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एक सपने की मौत (कहानी) | Ek Sapane Ki Maut : सिग्रिड उंडसेट

मठ के दरवाज़े पर हाथों में जलती मोमबत्तियाँ लेकर भिक्षुणियाँ आदमियों की क़तार की अगवानी करने के लिए पहुँच गई थीं। भय ने क्रिस्तिन की पूरी चेतना को अपने क़ब्ज़े में कर लिया था। उसे लगा, जैसे चलते हुए वह कुछ तो ख़ुद अपने को ढो रही है और कुछ दूसरों के सहारे पर है। दरवाज़े से गुज़रकर वे सफ़ेद दीवार वाले कमरे में पहुँच गए, जहाँ मोमबत्ती और लाल देवदार की मशाल की मिलीजुली पीली रोशनी दिपदिपा रही थी और क़दमों की आहटें समुद्र की लहरों जैसी आवाज़ें पैदा कर रही थीं। उस मरणासन्न औरत को लग रहा था, जैसे उस रोशनी की ही तरह उसके जीवन की लौ भी बस बुझने ही वाली है और उन क़दमों की आवाज़ के साथ जैसे मौत उसके क़रीब आती जा रही है। मोमबत्ती की रोशनी फिर खुले में फैल गई थी। अब वे बरामदे में आ गए थे। चर्च की भूरे पत्थरों की दीवारों और ऊँची विशालकाय खिड़कियों से अब मोमबत्ती की रोशनी खेलने लगी थी। इस समय वह किसी की बाँहों के सहारे पर थी। यह उल्फ़ ही था, पर इस समय तो वह उन सब लोगों जैसा दिख रहा था, जो उसे सहारा देते आए हैं। जब क्रिस्तिन ने अपनी बाँहें उसके गले में डाल दीं और अपना गाल उसकी गर्दन से सटा लिया तो लगा, जैसे वह फि...