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रघुवीर सहाय की कविताएँ : Raghuvir Sahay Ki Kavita

 परिचय रघुवीर सहाय (1929–1990) हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवि, लेखक और पत्रकार थे। वे नई कविता के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में आम आदमी का जीवन, सामाजिक विषमता, राजनीतिक व्यवस्था, सत्ता का चरित्र और लोकतांत्रिक समाज की विडंबनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उन्होंने सरल और बोलचाल की भाषा के माध्यम से अपने समय की सामाजिक और राजनीतिक सच्चाइयों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। ‘लोग भूल गए हैं’, ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ और ‘हँसो हँसो जल्दी हँसो’ उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में शामिल हैं। आधुनिक हिंदी कविता में रघुवीर सहाय का स्थान एक सजग और जनपक्षधर कवि के रूप में महत्वपूर्ण है। Raghuvir Sahay  किताब पढ़कर रोना रघुवीर सहाय रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर के पर अब याद नहीं कि कौन-सी शायद वह कोई वृत्तांत था पात्र जिसके अनेक बनते थे चारों तरफ़ से मँडराते हुए आते थे पढ़ता जाता और रोता जाता था मैं क्षण-भर में सहसा पहचाना यह पढ़ता कुछ और हूँ रोता कुछ और हूँ दोनों जुड़ गए हैं पढ़ना किताब का और रोना मेरे व्यक्ति का लेकिन मैंने जो पढ़ा था उसे नहीं रोया था पढ...