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अलविदा माँ! (कहानी) | Alavidaa Maan! : अल्बैर कामू

माँ का आज देहांत हो गया या शायद कल हुआ हो; कह नहीं सकता। आश्रम से आए तार में लिखा है—“आपकी माँ चल बसी, अंतिम संस्कार कल। गहरी सहानुभूति”, इससे कुछ पता नहीं चलता, हो सकता है यह कल हुआ हो। वृद्धाश्रम मोरेंगो में हैं; अल्जीयर्स से तक़रीबन पचास मील दूर, दो बजे की बस से मैं रात घिरने से पहले पहुँच जाऊँगा, फिर रात वहाँ गुज़ार सकता हूँ—अर्थी के पास रतजगे की रस्म के लिए...। फिर कल शाम तक वापस, मैंने अपने मालिक से दो दिन की छुट्टी की बात कर ली है; ज़ाहिर है ऐसे हालात में वह मना नहीं कर सकता था। फिर भी लगा मानो ग़ुस्से में है। मैंने बग़ैर सोचे ही कह दिया “सॉरी सर, आप जानते हैं, इसमें मेरा कोई क़सूर नहीं है।” बाद में लगा, मुझे ऐसा कहने की ज़रूरत न थी, माफ़ी माँगने की तो कोई वजह ही न थी; दरअसल उसे मुझसे सहानुभूति दिखानी चाहिए थी। परसों जब मैं काले कपड़ों में दफ़्तर लौटू तो शायद वह ऐसा करेगा, अभी तक तो ख़ुद मुझे ही नहीं लग रहा कि माँ वाक़ई नहीं रही, शायद अंत्येष्टि के बाद यक़ीन हो जाएगा। मैंने दो बजे की बस पकड़ी—चिलचिलाती दुपहरी थी। हमेशा की तरह मैं सेलेस्टे के रेस्तरां में खाने के लिए उतरा। सभी...

मेरे पिता (कहानी) | Mere Pitaa : अल्बैर कामू

कुछ सड़कें छोड़कर गीली सड़क पर तेज़ी से चलती कार की मद्धम लेकिन लंबी फूत्कार सुनाई दी—फिर वह फूत्कार बंद हो गई। दूर कहीं अस्पष्ट चिल्लाहटों ने वातावरण की नीरवता को भंग किया। उसके बाद तारों-भरे आसमान से जैसे किसी मोटे आवरण ने इन दोनों जनों को लपेट लिया और ख़ामोशी छा गई। तारो उठकर मुँडेर पर जा बैठा था, उसका मुँह रियो की तरफ़ था जो अपनी कुर्सी में धँसा बैठा था। टिमटिमाते आसमान की पृष्ठभूमि में रियो के भारी-भरकम शरीर की काली रेखाकृति दीख रही थी। तारो को बहुत कुछ कहना था, उसके अपने शब्दों में ही हम सारी बातें बताएँगे। “मैं चाहता हूँ, तुम्हें मेरी बात समझने में आसानी हो, इसलिए सबसे पहले मैं यही कहूँगा कि मेरी ज़िंदगी शुरू से ऐसी नहीं थी। जवानी में मैं अपनी मासूमियत के ख़्याल पर ज़िंदा था, जिसका मतलब है कि मेरे मन में कोई ख़्याल ही नहीं था। मैं उन लोगों में से नहीं, जो अपने को यंत्रणा देते हैं। मैंने उचित ढंग से अपनी ज़िंदगी शुरू की थी। मैंने जिस काम में हाथ डाला, उसी में मुझे सफलता मिली। बुद्धिजीवियों के क्षेत्र में, बेतकल्लुफ़ी से विचरण करता था, औरतों के साथ मेरी ख़ूब पटती थी और अगर कभी-कभी मेरे मन ...