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वह (कहानी) | Vah : लुइजी पिरांडेलो

जिस दिन उन लोगों का विवाह होना निश्चित हुआ, उसी दिन से बर्तोलीनो ने अपनी भावी पत्नी को कहते सुना-जानते हो न, मेरा असली नाम लीना नहीं है। मेरा नाम है करोलीना, किंतु ‘वे’ मुझे लीना कह कर पुकारते थे। इसी कारण तभी से मेरा नाम लीना ही रह गया है। ओह! बहुत ही सज्जन थे वे। वह देखो उनकी तसवीर, कह कर लीना ने एक बड़े फ़ोटोग्राफ़ की ओर उँगली उठाई। बर्तोलीनो ने देखा, उसकी भावी पत्नी के प्रथम पति सिनोर कोसिमो ताद्देयी उसकी ओर मृदु मुस्कान के साथ टोपी उठा रहे हैं। अपने अनजाने में बर्तोलीनो ने मृत सज्जन के अभिवादन के प्रत्युत्तर में अपना माथा क़रीब आधा झुका लिया था। ताद्देयी एक विख्यात मूर्तिकार थे। उनके निधन के उपरांत उनकी तसवीर को दीवाल पर से उतार कर रखने की बात उनकी विधवा पत्नी लीना सारूल्ली के मन में एक बार भी न आई और आती भी क्यों? उनके प्रति लीना की कृतज्ञता भी तो कम नहीं है। उसका मान-सम्मान, घर-द्वार सुंदर-सुंदर तमाम सामान, ये सब कुछ तो वे ही रख गए हैं। भावी द्वितीय पति की हैरानी के भाव की ओर तनिक भी ध्यान न देती हुई लीना ने आगे कहा-असल में मैं नाम बदलना नहीं चाहती थी, परंतु वे जो कहते थे, उसक...