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वसीम बरेलवी की नज़्में : Waseem Barelvi Nazm Hindi

ख़्वाब नहीं देखा है : वसीम बरेलवी मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है रात खिलने का गुलाबों से महक आने का ओस की बूंदों में सूरज के समा जाने का चाँद सी मिट्टी के ज़र्रों से सदा आने का शहर से दूर किसी गाँव में रह जाने का खेत खलियानों में बाग़ों में कहीं गाने का सुबह घर छोड़ने का देर से घर आने का बहते झरनों की खनकती हुई आवाज़ों का चहचहाती हुई चिड़ियों से लदी शाख़ों का नर्गिसी आँखों में हँसती हुई नादानी का मुस्कुराते हुए चेहरे की ग़ज़ल ख़्वानी का तेरा हो जाने तिरे प्यार में खो जाने का तेरा कहलाने का तेरा ही नज़र आने का मैं ने मुद्दत से कोई ख़्वाब नहीं देखा है हाथ रख दे मिरी आँखों पे कि नींद आ जाए दीवाने की जन्नत : वसीम बरेलवी मेरा ये ख़्वाब कि तुम मेरे क़रीब आई हो अपने साए से झिझकती हुई घबराती हुई अपने एहसास की तहरीक पे शरमाती हुई अपने क़दमों की भी आवाज़ से कतराती हुई अपनी साँसों के महकते हुए अंदाज़ लिए अपनी ख़ामोशी में गहनाए हुए राज़ लिए अपने होंटों पे इक अंजाम का आग़ाज़ लिए दिल की धड़कन को बहुत रोकती समझाती हुई अपनी पायल की ग़ज़ल-ख़्वानी पे झल्लाती हुई नर्...