कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

श्री जिनवाणी माता की आरती – Jinvani Mata Aarti Lyrics in Hindi

श्री जिनवाणी माता की आरती

जिनवाणी को जैन धर्म में माता का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यही अज्ञान का अंधकार मिटाकर सही राह दिखाती है। यह आरती उसी जिनवाणी माता को समर्पित है।

ॐ जयजिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निशदिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी ॥ टेक

श्री जिनगिरिथी निकसी, गुरु गौतम वाणी,
जीवन भ्रम तम नाशन, दिपक दरशाणी ॥ॐजय॥

कुमत कुलाचल चूरन, वज्र सम सरधानी।
नव नियोग निक्षेपन, देखत दरपानी ॥ॐजय॥

पातक पंक पखालन, पुन्य परम वाणी।
मोह महार्णव डूबता, तारन नौकाणी ॥ॐजय॥

लोका लोक निहारन, दिव्य नयन स्थानी।
निज पर भेद दिखावन, सुरज किरणानी ॥ॐजय॥

श्रावक मुनिगण जननी, तुम ही गुणखानी।
सेवक लख सुखदायक, पावन परमाणी ॥ॐजय॥

ॐ जय जिनवाणी माता, ॐ जय जिनवाणी माता,
तुमको निश दिन ध्यावे, सुरनर मुनि ज्ञानी॥

जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *