आरती वासुपूज्य – Vasupujya Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती वासुपूज्य

चंपापुरी के बारहवें तीर्थंकर श्री वासुपूज्य भगवान बाल ब्रह्मचारी थे — यह आरती उनके इसी अनूठे जीवन का सुंदर वर्णन करती है।

ॐ जय वासुपूज्य स्वामी, प्रभु जय वासुपूज्य स्वामी।
पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

चंपापुर नगरी भी धन्य हुई तुमसे स्वामी धन्य०
जयराम वासुपूज्य २, मात पिता हर्षे
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

बाल ब्रह्मचारी बन, महाव्रत को धारा २ ।
प्रथम बालयति जग ने २, तुमको स्वीकारा ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

गर्भ जन्म तप एवं केवल ज्ञान लिया स्वामी केवल०।
चंपापुर में तुमने २, पद निर्वाण लिया ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

वासवगण से पूजित, वासुपूज्य जिनवर स्वामी वासु० ।
बारहवें तीर्थंकर २, है तुम नाम अमर ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

जो कोई तुमको सुमिरे सुख सम्पति पावे स्वामी सुख० ।
पूजन वंदन करके २, वंदित हो जावे ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

घृत आरती ले हम सब तुम आरती करते स्वामी तुम।
उसका फल मिले चंदना २, मति शुद्ध करदे ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०
पंचकल्याणक अधिपति २, तुम अन्तरयामी ॥
ॐ जय वासुपूज्य स्वामी०

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