ये नैना, ये काजल, ये ज़ुल्फ़ें, ये आँचल खूबसुरत सी हो तुम ग़ज़ल कभी दिल हो कभी धड़कन कभी शोला, कभी शबनम तुम ही तो तुम मेरी हमदम ज़िन्दगी तुम मेरी, मेरी तुम ज़िन्दगी मेरी आँखों से देखो, मेरी नज़रों से जानो तुम माला हम मोती, हम दीपक तुम ज्योती सपनोंका पनघट हो, आशा का झुरमट हो तुम नदिया हम धारा, तुम चन्दा हम तारा मेरी साँसों से पूछो, मेरी आहों को समझो तुम पूजा हम पुजारी, तुम क़िस्मत हम जुआरी #VishalAnand Ye Naina Ye Kajal Lyrics Ye naina, ye kaajal, ye julfen, ye anchal Khubasurat si ho tum gjl Kabhi dil ho kabhi dhadkan Kabhi shola, kabhi shabanam Tum hi to tum meri hamadam Jindagi tum meri, meri tum jindagi Meri ankhon se dekho, meri najron se jaano Tum maala ham moti, ham dipak tum jyoti Sapanonka panaghat ho, asha ka jhuramat ho Tum nadiya ham dhaara, tum chanda ham taara Meri saanson se puchho, meri ahon ko samajho Tum puja ham pujaari, tum kismat ham juari Additional Information गीतकार : अमित खन्ना, गायक : किशोर कुमार, संगीतकार : बप्पी लाहिरी, चित्रपट : दिल से मिले दिल (१९७८) / Ly...
हे री मैं तो प्रेम दिवानी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय।. सूली ऊपर सेज हमारी, किस बिध सोना होय।. गगन मंडल पर सेज पिया की, किस बिध मिलना होय॥. घायल की गति घायल जानै, कि जिन लागी होय।. जौहरी की गति जौहरी जाने, कि जिन लागी होय॥. दरद की मारी बन बन डोलूँ वैद मिल्यो नहीं कोय।. मीरां की प्रभु पीर मिटै जब वैद सांवलया होय॥. he rii mai.n to prem divaanii, mera darad n jaane koy।. suulii uupar sej hamaarii, kis bidh sona hoy।. gagan ma.nDal par sej piya kii, kis bidh milna hoya||. ghaayal kii gati ghaayal jaanai, ki jin laagii hoy।. jauharii kii gati jauharii jaane, ki jin laagii hoya||. darad kii maarii ban ban Doluu.n vaid milyo nahii.n koy।. miiraa.n kii prabhu piir miTai jab vaid saa.nvalya hoya||. he rii mai.n to prem divaanii, mera darad n jaane koy।. suulii uupar sej hamaarii, kis bidh sona hoy।. gagan ma.nDal par sej piya kii, kis bidh milna hoya||. ghaayal kii gati ghaayal jaanai, ki jin laagii hoy।. jauharii...
अल्लामा इक़बाल ग़ज़ल /Allama Iqbal Ghazal हुआ न ज़ोर से उस के कोई गरेबाँ चाक अल्लामा इक़बाल ग़ज़ल /Allama Iqbal Ghazal हुआ न ज़ोर से उस के कोई गरेबाँ चाक अगरचे मग़रबियों का जुनूँ भी था चालाक मय-ए-यक़ीं से ज़मीर-ए-हयात है पुर-सोज़ नसीब-ए-मदरसा या रब ये आब-ए-आतिश-नाक उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी के मुंतज़िर हैं तमाम ये कहकशाँ ये सितारे ये नील-गूँ अफ़्लाक यही ज़माना-ए-हाज़िर की काएनात है क्या दिमाग़ रौशन ओ दिल तीरा ओ निगह बेबाक तू बे-बसर हो तो ये माना-ए-निगाह भी है वगरना आग है मोमिन जहाँ ख़स ओ ख़ाशाक ज़माना अक़्ल को समझा हुआ है मिशअल-ए-राह किसे ख़बर कि जुनूँ भी है साहिब-ए-इदराक जहाँ तमाम है मीरास मर्द-ए-मोमिन की मिरे कलाम पे हुज्जत है नुक्ता-ए-लौलाक हादसा वो जो अभी पर्दा-ए-अफ़्लाक में है अल्लामा इक़बाल ग़ज़ल /Allama Iqbal Ghazal हादसा वो जो अभी पर्दा-ए-अफ़्लाक में है अक्स उस का मिरे आईना-ए-इदराक में है न सितारे में है ने गर्दिश-ए-अफ़्लाक में है तेरी तक़दीर मिरे नाला-ए-बेबाक में है ...
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