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जाँ निसार अख़्तर की नज़्में : Jan Nisar Akhtar Nazm Hindi Lyrics

आख़िरी मुलाक़ात : जाँ निसार अख़्तर मत रोको इन्हें पास आने दो ये मुझ से मिलने आए हैं मैं ख़ुद न जिन्हें पहचान सकूँ कुछ इतने धुँदले साए हैं दो पाँव बने हरियाली पर एक तितली बैठी डाली पर कुछ जगमग जुगनू जंगल से कुछ झूमते हाथी बादल से ये एक कहानी नींद भरी इक तख़्त पे बैठी एक परी कुछ गिन गिन करते परवाने दो नन्हे नन्हे दस्ताने कुछ उड़ते रंगीं ग़ुबारे बब्बू के दुपट्टे के तारे ये चेहरा बन्नो बूढ़ी का ये टुकड़ा माँ की चूड़ी का ये मुझ से मिलने आए हैं मैं ख़ुद न जिन्हें पहचान सकूँ कुछ इतने धुँदले साए हैं अलसाई हुई रुत सावन की कुछ सौंधी ख़ुश्बू आँगन की कुछ टूटी रस्सी झूले की इक चोट कसकती कूल्हे की सुलगी सी अँगीठी जाड़ों में इक चेहरा कितनी आड़ों में कुछ चाँदनी रातें गर्मी की इक लब पर बातें नरमी की कुछ रूप हसीं काशानों का कुछ रंग हरे मैदानों का कुछ हार महकती कलियों के कुछ नाम वतन की गलियों के मत रोको इन्हें पास आने दो ये मुझ से मिलने आए हैं मैं ख़ुद न जिन्हें पहचान सकूँ कुछ इतने धुँदले साए हैं कुछ चाँद चमकते गालों के कुछ भँवरे काले बालों के कुछ नाज़ुक शिकनें आँचल ...