श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह – Mahavir Swami Aarti (4 Versions) in Hindi

श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह

भगवान महावीर की आरती के कई सुंदर रूप प्रचलित हैं — कहीं कुंडलपुर का जिक्र है तो कहीं चाँदनपुर का। यहाँ हमने चार अलग-अलग प्रचलित आरतियाँ एक ही जगह क्रमांक देकर रख दी हैं, जो भी पसंद आए वो गाइए।

1. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 1)

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

सिद्धारथ घर जन्मे, वैभव था भारी-2 |
बाल ब्रह्मचारी व्रत-2, पाल्यो तपधारी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

आतम ज्ञान विरागी, समदृष्टि धारी-2 |
माया मोह विनाशक-2, ज्ञान ज्योति जारी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जग में पाठ अहिंसा, आपहि विस्तार्यो-2 |
हिंसा पाप मिटाकर-2, सुधर्म परचार्यो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

इह विधि चाँदनपुर में, अतिशय दर्शायो-2 |
ग्वाल मनोरथ पूर्यो-2, दूध गाय पायो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

अमरचंद को सपना, तुमने प्रभु दीना-2 |
मंदिर तीन शिखर का-2, निर्मित है कीना |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जयपुर-नृप भी तेरे, अतिशय के सेवी-2 |
एक ग्राम तिन दीनो-2, सेवा-हित यह भी |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जो कोर्इ तेरे दर पर, इच्छा कर आवे-2 |
होय मनोरथ-पूरण-2, संकट मिट जावे |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

निशि-दिन प्रभु-मंदिर में, जगमग-ज्योति जरे-2 |
हम सेवक चरणों में-2, आनंद-मोद धरें |
ॐ जय महावीर प्रभो ||
जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||

जय महावीर प्रभो, स्वामी जय महावीर प्रभो |
कुंडलपुर अवतारी-2, त्रिशलानंद विभो |
ॐ जय महावीर प्रभो ||


2. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 2)

करौं आरती वर्द्धमानकी । पावापुर निरवान थान की ॥ टेक
राग बिना सब जगजन तारे । द्वेष बिना सब कर्म विदारे ।

शील धुरंधर शिव तिय भोगी । मनवच कायन कहिये योगी । करौं०

रत्नत्रय निधि परिग्रह हारी । ज्ञानसुधा भोजनव्रतधारी । करौं०

लोक अलोक व्यापै निजमांहीं । सुखमय इंद्रिय सुखदुख नाहीं । करौं०

पंचकल्याणकपूज्य विरागी । विमल दिगंबर अबंर त्यागी । करौं०

गुनमनि भूषन भूषित स्वामी । जगत उदास जगंतर स्वामी । करौं०

कहै कहां लौ तुम सबजानौं । द्यानत की अभिलाषा प्रमानौ । करौं०


3. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 3)

ॐ जय महावीर प्रभो! स्वामी जय महावीर प्रभो ।
जग नायक सुखदायक, अति गंभीर प्रभो । ॐ जय ०

कुण्डलपुर में जन्में त्रिशला के जाए, स्वामी त्रिशला के जाए ०
पिता सिद्धार्थ राजा, सुर नर हर्षाए । ॐ जय ०

दीनानाथ दयानिधि हो मंगलकारी, स्वामी हो मंगलकारी ०
जगतहित संयम धारा, प्रभु पर उपकारी । ॐ जय ०

पापाचार मिटाया, सत्पथ दिखलाया, स्वामी सत्पथ ०
दया धर्म का झंडा, जग में लहराया । ॐ जय ०

अर्जुनमाली, गौतम, श्री चन्दनबाला, स्वामी श्री चन्दन ०
पार जगत से बेडा, इनका कर डाला । ॐ जय ०

पावन नाम तुम्हारा, जग तारणहारा, स्वामी जग तारण ०
निश दिन जो नर ध्यावे, कष्ट मिटे सारा । ॐ जय ०

करूणासागर! तेरी महिमा है न्यारी, स्वामी महिमा है ०
ज्ञान मुनि गुण गावे, चरणन बलिहारी । ॐ जय ०


4. श्री महावीर स्वामी आरती संग्रह (रूप 4)

जय सन्मति देवा, प्रभु जय सन्मति देवा ।
वर्द्धमान महावीर वीर अति, जय संकट छेवा ॥ टेक

सिद्धारथ नृप नन्द दुलारे, त्रिशला के जाये ।
कुण्डलपुर अवतार लिया, प्रभु सुर नर हर्षाये ॥ ऊँ जय०

देव इन्द्र जन्माभिषेक कर, उर प्रमोद भरिया ।
रुप आपका लख नहिं पाये, सहस आंख धरिया ॥ ऊँ जय०

जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये, घर में बाल यती ।
राजपाट ऐश्वर्य छाँड सब, ममता मोह हती ॥ ऊँ जय०

बारह वर्ष छद्मावस्था में, आतम ध्यान किया ।
घाति कर्म चकचूर, चूर प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥ ऊँ जय०

पावापुर के बीच सरोवर, आकर योग कसे ।
हने अघातिया कर्म शत्रु सब, शिवपुर जाय बसे ॥ ऊँ जय०

भूमंडल के चांदनपुर में, मंदिर मध्य लसे ।
शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी, दर्शन पाप नसे ॥ ऊँ जय०

करुणासागर करुणा कीजे, आकर शरण गही ।
दीन दयाला जगप्रतिपाला, आनन्द भरण तुही ॥ ऊँ जय ०

जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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