परिचय राजकमल चौधरी (1929–1967) हिंदी और मैथिली के चर्चित कवि, कथाकार एवं उपन्यासकार थे। वे नई कविता और आधुनिकतावादी साहित्य की प्रमुख आवाज़ों में माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘मुक्तिप्रसंग’, ‘कंकावती’ और ‘मछली मरी हुई’ विशेष रूप से चर्चित हैं। उनकी रचनाओं की विशिष्टता यथार्थवादी दृष्टि, विद्रोही तेवर, नगरीय जीवन की विडंबनाओं और मानवीय संबंधों के जटिल चित्रण में दिखाई देती है। कम आयु में निधन के बावजूद उन्होंने हिंदी और मैथिली साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और उनकी रचनाएँ आज भी आधुनिक भारतीय साहित्य के संदर्भ में पढ़ी जाती हैं। शव-यात्रा का मृत संगीत राजकमल चौधरी स्मृति में महाप्राण निराला को समर्पित समूचा नगर पेट्रोल की गंध में डूबा हुआ... आग लगती है। धड़ाके से ग्लोब फट जाता है, आग लगती है। कहीं कोई सायरन नहीं बजता... मैं पेट्रोल में आग में ग्लोब में अपने अकेलपन में तुम्हारी मृत्यु के अपराध में, क़ैद हूँ। क़ैदख़ाने में दरवाज़ा नहीं है; दरवाज़ा इस ग्लोब में कभी नहीं था। आओ, पहले हम बहस करें कि क्यों नहीं था दरवाज़ा पहले हम तय करें कि यह क़ैदख़ाना किसने बनाया फ़...