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वह असफलताओं से खेलता रहा (कहानी) | Vah Asaphalataaon Se Khelataa Rahaa : जॉन गाल्सवर्दी

ऋतु गर्म हो या ठंडी, अच्छी हो या बुरी, इससे अधिक निश्चित बात और कोई न थी कि वह लँगड़ा आदमी शहतूत की टेढ़ी-मेढ़ी छड़ी के सहारे चलता हुआ यहाँ से अवश्य गुज़रेगा। उसके कंधे पर लटकती हुई खपच्चियों की बनी हुई टोकरी में एक फटी-पुरानी बोरी से ढके हुए ग्रोंडसील के बीज पड़े हुए थे। ग्रोंडसील घास की तरह एक छोटा-सा पौधा है, जिसमें पीले रंग के फूल लगते हैं। पालतू पक्षी इसके बीज शौक़ से खाते हैं। खुंबियों के मौसम में वह खुंबियाँ भी अख़बार में लपेटकर टोकरी के अंदर रख लेता है। उसका चेहरा सपाट व मज़बूत था। उसकी लाल दाढ़ी की रंगत भूरी होती जा रही थी और झुर्रियों भरे चेहरे से उदासी टपकती थी, क्योंकि उसकी टाँग में हर समय टीसें उठती थीं। एक दुर्घटना में उसकी यह टाँग कट गई थी और अब सही-सलामत टाँग से कोई दो इंच छोटी थी। टाँग की पीड़ा और काम में असमर्थता उसे हर समय इनसान के नश्वर होने का अहसास दिलाती थी। शक्ल से वह संपन्न न सही, सम्मानित अवश्य दिखाई देता था, क्योंकि उसका नीला ओवरकोट बहुत पुराना था। जुराबें, सदरी और टोपी निरंतर उपयोग से घिस-पिट गई थीं और बदलती हुई ऋतुओं ने उन पर स्पष्ट निशान छोड़े थे। दुर्घटना से प...

मोची (कहानी) | Mochee : जॉन गाल्सवर्दी

मैं उसे तब से जानता था, जब मैं बहुत छोटा था। वह मेरे पिताजी के जूते बनाता था। अपने बड़े भाई के साथ वह रहता था। छोटी-सी एक गली में दो दुकानों को मिलाकर एक दुकान में बदल दिया गया था, पर अब वह दुकान नहीं रही, उसकी जगह एक बेहद आधुनिक दुकान खड़ी हो गई है। उसकी कारीगरी में कुछ ख़ास बात थी। शाही परिवारों के लिए बनाए गए किसी भी जूते की जोड़ी पर कोई चिन्ह अंकित नहीं होता था सिवाए, उनके अपने जर्मन नाम के गेस्लर ब्रदर्स; और खिड़की पर जूतों की केवल कुछ जोड़ियाँ रखी रहती। मुझे याद है खिड़की पर एक ही तरह की जोड़ियों को हर बार देखना मुझे खलता था, क्योंकि वह ऑर्डर के मुताबिक ही जूते बनाता था—न कम न ज़्यादा। उसके बनाए जूतों के बारे में यह सोचना अकल्पनीय था कि वे पाँव में ठीक से नहीं बैठेंगे। तो क्या खिड़की पर रखे जूते उसने ख़रीदे थे। यह सोचना भी कल्पना से परे था? वह अपने घर में ऐसा कोई चमड़ा रखना सहन नहीं करता था, जिस पर वह ख़ुद काम न करे। इसके अलावा, पंप शू का वह जोड़ा बेहद ख़ूबसूरत था, इतना शानदार कि बयान करना मुश्किल था। वह असली चमड़े का था। जिसकी ऊपरी तह कपड़े की थी। उन्हें देख कर ही जी ललचाने लगत...