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मि० नैब (कहानी) | Mi. Naib : फेरेन्स मोल्नार

बोर्डिंग हाउस में रहने वाले छात्र, बड़ी नाक वाले मि० नैब का पर्याप्त सम्मान करते थे। उस बोर्डिंग हाउस का संचालन एक तेज़-तर्रार बूढ़ी स्त्री किया करती थी। बूढ़ी स्त्री की एक बिटिया थी। बेटी का विवाह हो चुका था, लेकिन वर्तमान में वह विधवा थी। उम्र थी मात्र छब्बीस वर्ष। नैब और वो एक-दूसरे को बेइंतहा प्यार किया करते थे। नैब के वास्तविक नाम को तो मैं भूल ही चुका हूँ। रूसी नाम था—बेहद लंबा और अटपटा, लेकिन उसमें नैब शब्द आता था। जब इस बोर्डिंग हाउस में, मैं रहने पहुँचा था तब नैब—जैसा उसे सभी पुकारा करते थे और बोर्डिंग हाउस की बूढ़ी मालकिन की युवा विधवा बेटी, एक-दूसरे के प्यार में पागल थे। यह संबंध लंबे समय से चलता आ रहा था। नैब ने बहुत पहले ही डाक्टरी की परीक्षा पास कर ली थी, इसके बावजूद बोर्डिंग हाउस छोड़ने का उसका कोई इरादा न था। उधर उसके पिता लगातार पत्र लिख उससे ओडेसा लौटने का इंतज़ार कर थक चुके थे। पिता ने न केवल ओडेसा में उसके लिए नौकरी तय कर दी थी, वरन् उसके लिए प्यारी-सी दुलहन भी देख रखी थी। पत्रों का सार यह था कि नैब के भावी जीवन की पूरी तैयारी उन्होंने कर रखी है, बस उसके लौटने भर की...