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एक रात का अपराधी (कहानी) | Ek Raat Ka Aparaadhee : विक्टर ह्यूगो

अपराध की दुनिया के नवागंतुकों के लिए बनी जेल के साथ बनी सज़ायाफ़्ता क़ैदियों की जेल एक जीवंत विरोधाभास है। न केवल दुष्कर्मियों का प्रारंभ और अंत ही आमने-सामने है, वरन् दोनों व्यवस्थाएँ भी आमने-सामने हैं—एकांत कारावास और सामूहिक कारावास। इस प्रश्न का उत्तर भी इसी से निश्चित हो जाता है। एकांत कारावास की काल कोठरी और तहख़ाना (सेल) पुराने और नए जेल के मौन द्वंद्व युद्ध की तरह है। एक ओर हैं सभी सज़ायाफ़्ता क़ैदी-सत्रह वर्षीय बच्चे, सत्तर वर्षीय वृद्धों के साथ, तेरह माह की सज़ा के साथ आजन्म कारावासी। दाढ़ी रहित लड़का जिसने सेब चुराया था और भरी सड़क का हत्यारा जिसे प्लेस सैट जैक्स में झूमा झपटी के बाद प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के चलते तूलों भेजा गया, कुछ हद तक निरपराध और समयबद्ध सज़ायाफ़्ता भी, नीली आँखों वाला और सफ़ेद दाढ़ी वाला सभी कीड़े-मकोड़ों से भरे, वर्कशॉप में नीम-अँधेरे में सिलाई और अन्य काम बिना एक-दूसरे को देखे मजबूरी में करते रहते हैं, जहाँ एक समूह उम्र से डरता रहता है और दूसरा उनके गर्म ख़ून से। दूसरी ओर उस विशाल तिमंजिला बिल्डिंग के अपने-अपने सेल (कोठरी) में क़ैदी मधुमक्खियों के छत्त...