Mira Bai Ke Pad Arth Vyakhya मीराबाई के पद अर्थ सहित
Table of Contents
- हे री मैं तो प्रेम दिवानी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा रों मूल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- हरि बिन कूण गति मेरी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- बसो मेरे नैनन में नंदलाल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- चालाँ वाही देस मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- लगी मोहि राम खुमारी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- पद मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- पद (एन.सी. ई.आर.टी) मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- राणाजी म्हें तो गोविंद का गुण गास्याँ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- भोर और बरखा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- नहिं भावै थारो देसलड़ो रंगरुड़ो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- श्रीराधे रानी दे डारो बाँसुरी मोरी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- मैं गिरधर के घर जाऊँ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- दरस बिन दूखन लागे नैन मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- मैंने नाम रतन धन पायौ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- स्याम! मने चाकर राखो जी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- जोगी मत जा मत जा मत जा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- कोई कहियौ रे प्रभु आवन की मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- श्री गिरधर आगे नाचूँगी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- राणाजी मुझे यह बदनामी लगे मीठी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- म्हाँरे घर आज्यो प्रीतम प्यारा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- बादल देख डरी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- आली री मेरे नैणाँ बाण पड़ी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- पपइया रे पिव की बाणि न बोल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- राणाजी थें जहर दियौ म्हे जाणी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- सखी मेरी नींद नसानी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
- मीराबाई परिचय MeeraBai Parichay
हे री मैं तो प्रेम दिवानी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
हे री मैं तो प्रेम दिवानी, मेरा दरद न जाने कोय।.
सूली ऊपर सेज हमारी, किस बिध सोना होय।.
गगन मंडल पर सेज पिया की, किस बिध मिलना होय॥.
घायल की गति घायल जानै, कि जिन लागी होय।.
जौहरी की गति जौहरी जाने, कि जिन लागी होय॥.
दरद की मारी बन बन डोलूँ वैद मिल्यो नहीं कोय।.
मीरां की प्रभु पीर मिटै जब वैद सांवलया होय॥.
he rii mai.n to prem divaanii, mera darad n jaane koy।.
suulii uupar sej hamaarii, kis bidh sona hoy।.
gagan ma.nDal par sej piya kii, kis bidh milna hoya||.
ghaayal kii gati ghaayal jaanai, ki jin laagii hoy।.
jauharii kii gati jauharii jaane, ki jin laagii hoya||.
darad kii maarii ban ban Doluu.n vaid milyo nahii.n koy।.
miiraa.n kii prabhu piir miTai jab vaid saa.nvalya hoya||.
he rii mai.n to prem divaanii, mera darad n jaane koy।.
suulii uupar sej hamaarii, kis bidh sona hoy।.
gagan ma.nDal par sej piya kii, kis bidh milna hoya||.
ghaayal kii gati ghaayal jaanai, ki jin laagii hoy।.
jauharii kii gati jauharii jaane, ki jin laagii hoya||.
darad kii maarii ban ban Doluu.n vaid milyo nahii.n koy।.
miiraa.n kii prabhu piir miTai jab vaid saa.nvalya hoya||.
अर्थ व्याख्या
ऐ सखी, मैं तो इश्क में दीवानी हो गई हूँ, मेरा दर्द कोई नहीं जानता। हमारी सेज सूली पर है, भला नींद कैसे आ सकती है! और मेरे महबूब की सेज आसमान पर है। आख़िर कैसे मुलाक़ात हो। घायल की हालत तो घायल ही जान सकता है, जिसने कभी जख़्म खाया हो; जौहरी के जौहर को जौहरी ही पहचान सकता है बशर्ते कि कोई जौहरी हो। दर्द से बेचैन होकर जंगल-जंगल मारी फिर रही हूँ और कोई मुआलिज मिलता नहीं मेरे मालिक। मीरा का दर्द तो उस वक़्त मिटेगा जब सलोने-साँवले कृष्ण इसका इलाज करेंगे।
जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा रों मूल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा री मूल।.
हिलमिल बात बणावट मीठी पाछे जावत भूल॥.
तोड़त जेज करत नहिं सजनी जैसे चमेली के मूल।.
मीरा कहे प्रभु तुमरे दरस बिन लगत हिवड़ा में सूल॥.
jogiya rii priitaDii hai dukhDa rii muul।.
hilmil baat ba.na.aavaT miiThii paachhe jaavat bhuula||.
toDat jej karat nahi.n sajnii jaise chamelii ke muul।.
miira kahe prabhu tumre daras bin lagat hivDa me.n suula||.
jogiya rii priitaDii hai dukhDa rii muul।.
hilmil baat ba.na.aavaT miiThii paachhe jaavat bhuula||.
toDat jej karat nahi.n sajnii jaise chamelii ke muul।.
miira kahe prabhu tumre daras bin lagat hivDa me.n suula||.
अर्थ व्याख्या
जोगी की प्रीति तमाम दु:खों की मूल है। जोगी पहले हिल-मिलकर मीठी-मीठी बातें बनाते हैं, और बाद में भूल जाते हैं। इस मुहब्बत को उतनी ही आसानी से तोड़ देते हैं जैसे चमेली का फूल। मीरा कहती है कि हे प्रभु! तुम्हारे दर्शन के बिना दिल में काँटे से चुभते हैं।
हरि बिन कूण गति मेरी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
हरि बिन कूण गति मेरी।.
तुम मेरे प्रतिकूल कहिए मैं रावरी चेरी॥.
आदि अंत निज नाँव तेरो हीया में फेरी।.
बेरी-बेरी पुकारि कहूँ प्रभु आरति है तेरी॥.
यौ संसार विकार सागर-बीच में घेरी।.
नाव फाटी प्रभु पालि बाँधो बूड़त है बेरी॥.
विरहणि पिव की बाट जोवै राखि ल्यौ नेरी।.
दासि मीरा राम रटन है मैं सरण हूँ तेरी॥.
hari bin kuu.n gati merii।.
tum mere pratikuul kahi.e mai.n raavarii cherii||.
aadi a.nt nij naa.nv tero hiiya me.n pherii।.
berii-berii pukaari kahuu.n prabhu aarati hai terii||.
yau sa.nsaar vikaar saagar-biich me.n gherii।.
naav phaaTii prabhu paali baa.ndho buuDat hai berii||.
virah.na.i piv kii baaT jovai raakhi lyau nerii।.
daasi miira raam raTan hai mai.n sar.n huu.n terii||.
hari bin kuu.n gati merii।.
tum mere pratikuul kahi.e mai.n raavarii cherii||.
aadi a.nt nij naa.nv tero hiiya me.n pherii।.
berii-berii pukaari kahuu.n prabhu aarati hai terii||.
yau sa.nsaar vikaar saagar-biich me.n gherii।.
naav phaaTii prabhu paali baa.ndho buuDat hai berii||.
virah.na.i piv kii baaT jovai raakhi lyau nerii।.
daasi miira raam raTan hai mai.n sar.n huu.n terii||.
अर्थ व्याख्या
हरि के बग़ैर मेरी कौन गति! तुम मेरे ख़िलाफ़ कुछ भी कहो लेकिन मैं तो अपने राव कृष्ण की ग़ुलाम हूँ। शुरू से अंत तक मैं हृदय में तुम्हारा ही नाम लेती हूँ। मैं बार-बार पुकारकर कहती हूँ प्रभु, मैं तुझ पर क़ुर्बान हूँ। यह दुनिया विकारों का समुद्र है जिसमें मैं घिरी हुई हूँ। मेरी नाव टूटी हुई है।हे प्रभु! तुम इसमें पाल लगा दो, नहीं तो मैं डूब जाऊँगी। विरह की मारी मैं अपने पिया का रास्ता देखती हूँ, तुम मुझे अपने पास रख लो। दासी मीरा राम का नाम रटती है और कहती है कि मैं तेरी शरण में हूँ।
बसो मेरे नैनन में नंदलाल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
बसो मेरे नैनन में नंदलाल।.
मोहनी मूरत, साँवरी सूरत, नैना बने बिसाल।.
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती माल॥.
छुद्रघंटिका कटितट सोभित, नूपुर सबद रसाल।.
मीरां प्रभु संतन सुखदाई भगत बछल गोपाल॥.
baso mere nainan me.n na.ndlaal।.
mohanii muurat, saa.nvrii suurat, naina bane bisaal।.
adhar sudhaaras murlii raajat, ur baija.ntii maala||.
chhudragha.nTika kaTitaT sobhit, nuupur sabad rasaal।.
miiraa.n prabhu sa.ntan sukhdaa.ii bhagat bachhal gopaala||.
baso mere nainan me.n na.ndlaal।.
mohanii muurat, saa.nvrii suurat, naina bane bisaal।.
adhar sudhaaras murlii raajat, ur baija.ntii maala||.
chhudragha.nTika kaTitaT sobhit, nuupur sabad rasaal।.
miiraa.n prabhu sa.ntan sukhdaa.ii bhagat bachhal gopaala||.
अर्थ व्याख्या
ऐ नंदलाल, मेरी आँखों में आ बसो। कैसी मोहनी मूरत, कैसी साँवली सूरत है। आँखें कितनी बड़ी हैं! तुम्हारे चरणों पर गीतों के रस से भरी हुई बाँसुरी सजी हुई है और सीने पर वैजयंती माला है। कमर के गिर्द छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं। ऐ मीरा के प्रभु, तुम संतों के सुख पहचानते हो और अपने भक्तों के संरक्षक हो।
चालाँ वाही देस मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
चालाँ वाही देस प्रीतम पावाँ चलाँ वाही देस।.
कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावाँ, कहो तो भगवा भेस॥.
कहो तो मोतियन माँग भरावाँ, कहो छिरकावाँ केस।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सुण गयो बिड़द नरेस॥.
chaalaa.n vaahii des priitam paavaa.n chalaa.n vaahii des।.
kaho to kusumal saaDii ra.ngaavaa.n, kaho to bhagva bhesa||.
kaho to motiyan maa.ng bharaavaa.n, kaho chhirkaavaa.n kes।.
miira ke prabhu girdhar naagar, su.n gayo biDad naresa||.
chaalaa.n vaahii des priitam paavaa.n chalaa.n vaahii des।.
kaho to kusumal saaDii ra.ngaavaa.n, kaho to bhagva bhesa||.
kaho to motiyan maa.ng bharaavaa.n, kaho chhirkaavaa.n kes।.
miira ke prabhu girdhar naagar, su.n gayo biDad naresa||.
अर्थ व्याख्या
चलो सखी! उसी देस को चलो जहाँ प्रीतम मिलेंगे। कहो तो कुसुंबल साड़ी रँगा लूँ। कहो तो भगवा भेष पहन लूँ। कहो तो अपनी माँग मोतियों से भरवा लूँ, कहो तो बाल बिखेर लूँ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर हैं। यह बात महाराज को सुना दी गई है।
लगी मोहि राम खुमारी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
लगी मोहि राम खुमारी हो।.
रमझम बरसै मेहंड़ा भीजै तन सारी हो॥.
चहूँदिस चमकै दामणी गरजै घन भारी हो।.
सत गुरु भेद बताइया खोली भरम किवारी हो॥.
सब घट दीसै आतमा सबही सूँ न्यारी हो।.
दीपग जोऊँ ग्यान का चढूँ अगम अटारी हो।.
मीरा दासी राम की इमरत बलिहारी हो॥.
lagii mohi raam khumaarii ho।.
ramjham barsai meha.nDa bhiijai tan saarii ho||.
chahuu.ndis chamkai daama.na.ii garjai ghan bhaarii ho।.
sat guru bhed bataa.iya kholii bharam kivaarii ho||.
sab ghaT diisai aatama sabhii suu.n nyaarii ho।.
diipag jo.uu.n gyaan ka chaDhuu.n agam aTaarii ho।.
miira daasii raam kii imrat balihaarii ho||.
lagii mohi raam khumaarii ho।.
ramjham barsai meha.nDa bhiijai tan saarii ho||.
chahuu.ndis chamkai daama.na.ii garjai ghan bhaarii ho।.
sat guru bhed bataa.iya kholii bharam kivaarii ho||.
sab ghaT diisai aatama sabhii suu.n nyaarii ho।.
diipag jo.uu.n gyaan ka chaDhuu.n agam aTaarii ho।.
miira daasii raam kii imrat balihaarii ho||.
अर्थ व्याख्या
मैं राम-नाम के नशे में चूर हूँ। रिमझिम पानी बरसता है और मेरी देह और साड़ी इसमें भीग गई है। चारों ओर बिजली चमकती है और ज़ोर से बादल गरजते हैं। सतगुरु ने भ्रम के तमाम दरवाज़ों को खोलकर रहस्य की बात बता दी। आत्मा हर देह में दिखाई देती है फिर भी सबसे विलग रहती है। मैं ज्ञान का दिव्य प्रकाश देखकर अगम की अटारी पर चढ़ जाती हूँ। मीरा कहती है कि राम के अमृत की बलिहारी है।
पद मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।.
माता छोड़ी पिता छोड़े छोड़े सगा सोई।.
साधाँ संग बैठ बैठ लोक लाज खोई॥.
संत देख दौड़ि आई, जगत देख रोई।.
प्रेम आँसू डार-डार अमर बेल बोई॥.
मारग में तारण मिले संत नाम दोई।.
संत सदा सीस पर नाम हृदै सब होई॥.
अब तो बात फैल गई, जानै सब कोई।.
दासि मीरा लाल गिरधर, होई सो होई॥.
mere to girdhar gopal dusro na koi.
mata chhoDi pita chhoDe chhoDe saga soi.
sadhan sang baith baith lok laj khoi॥.
sant dekh dauDi i, jagat dekh roi.
prem ansu Dar Dar amar bel boi॥.
marag mein taran mile sant nam doi.
sant sada sees par nam hridai sab hoi॥.
ab to baat phail gai, janai sab koi.
dasi mera lal girdhar, hoi so hoi॥.
mere to girdhar gopal dusro na koi.
mata chhoDi pita chhoDe chhoDe saga soi.
sadhan sang baith baith lok laj khoi॥.
sant dekh dauDi i, jagat dekh roi.
prem ansu Dar Dar amar bel boi॥.
marag mein taran mile sant nam doi.
sant sada sees par nam hridai sab hoi॥.
ab to baat phail gai, janai sab koi.
dasi mera lal girdhar, hoi so hoi॥.
अर्थ व्याख्या
गिरधर गोपाल के सिवा और कौन है जिसे मैं अपना कहूँ! उनके लिए माँ, बाप अज़ीज़-व-अक़ारिब सभी को छोड़ दिया और साधुओं के साथ बैठ-बैठकर अपने दुनियावी शर्म-व-हया तक को छोड़ दिया। जब कोई संत दिखाई दिया तो दौड़कर उसके साथ हो ली, और जब दुनिया सामने आई तो रोने लगी। मैंने मुहब्बत के आँसुओं से इश्क़ की अमरबेल को सींचा है, संतों को सिर पर बिठाया और उसके पाक नाम की माला जपती रही हूँ। अब तो बात फैल चुकी है और मेरा राज़ सबको मालूम हो गया है। मीरा तो गिरधरलाल की दासी बन चुकी है अब जो होना है, सो होगा।
पद (एन.सी. ई.आर.टी) मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
अर्थ व्याख्या
राणाजी म्हें तो गोविंद का गुण गास्याँ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
राणाजी म्हें तो गोविंद का गुण गास्याँ।.
चरणामृत को नेम हमारो नित उठ दरसण जास्याँ॥.
हरि मंदिर में निरत करास्याँ घुँघरियाँ घमकास्याँ।.
राम नाम का झाँझ चलास्याँ भव सागर तर जास्याँ॥.
यह संसार बाड़ का काँटा ज्याँ संगत नहिं जास्याँ।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर निरख परख गुण गास्याँ॥.
raa.na.aajii mhe.n to govi.nd ka gu.n gaasyaa.n।.
char.na.aamrit ko nem hamaaro nit uTh daras.n jaasyaa.n||.
hari ma.ndir me.n nirat karaasyaa.n ghu.nghriyaa.n ghamkaasyaa.n।.
raam naam ka jhaa.njh chalaasyaa.n bhav saagar tar jaasyaa.n||.
yah sa.nsaar baaD ka kaa.nTa jyaa.n sa.ngat nahi.n jaasyaa.n।.
miira ke prabhu girdhar naagar nirakh parakh gu.n gaasyaa.n||.
raa.na.aajii mhe.n to govi.nd ka gu.n gaasyaa.n।.
char.na.aamrit ko nem hamaaro nit uTh daras.n jaasyaa.n||.
hari ma.ndir me.n nirat karaasyaa.n ghu.nghriyaa.n ghamkaasyaa.n।.
raam naam ka jhaa.njh chalaasyaa.n bhav saagar tar jaasyaa.n||.
yah sa.nsaar baaD ka kaa.nTa jyaa.n sa.ngat nahi.n jaasyaa.n।.
miira ke prabhu girdhar naagar nirakh parakh gu.n gaasyaa.n||.
अर्थ व्याख्या
राणाजी, मैं तो गोविंद का गुण गाऊँगी। चरण-अमृत लेना मेरा दस्तूर है इसलिए हमेशा सवेरे उठकर दर्शन को जाऊँगी। हरि मंदिर में नाचूँगी और घुँघरू झनकाऊँगी। राम नाम झाँझ पर गाऊँगी और भवसागर से पार हो जाऊँगी। यह संसार अहाते का काँटा है, जिसको साथ नहीं ले जाऊँगी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर जाँच-परखकर गुण गाऊँगी।
भोर और बरखा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
जागो बंसीवारे ललना!.
जागो मोरे प्यारे!.
रजनी बीती, भोर भयो है, घर-घर खुले किंवारे।.
गोपी दही मथत, सुनियत हैं कंगना के झनकारे॥.
उठो लालजी! भोर भयो है, सुर-नर ठाढ़े द्वारे।.
ग्वाल-बाल सब करत कुलाहल, जय-जय सबद उचारै॥.
माखन-रोटी हाथ मँह लीनी, गउवन के रखवारे।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, सरण आयाँ को तारै॥.
बरसे बदरिया सावन की।.
सावन की मन-भावन की॥.
सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की।.
उमड़-घुमड़ चहुँदिस से आया, दामिन दमकै झर लावन की॥.
नन्हीं-नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सुहावन की।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर! आनंद-मंगल गावन की॥.
jago bansivare lalana!.
jago more pyare!.
rajni biti, bhor bhayo hai, ghar ghar khule kinvare..
gopi dahi mathat, suniyat hain kangna ke jhankare॥.
utho lalji! bhor bhayo hai, sur nar thaDhe dvare..
gvaal baal sab karat kulahal, jay jay sabad ucharai॥.
makhan roti haath manh lini, gauvan ke rakhvare..
mera ke prabhu girdhar nagar, saran ayan ko tarai॥.
barse badriya savan ki..
savan ki man bhavan kee॥.
savan mein umagyo mero manva, bhanak suni hari aavan ki..
umaD ghumaD chahundis se aaya, damin damakai jhar lavan kee॥.
nanhin nanhin bundan meha barse, shital pavan suhavan ki..
mera ke prabhu girdhar nagar! anand mangal gavan kee॥.
jago bansivare lalana!.
jago more pyare!.
rajni biti, bhor bhayo hai, ghar ghar khule kinvare..
gopi dahi mathat, suniyat hain kangna ke jhankare॥.
utho lalji! bhor bhayo hai, sur nar thaDhe dvare..
gvaal baal sab karat kulahal, jay jay sabad ucharai॥.
makhan roti haath manh lini, gauvan ke rakhvare..
mera ke prabhu girdhar nagar, saran ayan ko tarai॥.
barse badriya savan ki..
savan ki man bhavan kee॥.
savan mein umagyo mero manva, bhanak suni hari aavan ki..
umaD ghumaD chahundis se aaya, damin damakai jhar lavan kee॥.
nanhin nanhin bundan meha barse, shital pavan suhavan ki..
mera ke prabhu girdhar nagar! anand mangal gavan kee॥.
अर्थ व्याख्या
नहिं भावै थारो देसलड़ो रंगरुड़ो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
नहिं भावै थारो देसलड़ो रंगरुड़ो।.
थाराँ देसाँ में राणा साध नहीं छै लोग बसै सब कूड़ो॥.
गहणा गाँठी राना हम सब त्याग्या त्याग्यो है बाँधना जूड़ो।.
मेवा मिसरी हम सब ही त्याग्या त्याग्या छै सक्कर बूरो॥.
तन की आस कबहूँ नहिं कीनी ज्यूँ रण माहि सूरो।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर वर पायो म्हे पूरो॥.
nahi.n bhaavai thaaro desalDo ra.ngruDo।.
thaaraa.n desaa.n me.n raa.na.a saadh nahii.n chhai log basai sab kuuDo||.
gah.na.a gaa.nThii raana ham sab tyaagya tyaagyo hai baa.ndhna juuDo।.
meva misrii ham sab hii tyaagya tyaagya chhai sakkar buuro||.
tan kii aas kabhuu.n nahi.n kiinii jyuu.n ra.n maahi suuro।.
miira ke prabhu girdhar naagar var paayo mhe puuro||.
nahi.n bhaavai thaaro desalDo ra.ngruDo।.
thaaraa.n desaa.n me.n raa.na.a saadh nahii.n chhai log basai sab kuuDo||.
gah.na.a gaa.nThii raana ham sab tyaagya tyaagyo hai baa.ndhna juuDo।.
meva misrii ham sab hii tyaagya tyaagya chhai sakkar buuro||.
tan kii aas kabhuu.n nahi.n kiinii jyuu.n ra.n maahi suuro।.
miira ke prabhu girdhar naagar var paayo mhe puuro||.
अर्थ व्याख्या
हे राणा! तेरे देस के रंग-ढंग अच्छे नहीं लगते। राणा, तेरे देस में साधु नहीं, सब नाकारा लोग बसते हैं। हमने गहना-पाती सब छोड़ दिया; हमने काजल-टीका-सब छोड़ दिया, जूड़ा बाँधना भी त्याग दिया। मेवा-मिस्री और शक्कर का चूरा, हमने यह सब ही छोड़ दिया है। शरीर की परवा कभी नहीं की, जैसे मैदान-ए-जंग में बहादुर परवाह नहीं करता। मीरा के प्रभु गिरधर नागर मैंने पूरा वर पा लिया।
श्रीराधे रानी दे डारो बाँसुरी मोरी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
श्रीराधे रानी दे डारो बाँसुरी मोरी।.
जा बंसी में मेरी प्राण बसत है, सो बंसी गई चोरी॥.
काहे से गाऊँ प्यारी काहे से बजाऊँ, काहे से लाऊँ गईयाँ फेरी।.
मुख से गावो कान्हा हाथों से बजाओ, लकुटी से लाओ गईयाँ घेरी॥.
हा हा करत तेरे पैयाँ परत हूँ, तरस खाओ प्यारी मोरी।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, बंसी लेकर छोरी॥.
shriiraadhe raanii de Daaro baa.nsurii morii।.
ja ba.nsii me.n merii praa.n basat hai, so ba.nsii ga.ii chorii||.
kaahe se gaa.uu.n pyaarii kaahe se bajaa.uu.n, kaahe se laa.uu.n ga.iiyaa.n pherii।.
mukh se gaavo kaanha haatho.n se bajaa.o, lakuTii se laa.o ga.iiyaa.n gherii||.
ha ha karat tere paiyaa.n parat huu.n, taras khaa.o pyaarii morii।.
miira ke prabhu girdhar naagar, ba.nsii lekar chhorii||.
shriiraadhe raanii de Daaro baa.nsurii morii।.
ja ba.nsii me.n merii praa.n basat hai, so ba.nsii ga.ii chorii||.
kaahe se gaa.uu.n pyaarii kaahe se bajaa.uu.n, kaahe se laa.uu.n ga.iiyaa.n pherii।.
mukh se gaavo kaanha haatho.n se bajaa.o, lakuTii se laa.o ga.iiyaa.n gherii||.
ha ha karat tere paiyaa.n parat huu.n, taras khaa.o pyaarii morii।.
miira ke prabhu girdhar naagar, ba.nsii lekar chhorii||.
अर्थ व्याख्या
राधे रानी! मेरी बाँसुरी मुझे दे दो। जिस बाँसुरी में मेरी जान है वही बाँसुरी चोरी चली गई। अब मैं किससे गाऊँ, किससे बजाऊँ और गायों को कैसे वापस बुलाऊँ? कन्हैया, तुम मुँह से गाओ, हाथों से बजाओ और लाठी से गायों को वापस ले जाओ। मैं तुम्हारी मिन्नत करता हूँ। तुम्हारे पाँव पड़ता हूँ। मेरी प्यारी मुझ पर तरस खाओ। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, मेरी बाँसुरी लेकर छीन लो।
मैं गिरधर के घर जाऊँ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
मैं गिरधर के घर जाऊँ।.
गिरधर म्हाँरो साँचो प्रीतम.
देखत रूप लुभाऊँ॥.
रैण पड़ै तब ही उठ जाऊँ.
भोर भये उठ आऊँ।.
रैण दिना वा के संग खेलूँ.
ज्यूँ त्यूँ ताही रिझाऊँ॥.
जो पहिरावै सोई पहिरूँ.
जो दे सोई खाऊँ।.
मेरी उण की प्रीत पुराणी.
उण बिन पल न रहाऊँ॥.
जहाँ बैठावें तितही बैठूँ.
बेचै तो बिक जाऊँ।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर.
बार-बार बलि जाऊँ॥.
mai.n girdhar ke ghar jaa.uu.n।.
girdhar mhaa.nro saa.ncho priitam.
dekhat ruup lubhaa.uu.n||.
rai.n paDai tab hii uTh jaa.uu.n.
bhor bhaye uTh aa.uu.n।.
rai.n dina va ke sa.ng kheluu.n.
jyuu.n tyuu.n taahii rijhaa.uu.n||.
jo pahiraavai so.ii pahiruu.n.
jo de so.ii khaa.uu.n।.
merii u.n kii priit puraa.na.ii.
u.n bin pal n rahaa.uu.n||.
jahaa.n baiThaave.n tithii baiThuu.n.
bechai to bik jaa.uu.n।.
miira ke prabhu girdhar naagar.
baara-baar bali jaa.uu.n||.
mai.n girdhar ke ghar jaa.uu.n।.
girdhar mhaa.nro saa.ncho priitam.
dekhat ruup lubhaa.uu.n||.
rai.n paDai tab hii uTh jaa.uu.n.
bhor bhaye uTh aa.uu.n।.
rai.n dina va ke sa.ng kheluu.n.
jyuu.n tyuu.n taahii rijhaa.uu.n||.
jo pahiraavai so.ii pahiruu.n.
jo de so.ii khaa.uu.n।.
merii u.n kii priit puraa.na.ii.
u.n bin pal n rahaa.uu.n||.
jahaa.n baiThaave.n tithii baiThuu.n.
bechai to bik jaa.uu.n।.
miira ke prabhu girdhar naagar.
baara-baar bali jaa.uu.n||.
अर्थ व्याख्या
मैं गिरधर के घर जाती हूँ। गिरधर मेरा सच्चा प्रीतम है। जिसका हुस्न देखकर मेरा दिल ख़ुश हो जाता है। रात होते ही मैं उठकर चली जाती हूँ। रात-दिन उसके साथ खेलती हूँ और हर मुमकिन तरीक़े से उसे रिझाती हूँ। जो वह पहनाता है वही पहनती हूँ। जो देता है वही खाती हूँ, मेरी उनकी मुहब्बत बहुत पुरानी है, उसके बग़ैर एक पल नहीं रह सकती। वह जहाँ बिठाएगा वहीं बैठ जाऊँगी और अगर बेचेगा तो बिक जाऊँगी। मीरा के प्रभु गिरधर नागर, उन पर क़ुर्बान जाऊँ।
दरस बिन दूखन लागे नैन मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
दरस बिन दूखन लागे नैन।.
जब तें तुम बिछुरे पिव प्यारे, कबहुँ न पायो चैन॥.
सबद सुनत मेरी छतियाँ काँपै, मीठे लागें बैन।.
एक टकटकी पंथ निहारूँ भई छंमासी रैन॥.
बिरह बिथा कासों कहुँ सजनी, बह गई करवत ऐन।.
मीरां के प्रभु कबहो मिलोगे, दुःख मेटन सुख दैन॥.
daras bin duukhan laage nain।.
jab te.n tum bichhure piv pyaare, kabhu.n n paayo chaina||.
sabad sunat merii chhatiyaa.n kaa.npai, miiThe laage.n bain।.
ek TakaTkii pa.nth nihaaruu.n bha.ii chha.nmaasii raina||.
birah bitha kaaso.n kahu.n sajnii, bah ga.ii karvat ain।.
miiraa.n ke prabhu kabho miloge, du.akh meTan sukh daina||.
daras bin duukhan laage nain।.
jab te.n tum bichhure piv pyaare, kabhu.n n paayo chaina||.
sabad sunat merii chhatiyaa.n kaa.npai, miiThe laage.n bain।.
ek TakaTkii pa.nth nihaaruu.n bha.ii chha.nmaasii raina||.
birah bitha kaaso.n kahu.n sajnii, bah ga.ii karvat ain।.
miiraa.n ke prabhu kabho miloge, du.akh meTan sukh daina||.
