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नरक ले जाने वाली लिफ़्ट (कहानी) | Narak Le Jaane Vaalee Lift : पार लागेरक्विस्ट

रईस व्यापारी मि० स्मिथ ने होटल की शानदार लिफ़्ट का दरवाज़ा खोला और निहायत प्यारे-भरे अंदाज़ के साथ फर और पाउडर में लिपटी, महकती सुंदरी को एहतियात से भीतर खींच लिया। गुदगुदी और मुलायम सीट पर दोनों आपस में लिपट गए। लिफ़्ट नीचे की ओर चल पड़ी। अपना भाप और शराब से भीगा अधखुला मुँह लड़की ने आगे कर दिया और एक ने दूसरे का चुंबन लिया। खुली छत पर, तारोंभरी छाँह में, अभी-अभी दोनों ने रात का खाना साथ-साथ खाया था और अब मनोविनोद और मनोरंजन करने के लिए बाहर निकल रहे थे। “सुनो, ऊपर कैसा अच्छा लगा था! मानो साक्षात् स्वर्ग में बैठे हों!” होंठों-ही-होंठों में फुसफुसाकर स्त्री ने कहा, “तुम्हारे साथ बैठकर आसपास का सब-कुछ ऐसा रोमानी और कवित्वपूर्ण लगता था, मानो हम लोग धरती के जीव नहीं, आसमान के तारे हों!...प्यार किसे कहते हैं, सचमुच इसका अनुभव ऐसे क्षणों में ही तो होता है। तुम मुझे प्यार करते हो…क्यों करते हो न?” मि० स्मिथ ने उसकी इस बात का जवाब पहले से भी अधिक प्रगाढ़ और लंबे चुंबन से दिया। लिफ़्ट नीचे आ रही थी। “डार्लिंग, तुम आ गईं, यह बहुत ही अच्छा किया,” मि० स्मिथ बोले, “वरना तुम जानती हो, मेरा मन कितना...