कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

श्री नन्दीश्वर द्विप आरती – Nandishwar Dweep Aarti Lyrics in Hindi

श्री नन्दीश्वर द्विप आरती

नंदीश्वर द्वीप पर स्थित 52 जिनालयों की महिमा गाने वाली यह आरती जैन भूगोल और भक्ति का अनूठा संगम है।

जय बावन जिन देवा, जय बावन जिन देवा |
आरती करूँ तुम चरणे-२ भवजल नदि न्हावा || जयदेव-२

प्रथमो जंबु द्वीप, घातकी वर बीजो-२ |
पुष्कर पूरव शोभित, पुष्कर वर त्रीजो || जयदेव-२ ||

चोथो वारूण द्वीप, पंचम क्षीरवर-२ |
छठ्ठो घृतवर शोभित, सप्तम इक्षुवर || जयदेव-२ ||

अष्टम शोभे द्वीप नन्दीश्वर नामा-२ |
प्रति दश तेरह अकृतिम जिन धामा || जयदेव-२ ||

अन्जम भूधर एक, दधिमुख नग्र चार-२ |
गज मति रविकर पर्वत, तेरह गिरि सार || जयदेव-२ ||

एवं चौदिशी बावन, पृथ्वी धर लम्बा-२ |
गिरिपति ज्येष्ठ जिनालय, मणिमय जिनबिम्बा || जयदेव-२ ||

शुभ अषाढे कारतक, फाल्गुन, सुदी पक्षा-२ |
इन्द्रादिक करे पूजा, अष्टानिक दक्षा || जयदेव-२ ||

अष्टम दिन थी मंडित, पूनम परियंता-२ |
जिनगुणसागर गावे, पावे सुव कांता || जयदेव-२ ||

जैन आरती संग्रह की सभी आरतियाँ यहाँ पढ़ें: जैन आरती संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *