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राहत इंदौरी की ग़ज़लें : Rahat Indori Ghazal Hindi

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो : राहत इंदौरी आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो ले तो आए शाइरी बाज़ार में 'राहत' मियाँ क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के : राहत इंदौरी तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा कर के आते जाते हैं कई रंग मिरे चेहरे पर लोग लेते हैं मज़ा ज़िक्र तुम्हारा कर के एक चिंगारी नज़र आई थी बस्ती में उसे वो अलग हट गया आँधी को इशारा कर के आसमानों की तरफ़ फेंक दिया है मैं ने चंद मिट्टी के चराग़ों को सितारा कर के मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद ...

शकेब जलाली की ग़ज़लें : Shakeb Jalali Ghazal Hindi

शकेब जलाली (1934–1966) आधुनिक उर्दू के प्रसिद्ध शायर थे। उनका वास्तविक नाम सैयद हसन रिज़वी था और उनका जन्म जलाली, अलीगढ़ में हुआ था। कम उम्र में ही उन्होंने उर्दू ग़ज़ल में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी प्रमुख कृति ‘रौशनी ऐ रौशनी’ है, जो उनके निधन के बाद प्रकाशित हुई। उनकी शायरी में अकेलापन, जीवन की विडंबना, स्मृति और गहरी मानवीय संवेदना के साथ आधुनिक बिंबों का अनूठा प्रयोग मिलता है। कम समय के साहित्यिक जीवन के बावजूद उन्होंने उर्दू ग़ज़ल को नया और आधुनिक लहजा दिया। ‘आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो-चार गिरे’ और ‘आज इक और बरस बीत गया उसके बग़ैर’ उनके चर्चित कलाम में शामिल हैं। आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे : शकेब जलाली आ के पत्थर तो मिरे सहन में दो चार गिरे जितने उस पेड़ के फल थे पस-ए-दीवार गिरे ऐसी दहशत थी फ़ज़ाओं में खुले पानी की आँख झपकी भी नहीं हाथ से पतवार गिरे मुझे गिरना है तो मैं अपने ही क़दमों में गिरूँ जिस तरह साया-ए-दीवार पे दीवार गिरे तीरगी छोड़ गए दिल में उजाले के ख़ुतूत ये सितारे मिरे घर टूट के बेकार गिरे क्या हवा हाथ में तलवार लिए फिरती थी क्यूँ मुझे ...