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आरती अनंथ्नाथ जी – Anantnath Ji Aarti Lyrics in Hindi

आरती अनंथ्नाथ जी

साकेतपुरी में जन्मे चौदहवें तीर्थंकर श्री अनंतनाथ भगवान की यह आरती सीधे-सरल शब्दों में आत्मा की ज्योति जगाने की बात करती है।

करते हैं प्रभु की आरती, आतम की ज्योति जलेगी ।

प्रभुवर अनंत की भक्ति, सदा सोख्य भरेगी, सदा सोख्य भरेगी ॥

हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

हे सिंहसेन के राज दुलारे, जयश्यामा के प्यारे ।
साकेतपूरी के तुम नाथ, गुणाकार तुम न्यारे ॥
तेरी भक्ति से हर प्राणी में, शक्ति जगेगी, प्राणी में शक्ति जगेगी,
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

वदि ज्येष्ठ द्वादशी में प्रभुवर, दीक्षा को धारा था ।
चैत्री मावस में ज्ञान कल्याणक उत्सव प्यारा था ॥
प्रभु की दिव्यध्वनि दिव्यज्ञान, आलोक भरेगी, ज्ञान आलोक भरेगी॥
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी
हे त्रिभुवन स्वामी, हे अन्तरयामी

जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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