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जानवर का निशान (कहानी) | Jaanavar Ka Nishaan : जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग

तुम्हारे भगवान् और मेरे भगवान्—क्या तुम या मैं जानते हैं कि कौन ताक़तवर है? एक देसी कहावत कुछ का मानना है कि स्वेज के पूर्व में ईश्वर की कृपा का सीधा क़ाबू ख़त्म हो जाता है, वहाँ आदमी एशिया के देवताओं और राक्षसों की ताक़त के अधीन हो जाता है और किसी-किसी अंग्रेज़ आदमी को कभी-कभी इंग्लैंड के चर्च के भगवान् की कृपा अपनी सुरक्षा देती है। यह मत भारत में जीवन में होने वाली बेकार की डरावनी बातों के कारण है, इससे मेरी कहानी की व्याख्या हो सकती है। इस मामले में मेरा दोस्त पुलिसकर्मी स्ट्रिकलैंड, जो भारतवासियों के बारे में उतना जानता है, जितना जानना अच्छा होता है, तथ्यों का साक्षी हो सकता है। हमारे डॉक्टर डुमो ने भी उतना देखा, जितना मैंने और स्ट्रिकलैंड ने देखा। उसने इन प्रभावों से जो निष्कर्ष निकाला, वह बिलकुल ग़लत था। अब वह मर चुका है, बड़े अजीब ढंग से मरा था; इस बारे में कहीं और लिखा है। फ़्लीट जब हिंदुस्तान आया, तब उसके पास थोड़ा-सा पैसा और हिमालय के निकट धर्मशाला के क़रीब थोड़ी-सी ज़मीन थी। दोनों जायदादें उसे अपने चाचा से विरासत में मिली थीं। वह उन्हीं का इंतज़ाम करने आया था। वह शरीर से बड़ा और...