अर्थ व्याख्या
दर्शन के बिना आँखें दुखने लगी हैं। मेरे प्रिय! जबसे तुम बिछुड़े हो, कभी चैन नहीं मिला। तुम्हारा नाम सुनकर दिल काँप उठता है और फ़रियाद मीठी लगती है। टकटकी बाँधे तुम्हारी राह देख रही हूँ। वियोग की रात सबसे लंबी होती है। मेरी सजनी! आख़िर विरह का दु:ख किसको सुनाऊँ? मीरा के प्रभु कब मिलोगे? कब दु:ख मिटाओगे और कब सुख दोगे!
मैंने नाम रतन धन पायौ मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
मैंने नाम रतन धन पायौ।.
बसत अमोलक दी मेरे सतगुरु करि किरपा अपणायो॥.
जनम जनम की पूँजी पाई जग मैं सवै खोवायो।.
खरचै नहिं कोई चोर न लेवे दिन-दिन बढ़त सवायो॥.
सत की नाँव खेवटिया सतगुरु भवसागर तारि आयो।.
मीरां के प्रभु गिरधर नागर हरुखि हरुखि जस गयो॥.
mai.nne naam ratan dhan paayau।.
basat amolak dii mere satguru kari kirpa ap.na.aayo||.
janam janam kii puu.njii paa.ii jag mai.n savai khovaayo।.
kharchai nahi.n ko.ii chor n leve din-din baDhat savaayo||.
sat kii naa.nv khevaTiya satguru bhavsaagar taari aayo।.
miiraa.n ke prabhu girdhar naagar harukhi harukhi jas gayo||.
mai.nne naam ratan dhan paayau।.
basat amolak dii mere satguru kari kirpa ap.na.aayo||.
janam janam kii puu.njii paa.ii jag mai.n savai khovaayo।.
kharchai nahi.n ko.ii chor n leve din-din baDhat savaayo||.
sat kii naa.nv khevaTiya satguru bhavsaagar taari aayo।.
miiraa.n ke prabhu girdhar naagar harukhi harukhi jas gayo||.
अर्थ व्याख्या
मुझे राम की दौलत मिल गई। सतगुरु ने मेहरबानी करके मुझे अपना लिया और मुझे अनमोल चीज़ दे दी। मैंने सारी दुनिया को खोकर भी जनम-जनम की दौलत पा ली। यह दौलत न ख़र्च होती है, न उसे चोर ले जाते हैं। सच्चाई की नाव और सतगुरु उसे खेने वाला; इसलिए ज़िंदगी का समुद्र पार हो गया। मीरा ख़ुश हो-होकर प्रभु के गुण गाती है।
स्याम! मने चाकर राखो जी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
स्याम! मने चाकर राखो जी,.
गिरधारिलाल! चाकर राखो जी॥.
चाकर रह सूँ बाग लगा सूँ, नित उठ दरसण पासूँ।.
बिंद्राबन की कुंजगलिन में, तेरी लीला गासूँ॥.
चाकरी में दरसण पाऊँ, सुमिरन पाऊँ खरची।.
भाव भगति जागीरी पाऊँ, तीनूँ बाताँ सरसी॥.
मोर मुगट पीतांबर सोहे, गल बैजंती माला।.
बिंद्राबन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला॥.
हरे हरे नित बाग लगाऊँ, बिच बिच राखूँ क्यारी।.
साँवरिया के दरसण पाऊँ, पहर कुसुम्मी सारी॥.
जोगी आया जोग करण कूँ, तप करणे संन्यासी।.
हरि भजन कूँ साधु आयो, बिंद्राबन के बासी॥.
मीरा के प्रभु गहिर गंभीरा, सदा रहो जी धीरा।.
आधी रात प्रभु दरसन दीन्हें, प्रेम नदी के तीरा॥.
syaama! mane chaakar raakho jii,.
girdhaarilaala! chaakar raakho jii||.
chaakar rah suu.n baag laga suu.n, nit uTh daras.n paasuu.n।.
bi.ndraaban kii ku.njaglin me.n, terii liila gaasuu.n||.
chaakarii me.n daras.n paa.uu.n, sumiran paa.uu.n kharchii।.
bhaav bhagti jaagiirii paa.uu.n, tiinuu.n baataa.n sarsii||.
mor mugaT piitaa.mbar sohe, gal baija.ntii maala।.
bi.ndraaban me.n dhenu charaave, mohan murlii vaalaa||.
hare hare nit baag lagaa.uu.n, bich bich raakhuu.n kyaarii।.
saa.nvriya ke daras.n paa.uu.n, pahar kusummii saarii||.
jogii aaya jog kar.n kuu.n, tap kar.na.e sa.nnyaasii।.
hari bhajan kuu.n saadhu aayo, bi.ndraaban ke baasii||.
miira ke prabhu gahir ga.mbhiira, sada raho jii dhiira।.
aadhii raat prabhu darsan diinhe.n, prem nadii ke tiiraa||.
syaama! mane chaakar raakho jii,.
girdhaarilaala! chaakar raakho jii||.
chaakar rah suu.n baag laga suu.n, nit uTh daras.n paasuu.n।.
bi.ndraaban kii ku.njaglin me.n, terii liila gaasuu.n||.
chaakarii me.n daras.n paa.uu.n, sumiran paa.uu.n kharchii।.
bhaav bhagti jaagiirii paa.uu.n, tiinuu.n baataa.n sarsii||.
mor mugaT piitaa.mbar sohe, gal baija.ntii maala।.
bi.ndraaban me.n dhenu charaave, mohan murlii vaalaa||.
hare hare nit baag lagaa.uu.n, bich bich raakhuu.n kyaarii।.
saa.nvriya ke daras.n paa.uu.n, pahar kusummii saarii||.
jogii aaya jog kar.n kuu.n, tap kar.na.e sa.nnyaasii।.
hari bhajan kuu.n saadhu aayo, bi.ndraaban ke baasii||.
miira ke prabhu gahir ga.mbhiira, sada raho jii dhiira।.
aadhii raat prabhu darsan diinhe.n, prem nadii ke tiiraa||.
अर्थ व्याख्या
श्याम मुझे नौकर रख लो। गिरधर लाल मुझे नौकर रख लो। मैं तुम्हारी नौकरी करूँगी, बाग़ लगाऊँगी, रोज़ उठते ही तुम्हारा दीदार करूँगी और वृंदावन की हरी-भरी गलियों में तुम्हारी लीला गाऊँगी। नौकरी के बदले दीदार मिलेगा, तुम्हारा नाम जपना मेरी तनख़्वाह होगी तुम्हारे तसव्वुर और भक्ति की मुझे जागीर मिलेगी, तीनों ही बातें अच्छी हैं। सिर पर मोर पंख का मुकुट, जिस्म पर पीला कपड़ा गले में वैजयंती माला पहने मुरली वाला मोहन वृंदावन में गायें चराता है। रोज़ मैं हरे-भरे बाग़ लगाऊँगी, बीच-बीच में क्यारियाँ रखूँगी और कुसुंबी रंग की साड़ी पहनकर साँवरिया के दर्शन पाऊँगी। जोगी जोग करने को आया और संन्यासी तपस्या करने को वृंदावन के साधु हरि का भजन करने को आए। मीरा के प्रभु बेहद गंभीर है, हमेशा दिल में सब्र रखो। प्रभु आधी रात को प्रेम नदी के किनारे दर्शन देंगे।
जोगी मत जा मत जा मत जा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
जोगी मत जा मत जा मत जा, पाइं परूँ मैं चेरी तेरी हौं।.
प्रेम भगति कौ पैड़ो ही न्यारो हम कूँ डौल बता जा।.
अगर चंदण की चिता बनाऊँ अपणे हाथ जला जा॥.
जल बल भई भस्म की ढेरी अपणे अंग लगा जा।.
मीरा कहे प्रभु गिरधर नागर जोत में जोत मिला जा॥.
jogii mat ja mat ja mat ja, paa.i.n paruu.n mai.n cherii terii hau.n।.
prem bhagti kau paiDo hii nyaaro ham kuu.n Daul bata ja।.
agar cha.nd.n kii chita banaa.uu.n ap.na.e haath jala jaa||.
jal bal bha.ii bhasm kii Dherii ap.na.e a.ng laga ja।.
miira kahe prabhu girdhar naagar jot me.n jot mila jaa||.
jogii mat ja mat ja mat ja, paa.i.n paruu.n mai.n cherii terii hau.n।.
prem bhagti kau paiDo hii nyaaro ham kuu.n Daul bata ja।.
agar cha.nd.n kii chita banaa.uu.n ap.na.e haath jala jaa||.
jal bal bha.ii bhasm kii Dherii ap.na.e a.ng laga ja।.
miira kahe prabhu girdhar naagar jot me.n jot mila jaa||.
अर्थ व्याख्या
जोगी मत जा, मत जा देख मत जा। मैं तेरी दासी हूँ तेरे पैरों पड़ती हूँ। प्रेम-पूजा की अलग ही राह है, उस पर अग्रसर होने का तरीक़ा मुझे बता दे। अगर-चंदन की चिता बनाऊँ तो उसे अपने ही हाथ से जलाना। और जब जलकर राख की ढेरी हो जाए तो अपने अंग में लगा लेना। मीरा के प्रभु गिरधर नागर तुम प्रेम की जोत मिला लेना।
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
कोई कहियौ रे प्रभु आवन की।.
आवन की मन भावन की॥.
आप न आवै लिख नहिं भेजै.
बाण पड़ी ललुचावन की।.
ए दोउ नैण कहयो नहीं मानै.
नदिया बहैं जैसे सावन की॥.
कहा करूँ कछु नहिं बस मेरो.
पाँख नहीं उड़ जावन की।.
मीरा कहै प्रभु कब रे मिलोगे.
चेरी भई हूँ तेरे दाँवन की॥.
ko.ii kahiyau re prabhu aavan kii।.
aavan kii man bhaavan kii||.
aap n aavai likh nahi.n bhejai.
baa.n paDii laluchaavan kii।.
e do.u nai.n kahyo nahii.n maanai.
nadiya bahai.n jaise saavan kii||.
kaha karuu.n kachhu nahi.n bas mero.
paa.nkh nahii.n uD jaavan kii।.
miira kahai prabhu kab re miloge.
cherii bha.ii huu.n tere daa.nvan kii||.
ko.ii kahiyau re prabhu aavan kii।.
aavan kii man bhaavan kii||.
aap n aavai likh nahi.n bhejai.
baa.n paDii laluchaavan kii।.
e do.u nai.n kahyo nahii.n maanai.
nadiya bahai.n jaise saavan kii||.
kaha karuu.n kachhu nahi.n bas mero.
paa.nkh nahii.n uD jaavan kii।.
miira kahai prabhu kab re miloge.
cherii bha.ii huu.n tere daa.nvan kii||.
अर्थ व्याख्या
अरे कोई कह दे कि प्रभु आ रहे हैं। कोई तो दिल ख़ुश करने वाली ख़बर सुना दे। न आप आए हैं, न ख़त भेजते हैं। कुछ ऐसी आदत पड़ गई है कि मुझे ललचाते रहते हैं। ये दोनों आँखें भी मेरा कहा नहीं मानतीं। क्या करूँ कुछ बस नहीं चलता। पंख भी नहीं है कि उनके पास उड़कर पहुँच जाऊँ? मीरा के प्रभु कब मिलोगे। मैं तुम्हारे पेंच में फँस गई हूँ।
श्री गिरधर आगे नाचूँगी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
श्री गिरधर आगे नाचूँगी।.
नाच-नाच पिव रसिक रिझाऊँ, प्रेमी जन को जाचूँगी।.
प्रेम-प्रीत के बाँध घूँघरू, सुरत की कछनी काछूँगी॥.
लोक-लाज कुल की मरजादा, या मैं एक न राखूँगी।.
पिया के पलंगा जा पौढूँगी, मीरां हरि रंग राचूँगी॥.
shrii girdhar aage naachuu.ngii।.
naacha-naach piv rasik rijhaa.uu.n, premii jan ko jaachuu.ngii।.
prema-priit ke baa.ndh ghuu.nghruu, surat kii kachhnii kaachhuu.ngii||.
loka-laaj kul kii marjaada, ya mai.n ek n raakhuu.ngii।.
piya ke pala.nga ja pauDhuu.ngii, miiraa.n hari ra.ng raachuu.ngii||.
shrii girdhar aage naachuu.ngii।.
naacha-naach piv rasik rijhaa.uu.n, premii jan ko jaachuu.ngii।.
prema-priit ke baa.ndh ghuu.nghruu, surat kii kachhnii kaachhuu.ngii||.
loka-laaj kul kii marjaada, ya mai.n ek n raakhuu.ngii।.
piya ke pala.nga ja pauDhuu.ngii, miiraa.n hari ra.ng raachuu.ngii||.
अर्थ व्याख्या
मैं तो गिरधारी के सामने नाचूँगी। अपने प्यारे को नाच-नाचकर रिझाऊँगी और उसके इश्क़ का इम्तहान लूँगी। पैरों में मुहब्बत के घुँघरू बाधूँगी और तन पर यादों का लिबास पहनूँगी। दुनिया की शर्म-व-हया और ख़ानदान की इज़्ज़त, इनमें से किसी का ख़याल नहीं करूँगी। अपने प्यारे के पंलग पर जाकर लेट जाऊँगी। फिर देखना मीरा हरि के रंग में रच जाएगी।
राणाजी मुझे यह बदनामी लगे मीठी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
राणाजी मुझे यह बदनामी लगे मीठी।.
कोई निंदो कोई बिंदो मैं तो, चलूँगी चाल अनूठी।.
साँकड़ी गली में सत्गुरु मिलिया, क्यूँ कर फिरूँ अपूठी॥.
सत्गुरु जी सूँ बातज करतां, दुरजन लोगां ने दीठी।.
मीरा के प्रभु गिरधर नागर, दुरजन जलो जा अँगीठी॥.
raa.na.aajii mujhe yah badnaamii lage miiThii।.
ko.ii ni.ndo ko.ii bi.ndo mai.n to, chaluu.ngii chaal anuuThii।.
saa.nkDii galii me.n satguru miliya, kyuu.n kar phiruu.n apuuThii||.
satguru jii suu.n baataj kartaa.n, durjan logaa.n ne diiThii।.
miira ke prabhu girdhar naagar, durjan jalo ja a.ngiiThii||.
raa.na.aajii mujhe yah badnaamii lage miiThii।.
ko.ii ni.ndo ko.ii bi.ndo mai.n to, chaluu.ngii chaal anuuThii।.
saa.nkDii galii me.n satguru miliya, kyuu.n kar phiruu.n apuuThii||.
satguru jii suu.n baataj kartaa.n, durjan logaa.n ne diiThii।.
miira ke prabhu girdhar naagar, durjan jalo ja a.ngiiThii||.
अर्थ व्याख्या
राणाजी, मुझे यह बदनामी बहुत मीठी लगती है। कोई चाहे मेरी बुराई करे, चाहे भलाई। मैं तो सबसे निराली चाल चलूँगी। पतली गली में सतगुरु मिलते गए। फिर मैं क्यों अकेली चलूँ। सतगुरु से बातें करते हुए मुझे बुरे लोगों ने देख लिया मीरा के प्रभु तो गिरधर नागर हैं। ये बुरे लोग जाकर अँगीठी में जलें।
म्हाँरे घर आज्यो प्रीतम प्यारा मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
म्हाँरे घर आज्यो प्रीतम प्यारा तुम बिन सब जग खारा।.
तन मन धन सब भेंट करूँ जो भजन करूँ मैं थाँरा।.
तुम गुणवंत बड़े गुण सागर मैं हूँ जी औगणहारा॥.
मैं त्रिगुणि गुण एक नाहीं तुझमें जी गुण सारा।.
मीरा कहे प्रभु कबहि मिलोगे बिन दरसण दुखियारा॥.
mhaa.nre ghar aajyo priitam pyaara tum bin sab jag khaara।.
tan man dhan sab bhe.nT karuu.n jo bhajan karuu.n mai.n thaa.nra।.
tum gu.nava.nt baDe gu.n saagar mai.n huu.n jii auga.nahaaraa||.
mai.n trigu.na.i gu.n ek naahii.n tujhme.n jii gu.n saara।.
miira kahe prabhu kabhi miloge bin daras.n dukhiyaaraa||.
mhaa.nre ghar aajyo priitam pyaara tum bin sab jag khaara।.
tan man dhan sab bhe.nT karuu.n jo bhajan karuu.n mai.n thaa.nra।.
tum gu.nava.nt baDe gu.n saagar mai.n huu.n jii auga.nahaaraa||.
mai.n trigu.na.i gu.n ek naahii.n tujhme.n jii gu.n saara।.
miira kahe prabhu kabhi miloge bin daras.n dukhiyaaraa||.
अर्थ व्याख्या
मेरे घर आओ प्रीतम प्यारे! तुम्हारे बग़ैर सारा जग बदमज़ा है... मैं तुम पर अपना तन-मन-धन सब भेंट करूँगी और तुम्हारा भजन करूँगी। तुम गुणवान हो, बड़े गुण के सागर हो, मुझमें सब बुराइयाँ हैं। मैं निरगुणी (सत्, रज, तमवाली) मगर मुझमें एक भी गुण नहीं और तुममें सारे गुण हैं। मीरा के प्रभु कब मिलोगे! बग़ैर दर्शन के दु:खी हूँ।
बादल देख डरी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
बादल देख डरी हो, स्याम! मैं बादल देख डरी।.
काली-पीली घटा ऊमड़ी बरस्यौ एक घरी।.
जित जाऊँ तित पाणी पाणी हुई सब भूम हरी॥.
जाका पिय परदेस बसत है भीजूं बाहर खरी।.
मीरा के प्रभु हरि अबिनासी कीजो प्रीत खरी॥.
baadal dekh Darii ho, syaama! mai.n baadal dekh Darii।.
kaalii-piilii ghaTa uumaDii barasyau ek gharii।.
jit jaa.uu.n tit paa.na.ii paa.na.ii hu.ii sab bhuum harii||.
jaaka piy pardes basat hai bhiijuu.n baahar kharii।.
miira ke prabhu hari abinaasii kiijo priit kharii||.
baadal dekh Darii ho, syaama! mai.n baadal dekh Darii।.
kaalii-piilii ghaTa uumaDii barasyau ek gharii।.
jit jaa.uu.n tit paa.na.ii paa.na.ii hu.ii sab bhuum harii||.
jaaka piy pardes basat hai bhiijuu.n baahar kharii।.
miira ke prabhu hari abinaasii kiijo priit kharii||.
अर्थ व्याख्या
मैं बादल देखकर डर गई। ऐ श्याम, मैं बादल देखकर डर गई। काली-काली पीली-पीली घटा घिर के आई और बरस गई। अब जिधर जाती हूँ, पानी-ही-पानी है। सारी धरती हरी हो गई है। मैं वह हूँ जिसका प्यारा परदेश में है। मैं उसके इंतज़ार में घर से बाहर खड़ी हुई भीग रही हूँ। मीरा के प्रभु अविनाशी हरि हैं, उनसे सच्चा प्यार करना।
आली री मेरे नैणाँ बाण पड़ी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
आली री मेरे नैणाँ बाण पड़ी।.
चित्त चढ़ी मेरे माधुरी मूरत उर बिच आन अड़ी।.
कब की ठाढ़ी पंथ निहारूँ अपने भवन खड़ी॥.
कैसे प्राण पिया बिन राखूँ जीवन मूर जड़ी।.
मीरा गिरधर हाथ बिकानी लोग कहें बिगड़ी॥.
aalii rii mere nai.na.aa.n baa.n paDii।.
chitt chaDhii mere maadhurii muurat ur bich aan aDii।.
kab kii ThaaDhii pa.nth nihaaruu.n apne bhavan khaDii||.
kaise praa.n piya bin raakhuu.n jiivan muur jaDii।.
miira girdhar haath bikaanii log kahe.n bigDii||.
aalii rii mere nai.na.aa.n baa.n paDii।.
chitt chaDhii mere maadhurii muurat ur bich aan aDii।.
kab kii ThaaDhii pa.nth nihaaruu.n apne bhavan khaDii||.
kaise praa.n piya bin raakhuu.n jiivan muur jaDii।.
miira girdhar haath bikaanii log kahe.n bigDii||.
अर्थ व्याख्या
सखी, मुझे तो नैनों का तीर लग गया है। बहुत परेशान हूँ कि मेरे दिल में एक बेहद हसीन मूरत बस गई है। मैं अपने घर पर खड़ी कब से राह देख रही हूँ। अपने महबूब के बग़ैर मैं अपनी ज़िंदगी की जड़ को कैसे जमाए रखूँ। मीरा गिरधर के हाथ बिक गई है। लोग कहते हैं कि बिगड़ गई है।
पपइया रे पिव की बाणि न बोल मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
पपइया रे पिव की बाणि न बोल।.
सुणि पावेली विरहणी रे थारी राखेली पाँख मरोड़॥.
चाँच कटाऊँ पपइया रे ऊपर कालो रे लूण।.
पिव मेरा मैं पिव की रे तू पिव कहै सु कूण॥.
थारा सबद सुहावणा रे जो पिव मेला आज।.
चाँच मढ़ाऊँ थारी सोवनी रे तू मेरे सिरताज॥.
प्रीतम कूँ पतियाँ लिखूँ रे कागा तू ले जाय।.
जाइ प्रीतम जी सूँ यूँ कहै रे थारी विरहणि धान न खाय॥.
मीरा दासी व्याकुली रे पिव पिव करत विहाय।.
वेग मिलो प्रभु अंतरजामी तुम बिन रहयौ न जाय॥.
pap.iya re piv kii baa.na.i n bol।.
su.na.i paavelii virah.na.ii re thaarii raakhelii paa.nkh maroDa़||.
chaa.nch kaTaa.uu.n pap.iya re uupar kaalo re luu.n।.
piv mera mai.n piv kii re tuu piv kahai su kuu.na||.
thaara sabad suhaava.na.a re jo piv mela aaj।.
chaa.nch maDhaa.uu.n thaarii sovanii re tuu mere sirtaaja||.
priitam kuu.n patiyaa.n likhuu.n re kaaga tuu le jaay।.
jaa.i priitam jii suu.n yuu.n kahai re thaarii virah.na.i dhaan n khaaya||.
miira daasii vyaakulii re piv piv karat vihaay।.
veg milo prabhu a.ntarjaamii tum bin rahyau n jaaya||.
pap.iya re piv kii baa.na.i n bol।.
su.na.i paavelii virah.na.ii re thaarii raakhelii paa.nkh maroDa़||.
chaa.nch kaTaa.uu.n pap.iya re uupar kaalo re luu.n।.
piv mera mai.n piv kii re tuu piv kahai su kuu.na||.
thaara sabad suhaava.na.a re jo piv mela aaj।.
chaa.nch maDhaa.uu.n thaarii sovanii re tuu mere sirtaaja||.
priitam kuu.n patiyaa.n likhuu.n re kaaga tuu le jaay।.
jaa.i priitam jii suu.n yuu.n kahai re thaarii virah.na.i dhaan n khaaya||.
miira daasii vyaakulii re piv piv karat vihaay।.
veg milo prabhu a.ntarjaamii tum bin rahyau n jaaya||.
