आरती शांतिनाथ (रूप 1) – Shantinath Aarti Lyrics in Hindi

आरती शांतिनाथ (रूप 1)

सोलहवें तीर्थंकर श्री शांतिनाथ भगवान चक्रवर्ती भी थे और कामदेव भी — इस आरती में उनके इसी असाधारण जीवन का वर्णन मिलता है।

जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

मन वच तन से, तुमको वन्दु २
जय अन्तरयामी प्रभु जय अन्तरयामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

गर्भ जनम जब हुआ आपका 2
तीन लोक हर्षे स्वामी तीन लोक हर्षे
इन्द्र कियो अभिषेक शिखर पर २
शिव मग के स्वामी बोलो शिव मग के स्वामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

पंचम चक्री भये आप ही २
षट खंड के स्वामी, प्रभु षट खंड के स्वामी
राज विभव के भोगे प्रभु जी २
कामदेव नामी, बोलो कामदेव नामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

अतुल विभव को तृणवत त्यागे २
हुए कर्म नाशी प्रभुजी, हुए कर्म नाशी
भये आप तीर्थंकर प्रभु जी २
शिव रमणी स्वामी, बोलो शिव रमणी स्वामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

वीर सिंधु को नमस्कार कर २
आरती करू थारी, प्रभु आरती करू थारी
सूरज शिवपुर पावो प्रभु जी २
महा सोख्य धारी बोलो महा सोख्य धारी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

मन वच तन से, तुमको वन्दु २
जय अन्तरयामी प्रभु जय अन्तरयामी
जय शांतिनाथ स्वामी, प्रभु जय शांतिनाथ स्वामी ।

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