद्रप्रभुदेवा ।
तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी, तुम हो विघ्न विनाशक स्वामी
पार करो देवा, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

मात सुलक्षणा पिता तुम्हारे महासेन देवा
चन्द्र पूरी में जनम लियो हैं स्वामी देवों के देवा
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

जन्मोत्सव पर प्रभु तिहारे, सुर नर हर्षाये
रूप तिहार महा मनोहर सब ही को भायें
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

बाल्यकाल में ही प्रभु तुमने दीक्षा ली प्यारी
भेष दिगंबर धारा, महिमा हैं न्यारी
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

फाल्गुन वदि सप्तमी को, प्रभु केवल ज्ञान हुआ
खुद जियो और जीने दो का सबको सन्देश दिया
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…
अलवर प्रान्त में नगर तिजारा, देहरे में प्रगटे
मूर्ति तिहारी अपने अपने नैनन, निरख निरख हर्षे
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

हम प्रभु दास तिहारे, निश दिन गुण गावें
पाप तिमिर को दूर करो, प्रभु सुख शांति लावें
तुम हो विघ्न विनाशक, स्वामी पार करो देवा ॥
जय चंद्रप्रभु देवा…

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श्री नन्दीश्वर द्विप आरती – Nandishwar Dweep Aarti Lyrics in Hindi

श्री नन्दीश्वर द्विप आरती

नंदीश्वर द्वीप पर स्थित 52 जिनालयों की महिमा गाने वाली यह आरती जैन भूगोल और भक्ति का अनूठा संगम है।

जय बावन जिन देवा, जय बावन जिन देवा |
आरती करूँ तुम चरणे-२ भवजल नदि न्हावा || जयदेव-२

प्रथमो जंबु द्वीप, घातकी वर बीजो-२ |
पुष्कर पूरव शोभित, पुष्कर वर त्रीजो || जयदेव-२ ||

चोथो वारूण द्वीप, पंचम क्षीरवर-२ |
छठ्ठो घृतवर शोभित, सप्तम इक्षुवर || जयदेव-२ ||

अष्टम शोभे द्वीप नन्दीश्वर नामा-२ |
प्रति दश तेरह अकृतिम जिन धामा || जयदेव-२ ||

अन्जम भूधर एक, दधिमुख नग्र चार-२ |
गज मति रविकर पर्वत, तेरह गिरि सार || जयदेव-२ ||

एवं चौदिशी बावन, पृथ्वी धर लम्बा-२ |
गिरिपति ज्येष्ठ जिनालय, मणिमय जिनबिम्बा || जयदेव-२ ||

शुभ अषाढे कारतक, फाल्गुन, सुदी पक्षा-२ |
इन्द्रादिक करे पूजा, अष्टानिक दक्षा || जयदेव-२ ||

अष्टम दिन थी मंडित, पूनम परियंता-२ |
जिनगुणसागर गावे, पावे सुव कांता || जयदेव-२ ||

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पारस देवा आरती (बड़ागांव) – Baragaon Parshvanath Aarti in Hindi

पारस देवा आरती (बड़ागांव)

बड़ागांव के टीले से जुड़े चमत्कारी प्रसंगों का जिक्र करती यह आरती पार्श्वनाथ भगवान की महिमा को अलग ही अंदाज़ में बयां करती है।

ओं जय पारस देवा, स्वामी जय पारस देवा |
आरति हम सब करते, मिले मुक्ति मेवा || टेक ||

बड़ागांव टीले से, स्वप्न दिया तुमने |
चमत्कार कर प्रगटे, शरण लही हमने || ओं ..

लक्ष्मण बचे तोप से, महिमा जग छायी |
तन निरोग कितनों ने, नेत्र ज्योति पायी || ओं ..

स्याद्वाद गुरुकुल में, इन्द्र शीश राजे |
शतक आठ फण छाया, सौम्य मूर्ति साजे || ओं ..

जो भी शरण में आते, वांछित फल पाते |
भूत-प्रेत, करमों-कृत, संकट कट जाते || ओं ..

स्याद्वाद ध्वज धरती पर, आपहि फहराया |
किया समर्पण सन्मति, अनुभव लहराया || ओं ..

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शांतिनाथ भगवान आरती (रूप 2) – Shantinath Aarti Lyrics in Hindi

शांतिनाथ भगवान आरती (रूप 2)

शांतिनाथ भगवान की यह दूसरी आरती एक अलग धुन और शैली में है, फिर भी भाव वही — शांति और सुख की कामना। दोनों रूप गाकर देखें, कौन सा ज्यादा पसंद आता है।

शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे।
आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे
आरती उतारेंगे हम आरती उतारेंगे
शांतिनाथ भगवान

हस्तिनापुर में जनम लिये हे प्रभु देव करे जयकारा हो ।
जन्म महोत्सव करें कल्याणक, नाचे झूमे गाये हो ॥
ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान

धन्य है माता ऐरा देवी तुम्हें जो गोद उठाईं है ।
विश्वसेन के कुलदीपक ने ज्ञान की ज्योति जगाई है ।
ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान

पंचम चक्रवर्ती पद पाये, जग सुख बढा अपार था ।
द्वादस कामदेव अति सुन्दर जग में बढा ही नाम था ।
ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे । शांतिनाथ भगवान

शांति नाथ प्रभु शांति प्रदाता शुचिता सुख अपार दो ।
जनम मरण दुःख मेटो प्रभुजी लेना शरण में आप हो ।
ऐसे अवतारी की अब हम आरती उतारेंगे ।
शांतिनाथ भगवान की हम आरती उतारेंगे।

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आरती वासुपूज्य – Vasupujya Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती वासुपूज्य

चंपापुरी के बारहवें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान बाल ब्रह्मचारी थे — यह आरती उनके इसी अनूठे जीवन का सुंदर वर्णन करती है।

ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी।
पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

चंपापुर नगरी भी धन्य हुई तुमसे स्वामी धन्य०
जयराम वासुपूज्य २, मात पिता हर्षे
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

बाल ब्रह्मचारी बन, महाव्रत को धारा २ ।
प्रथम बालयति जग ने २, तुमको स्वीकारा ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

गर्भ जन्म तप एवं केवल ज्ञान लिया स्वामी केवल०।
चंपापुर में तुमने २, पद निर्वाण लिया ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

वासवगण से पूजित, वासुपूज्य जिनवर स्वामी वासु० ।
बारहवें तीर्थंकर २, है तुम नाम अमर ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

जो कोई तुमको सुमिरे सुख सम्पति पावे स्वामी सुख० ।
पूजन वंदन करके २, वंदित हो जावे ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

घृत आरती ले हम सब तुम आरती करते स्वामी तुम।
उसका फल मिले चंदना २, मति शुद्ध करदे ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०
पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

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आरती विमलनाथ जी – Vimalnath Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती विमलनाथ जी

कम्पिलपुरी में जन्मे तेरहवें तीर्थंकर श्री विमलनाथ भगवान की यह आरती पंचकल्याणकों का बड़ा विस्तृत और सुंदर वर्णन करती है।

आरती करो रे, आरती करो रे ।
आरती करो रे, आरती करो रे ॥

तेरहवे जिनवर विमलनाथ की
आरती करो रे, आरती करो रे ।

कृतवर्मा पितु राजदुलारे, जयश्यामा के प्यारे ।
कम्पिल पूरी में जनम लिया हैं, सुर नर वन्दे सारें २ ॥
आरती करो रे०
निर्मल त्रय ज्ञान सहित, स्वामी की आरती करो रे
आरती करो रे०

शुभ ज्येष्ठ वदि दशमी प्रभु की गर्भागम तिथि मानी जाती
है जन्म और दीक्षा कल्याणक, माघ चतुर्थी सुदी आती २
आरती करो रे०
मनः पर्याय ज्ञानी तीर्थंकर की, आरती करो रे ।
आरती करो रे०

सित माघ छट को ज्ञान हुआ, धनपति शुभ समवशरण रचता ।
दिव्य ध्वनि प्रभु की खिरी और, भव्यो का नाम कुमुद खिलता 2 ।
आरती करो रे०
केवल ज्ञानी अर्हन्त प्रभु की
आरती करो रे०

आषाढ़ वदि दशमी तिथि थी, पंचम गति प्रभुवर ने पायी ।
शुभ लोक शिखर पर राजे जा, परमातम ज्योति प्रगटाई २।
आरती करो रे०
उन सिद्धप्रिया के अधिनायक की
आरती करो रे०

हे विमल प्रभु तव चरणों में बस एक आशा हे यह मेरी ।
मन विमल मति हो जावे प्रभु, मिल जाए मुझे भी सिद्ध गति २ ॥
आरती करो रे०
चन्दन स्वातमसुख पाने हेतु
आरती करो रे०

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आरती श्रेयांशनाथ – Shreyansanath Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती श्रेयांशनाथ

सिंहपुरी में जन्मे ग्यारहवें तीर्थंकर श्री श्रेयांसनाथ भगवान की यह आरती उनके जन्म से लेकर मोक्ष तक की तिथियों को बड़े भाव से समेटती है।

प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे २

स्वर्ण वर्णमय प्रभा निराली, मूर्ति तुम्हारी हैं मनहारी २
सिंहपूरी में जब तुम जन्मे, सुरगण जन्म कल्याणक करते 2
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे

विष्णु मित्र पितु, मात नन्दा, नगरी में भी आनन्द छाता २
फागुन वदि ग्यारस शुभ तिथि थी, जब प्रभु वर ने दीक्षा ली थी २
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे

माघ कृष्ण मावस को स्वामी,कहलाये थे केवलज्ञानी २
श्रावण सुदी पुरिम आई, यम जीता शिव पदवी पाई
श्रेय मार्ग के दाता तुम हो, जजे चन्दनामति शिवगति दो 2
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे
प्रभु श्रेयांस की आरती कीजे, भव भव के पातक हर लीजे २

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आरती शीतलनाथ जी – Sheetalnath Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती शीतलनाथ जी

दसवें तीर्थंकर श्री शीतलनाथ भगवान की यह आरती नाम के अनुरूप ही आत्मा को शीतलता और शांति देने वाली है।

ॐ जय शीतलनाथ स्वामी, स्वामी जय शीतलनाथ स्वामी ।
घृत दीपक से करू आरती, घृत दीपक से करू आरती ।
तुम अंतरयामी, ॐ जय शीतलनाथ स्वामी ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

भदिदलपुर में जनम लिया प्रभु, दृढरथ पितु नामी २ ।
मात सुनन्दा के नन्दा तुम २, शिवपथ के स्वामी ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

जन्म समय इन्द्रो ने, उत्सव खूब किया, स्वामी उत्सव खूब किया ।
मेरु सुदर्शन ऊपर २, अभिषेक खूब किया ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

पंच कल्याणक अधिपति, होते तीर्थंकर ,स्वामी होते तीर्थंकर ।
तुम दसवे तीर्थंकर 2, हो प्रभु क्षेमंकर ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

अपने पूजक निन्दक के प्रति, तुम हो वैरागी, स्वामी तुम हो वैरागी ।
केवल चित्त पवित्र करन नित 2, तुम पूजे रागी ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

पाप प्रणाशक सुखकारक, तेरे वचन प्रभो ,स्वामी तेरे वचन प्रभो ।
आत्मा को शीतलता शाश्वत २, दे तब कथन विभो ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

जिनवर प्रतिमा जिनवर जैसी,हम यह मान रहे,स्वामी हम यह मान रहे।
प्रभो चंदानामती तब आरती २, भाव दुःख हान करें ॥
ॐ जय शीतलनाथ स्वामी०

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चौबीसी आरती – Choubisi Aarti (All 24 Tirthankaras) in Hindi

चौबीसी आरती

ऋषभनाथ से लेकर महावीर स्वामी तक — सभी 24 तीर्थंकरों का नाम लेकर एक साथ वंदना करने वाली यह आरती हर जैन पूजा में विशेष स्थान रखती है।

ऋषभ अजित संभव अभिनंदन, सुमति पद्म सुपार्श्व की जय |
महाराज की श्रीजिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

चंद्र पुष्प शीतल श्रेयांस, वासुपूज्य महाराज की जय |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

विमल अनंत धर्म जस उज्ज्वल, शांतिनाथ महाराज की जय |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

कुंथ अरह और मल्लि मुनिसुव्रत, नमिनाथ महाराज की जय |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

नेमिनाथ प्रभु पार्श्व जिनेश्वर, वर्द्धमान महाराज की जय |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

इन चौबीसों की आरती करके, आवागमन-निवार की जय |
महाराज की श्री जिनराज की, दीनदयाल की आरती की जय |

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आरती शांतिनाथ (रूप 1) – Shantinath Aarti Lyrics in Hindi

आरती शांतिनाथ (रूप 1)

सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ भगवान चक्रवर्ती भी थे और कामदेव भी — इस आरती में उनके इसी असाधारण जीवन का वर्णन मिलता है।

जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

मन वच तन से, तुमको वन्दु २
जय अन्तरयामी प्रभु जय अन्तरयामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

गर्भ जनम जब हुआ आपका 2
तीन लोक हर्षे स्वामी तीन लोक हर्षे
इन्द्र कियो अभिषेक शिखर पर २
शिव मग के स्वामी बोलो शिव मग के स्वामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

पंचम चक्री भये आप ही २
षट खंड के स्वामी, प्रभु षट खंड के स्वामी
राज विभव के भोगे प्रभु जी २
कामदेव नामी, बोलो कामदेव नामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

अतुल विभव को तृणवत त्यागे २
हुए कर्म नाशी प्रभुजी, हुए कर्म नाशी
भये आप तीर्थंकर प्रभु जी २
शिव रमणी स्वामी, बोलो शिव रमणी स्वामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

वीर सिंधु को नमस्कार कर २
आरती करू थारी, प्रभु आरती करू थारी
सूरज शिवपुर पावो प्रभु जी २
महा सोख्य धारी बोलो महा सोख्य धारी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

मन वच तन से, तुमको वन्दु २
जय अन्तरयामी प्रभु जय अन्तरयामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

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आरती बजे छम छम छम – Aarti Baje Cham Cham Lyrics in Hindi

आरती बजे छम छम छम

घुँघरुओं की छम-छम के साथ गाई जाने वाली यह आरती अपनी सरल लय और भावों के कारण बच्चों से लेकर बड़ों तक सबकी पसंदीदा है।

बाजे छम छम छम छमा छम बाजे घुँघरू बाजे घुँघरू०
हाथों में दीपक लेकर आरती करूँ
बाजे छम छम०

प्रभु को उठाया हाथी पे बैठाया २
पांडुक बन अभिषेक कराया, इसलिए प्रभु तेरी आरती करूँ
दीपक ज्योति से आरती करूँ २

वीर प्रभुजी की मूरत निहारूँ २
ध्यान लगन चरणों में धरूँ
चरणों में धरूँ० हाथों में दीपक लेकर०

हम सब प्रभु के गुण को गाएँ
प्रभुजी के चरणों में शीश झुकाएँ० इसलिए प्रभु तेरी आरती करूँ

प्रभु तुम बिन मोहे कोई ना संभाले
प्रभु तुम बिन कोई ना पारे लगावे
मेरी यही चाह और कुछ ना कहूँ० हाथों में दीपक लेकर आरती करूँ

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श्री जिनवाणी माता की आरती – Jinvani Mata Aarti Lyrics in Hindi

श्री जिनवाणी माता की आरती

जिनवाणी को जैन धर्म में माता का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यही अज्ञान का अंधकार मिटाकर सही राह दिखाती है। यह आरती उसी जिनवाणी माता को समर्पित है।

ॐ जयजिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी ॥ टेक

श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम वाणी,
जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी ॥ॐजय॥

कुमत कुलाचल चूरन, वज्र सम सरधानी।
नव नियोग निक्षेपन, देखत दरपानी ॥ॐजय॥

पातक पंक पखालन, पुन्य परम वाणी।
मोह महार्णव डूबता, तारन नौकाणी ॥ॐजय॥

लोका लोक निहारन, दिव्य नयन स्थानी।
निज पर भेद दिखावन, सुरज किरणानी ॥ॐजय॥

श्रावक मुनिगण जननी, तुम ही गुणखानी।
सेवक लख सुखदायक, पावन परमाणी ॥ॐजय॥

ॐ जय जिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निश दिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी॥

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आरती अनंथ्नाथ जी – Anantnath Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती अनंथ्नाथ जी

साकेतपुरी में जन्मे चौदहवें तीर्थंकर श्री अनंतनाथ भगवान की यह आरती सीधे-सरल शब्दों में आत्मा की ज्योति जगाने की बात करती है।

करते हैं प्रभु की आरती, आतम की ज्योति जलेगी ।

प्रभुवर अनंत की भक्ति, सदा सोख्य भरेगी, सदा सोख्य भरेगी ॥

हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

हे सिंहसेन के राज दुलारे, जयश्यामा के प्यारे ।
साकेतपूरी के तुम नाथ, गुणाकार तुम न्यारे ॥
तेरी भक्ति से हर प्राणी में, शक्ति जगेगी, प्राणी में शक्ति जगेगी,
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

वदि ज्येष्ठ द्वादशी में प्रभुवर, दीक्षा को धारा था ।
चैत्री मावस में ज्ञान कल्याणक उत्सव प्यारा था ॥
प्रभु की दिव्यध्वनि दिव्यज्ञान, आलोक भरेगी, ज्ञान आलोक भरेगी॥
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

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