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अमृत से गगरी भरो – Amrit Se Gagri Bharo Jain Bhajan Lyrics in Hindi

अमृत से गगरी भरो

अमृत से गगरी भरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे।
खुशी-खुशी मिल के चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे। टेक॥

सब साथी मिल कलश सजाओ, मङ्गलकारी गीत सुनाओ;
मन में आनन्द भयो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ।।१।। अमृत...

इन्द्र इन्द्राणी मिल हर्ष मनावें, प्रभु-चरणों में शीश झुकावें;
प्रभुजी की छवि निरखो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥२ ।। अमृत...

सुवर्ण कलश प्रभु उदकनि धारा, अङ्गे न्हावे जिनवर प्यारा;
स्वामी जगत को खरो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥३॥ अमृत...

हे सुखकारी सब दु:खहारी, सेवा जिनकी प्यारी-प्यारी;
लेकर ‘सरस’ को चलो, कि न्हवन प्रभु आज करेंगे ॥४॥ अमृत...

जैन भजन संग्रह के सभी भजन यहाँ पढ़ें: जैन भजन संग्रह (सम्पूर्ण सूची)

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