अर्थ व्याख्या
ऐ पपीहे! पिया का राग मत अलाप। अगर इस हिज्र की मारी ने तेरी फ़रियाद सुन ली तो तेरे पंख मरोड़ देगी। और तेरी चोंच काटकर ज़ख़्म पर नमक छिड़क देगी। पिया मेरे हैं और मैं पिया की हूँ, तो पिया-पिया कहने वाला तू कौन है। फिर भी तेरा शब्द सुहाना है अगर आज पिया मिल जाएँ तो मैं तेरी चोंच सोने से मढ़ा दूँ और तुझे अपना सरताज बना लूँ। मैं अपने प्यारे को ख़त लिखूँगी—ऐ कव्वे, तू इसे ले जा और मेरे प्यारे से यह कह दे कि तेरी हिज्र की मारी ने खाना छोड़ दिया है, तुम्हारी दासी मीरा बेचैन है और उसके होंठों पर तुम्हारा नाम है; उसे जल्दी आकर मिलो। वह तुम्हारे बग़ैर ज़िंदा नहीं रह सकती।
राणाजी थें जहर दियौ म्हे जाणी मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
राणाजी थें ज़हर दियौ म्हे जाणी।.
जैसे कंचन दहत अगिन में निकसत बारह बाणी।.
लोक लाज कुल काण जगत की दई बहाय जसपाणी॥.
अपने घर का परदा कर ले मैं अबला बौराणी।.
तरकस तीर लग्यो मेरे हियरे गरक गयो सनकाणी॥.
सब संतन पर तन मन वारों चरण कँवल लपटाणी।.
मीरा को प्रभु राखि लई है दासी अपणी जाणी॥.
raa.na.aajii the.n ज़har diyau mhe jaa.na.ii।.
jaise ka.nchan dahat agin me.n niksat baarah baa.na.ii।.
lok laaj kul kaa.n jagat kii da.ii bahaay jaspaa.na.ii||.
apne ghar ka parda kar le mai.n abla bauraa.na.ii।.
tarkas tiir lagyo mere hiyre garak gayo sankaa.na.ii||.
sab sa.ntan par tan man vaaro.n char.n ka.nval lapTaa.na.ii।.
miira ko prabhu raakhi la.ii hai daasii ap.na.ii jaa.na.ii||.
raa.na.aajii the.n ज़har diyau mhe jaa.na.ii।.
jaise ka.nchan dahat agin me.n niksat baarah baa.na.ii।.
lok laaj kul kaa.n jagat kii da.ii bahaay jaspaa.na.ii||.
apne ghar ka parda kar le mai.n abla bauraa.na.ii।.
tarkas tiir lagyo mere hiyre garak gayo sankaa.na.ii||.
sab sa.ntan par tan man vaaro.n char.n ka.nval lapTaa.na.ii।.
miira ko prabhu raakhi la.ii hai daasii ap.na.ii jaa.na.ii||.
अर्थ व्याख्या
राणाजी, तुमने ज़हर दिया है मैं जान गई। जैसे सोना आग में तपकर सूरज की तरह चमक उठे। मैंने लोक लाज, ख़ानदान की इज़्ज़त दुनिया में पानी की तरह बहाई। हे राणा! अपने घर का पर्दा कर लो, मैं पागल औरत हूँ। सब संतों पर तन-मन वार उनके चरण कमल से लिपटी हूँ। मीरा को प्रभु ने अपनी दासी जानकर रख लिया है।
सखी मेरी नींद नसानी हो मीरा के पद अर्थ meera ke pad arth Mira Pad
सखी मेरी नींद नसानी हो।.
पिव के पंथ निहारत सिगरी रैन विहानी हो॥.
सब सखियन मिल सीख दई, मैं एक न मानी हो।.
बिन देखे कल नहीं परत, जिया ऐसी ठानी हो॥.
अंग छीन व्याकुल भई, मुख पिवपिव बानी हो।.
अंतर् वेदन विरह की वह पीर न जानी हो॥.
ज्यों चातक घन को रटै, मछरी जिमि पानी हो।.
मीरां व्याकुल विरहणी सुध बुध बिसरानी हो॥.
sakhii merii nii.nd nasaanii ho।.
piv ke pa.nth nihaarat sigrii rain vihaanii ho||.
sab sakhiyan mil siikh da.ii, mai.n ek n maanii ho।.
bin dekhe kal nahii.n parat, jiya aisii Thaanii ho||.
a.ng chhiin vyaakul bha.ii, mukh pivpiv baanii ho।.
a.ntar vedan virah kii vah piir n jaanii ho||.
jyo.n chaatak ghan ko raTai, machhrii jimi paanii ho।.
miiraa.n vyaakul virah.na.ii sudh budh bisraanii ho||.
sakhii merii nii.nd nasaanii ho।.
piv ke pa.nth nihaarat sigrii rain vihaanii ho||.
sab sakhiyan mil siikh da.ii, mai.n ek n maanii ho।.
bin dekhe kal nahii.n parat, jiya aisii Thaanii ho||.
a.ng chhiin vyaakul bha.ii, mukh pivpiv baanii ho।.
a.ntar vedan virah kii vah piir n jaanii ho||.
jyo.n chaatak ghan ko raTai, machhrii jimi paanii ho।.
miiraa.n vyaakul virah.na.ii sudh budh bisraanii ho||.
अर्थ व्याख्या
ऐ सखी मेरी नींद खो गई है। सारी रात अपने प्यारे की राह देखकर गुज़ारी है। सभी सहेलियों ने मिलकर नसीहत दी, मगर मैंने एक की न मानी। बग़ैर पिया को देखे चैन नहीं पड़ता। अब तो कुछ करने की जी में ठानी है। बदन सूख गया है, बेचैनी बढ़ गई और होंठ सिर्फ़ अपने प्यारे का नाम ले रहे हैं। मैं अंदर-ही-अंदर विरह की आग में जल रही हूँ और उसे मेरे दर्द की ख़बर भी नहीं। जैसे चातक बादलों को आवाज़ देता है, जैसे मछली पानी के लिए तड़पती है इसी तरह विरह की मारी मारी बेचैन हो रही हूँ और अपनी सुध-बुध भूल चुकी हूँ।
मीराबाई परिचय MeeraBai Parichay
मीराबाई | |
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![]() राजा रवि वर्मा द्वारा मीराबाई की पेंटिंग | |
जन्म | जशोदा राव रतन सिंह राठौड़ ई. 1498[1][2] कुड़की ग्राम (पाली) |
मौत | ई. 1547[1][2] द्वारिका, गुजरात सल्तनत |
उपनाम |
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प्रसिद्धि का कारण | कविता, कृष्ण भक्ति |
जीवनसाथी | भोज राज सिंह सिसोदिया (वि॰ 1516; नि॰ 1521) |
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