जिस व्यक्ति की यहाँ कहानी कही जा रही है वह अपने इलाक़े का सर्वाधिक प्रभावशाली एवं धनवान किसान था। उसका नाम था थोर्ड ओवरास। एक दिन वह गर्व से भरा हुआ पादरी के अध्ययन-कक्ष में पहुँचा। मुझे एक लड़का हुआ है, उसने कहा, और बपतिस्मा के लिए मैं उसे लाना चाहता हूँ। उसका नाम क्या रखोगे? अपने पिता के नाम पर उसका नाम फिन रखना चाहता हूँ। “और धर्मपिता? उसने जो नाम लिया वे प्रत्यक्ष इलाक़े के सर्वश्रेष्ठ स्त्री-पुरुष थे। “और कुछ?'' पादरी ने उसकी ओर देखते हुए पूछा। किसान थोड़ा हिचकिचाया। मेरी बहुत इच्छा है कि बपतिस्मा स्वयँ उसके मन से हो। आख़िर में उसने कहा। कब? किसी कार्यदिवस के दिन। “अगले शनिवार को दुपहर बारह बजे। “और कुछ? पादरी ने पैसा ले लिया। यह तीसरा अवसर है थोर्ड, जब तुम अपने बेटे के बाबत मेरे यहाँ आए। उसके प्रति यह मेरी अंतिम ज़िम्मेदारी है? थोर्ड ने कहा और अपनी नोटबुक समेटते हुए विदा लेकर बाहर निकल आया। और लोग भी उसके पीछे-पीछे हो लिए। दो सप्ताह पश्चात् एक शांत एवं निश्छल दिन में पिता-पुत्र एक नाव पर विवाह की व्यवस्था के सिलसिले में स्टोरलिडेन के यहाँ जा रहे थे। यह सुरक्षि...