गोपालप्रसाद व्यास – हिंदी व्यंग्य के लोकप्रिय कवि जन्म 13 फ़रवरी 1915 निधन 28 मई 2005 गोपालप्रसाद व्यास हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि और लेखक थे। अपनी सरल, चुटीली और व्यंग्यपूर्ण भाषा के माध्यम से उन्होंने समाज और रोजमर्रा के जीवन की विसंगतियों को बेहद रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं में हास्य के साथ-साथ सामाजिक चेतना और गहरी मानवीय समझ भी दिखाई देती है। हिंदी हास्य-व्यंग्य साहित्य में उनका महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। आराम करो / गोपालप्रसाद व्यास एक मित्र मिले, बोले, "लाला, तुम किस चक्की का खाते हो? इस डेढ़ छटांक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो क्या रक्खा माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो संक्रान्ति-काल की बेला है, मर मिटो, जगत में नाम करो" हम बोले, "रहने दो लेक्चर, पुरुषों को मत बदनाम करो इस दौड़-धूप में क्या रक्खा, आराम करो, आराम करो। आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इससे न तपेदिक होती है आराम सुधा की एक बूँद, तन का दुबलापन खोती है आराम शब्द में 'राम' छिपा जो भव-बंधन को खोता है आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है इसलिए तुम्हें...