कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है – Jain Vairagya Bhajan

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है

जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है
संसार में रहकर प्राणी, संसार को तज सकता है ॥

कहीं दर्पण देख विरक्ति, कहीं मृतक देख वैरागी,
बिन कारण दीक्षा लेता, वो पूर्व जन्म का त्यागी,
निर्ग्रन्थ साधु ही इतने, सदगुण से सज सकता है ॥१॥

आत्मा तो अजर अमर है, हम आयु गिनें इस तन की,
वैसा ही जीवन बनता, जैसी धारा चिंतन की,
जो पर को समझ पाया है, वह खुद को समझ सकता है ॥२॥

शास्त्रों में सुने थे जैसे, देखे वैसे ही मुनिवर,
तेजस्वी परम तपस्वी, उपकारी मेरे गुरुवर ,
इनकी मृदु वाणी सुनकर, हर प्राणी सुधर सकता है ॥३॥

जैन भजन संग्रह के सभी भजन यहाँ पढ़ें: जैन भजन संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *