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डग्गा तिनताला गीत बघेली लोकगीत Dagga Teentaal Geet Bagheli Lokgeet

 दरश की तौ बेरा भई हो / बघेली डग्गा तिनताला गीत

दरश की तो बेरा भई हो
अरे बेरा भई महराज हो
दरस की तौ
दरस की तौ बेरा भई हो
और पट खोलो भैरोंनाथ हो
दरस की तो बेरा भई

झुलनिया तौ गौरा के सोहै हौ / बघेली डग्गा तिनताला गीत

झुलनिया तो गौरा के सोहै हौ
अरे गौरा के सोहै महराज हो
झुलनिया तो।
झुलनिया तो गौरा के सोहे हो
जेखे दांते बतीसी गोरे गाल हो
झुलनिया तो गौरा के सोहै हो

तेल लगावै नरिआर का / बघेली डग्गा तिनताला गीत

तेल लगावै नरिआर का
अरे हां हां तेल लगावै अरे नरिअर का
औ पाटी पारइ बनाय
धोती मंगावै अरे मलमल कै
या कहां कै छैलिनि आय
हुर जहा हा हा

ऊंची अटारी बरें दिअना / बघेली डग्गा तिनताला गीत

ऊँची अटारी बरें दिअना
सब सोवै मैं जागौं अकेल
सब सोवै में जागौं अकेल जियरा

जोगिनि लट धोइ डारा हो / बघेली डग्गा तिनताला गीत

जोगिनि लट धोइ डारा हो तोरे जूड़ा बसै कारे नाग
कर कांपे कि लिखनी डुगे कि अंग अंग फहरायं
सुधि आवत छाती फटै कि लिखि पाती ना जाय
जोगिनि लट धोइ डारा हो तोरे जूड़ा बसै कारे नाग


शैला मा शैला जुरै ना / बघेली डग्गा तिनताला गीत

शैला मा शैला जुरै ना
अरे हां हां शैला मा शैला अरे जुरै ना
कि जुरै ना ताल मा ताल
जोड़ी हमारा अस लसबैड़ा
जैसे कोलिनि कूटे पयार
हुर जहा हा हा

गोकुल मां बूड़े कन्हैया / बघेली डग्गा तिनताला गीत

गोकुल मां बूढ़े कन्हैया मथुरा उतरान
अरे हां भला गोकुला मा
अरे गोकुला उतरान
पूंछइं जसोमति मइया
मोरे लाला हेरान
काहे गोकुल मां बूढ़े कन्हैया
काहे मथुरा उतरान

गलता कै लहंगा रेशम की डोर / बघेली डग्गा तिनताला गीत

गलता कै लहंगा रेशम की डोर
पिया सारी लयाव
जौने कै लाल किनारी जौने कै लाल किनारी
पिया सारी मंगाव
पटना शहर कै सारी मंगाय दे
मिरजापुर कै किनारी
पिया सारी मंगाव - जौने कै लाल किनारी
सारी पहिरी कै चलौ मइकवा
तुहूं चला ससुरारी
पिया सारी मंगाव - जौने कै लाल किनारी।

गोविन्दगढ़ का अजब तलावा / बघेली डग्गा तिनताला गीत

गोविन्दगढ़ का अजब तलावा
मार बांधौ की बनी
किला इलाहाबादी
जहां गंगा बहीं

दाबे दौरिया जातीं हो नदिया / बघेली डग्गा तिनताला गीत

अरे हां इतैसे दधि लौ निकरी ग्वालिनिया
उइ आये उतै से भान-इतैसे दधि लै निकरी ग्वालिनिया

गोकुल मथुरा के बीच दही का
कीचा मचाय गा कान्हा

दाबे दौरिया जातीं हो नदिया
दाबे दौरिया जातीं लाल
ये यारन से बोलियाती
नदिया दाबे दौरिया जातीं लाल

दधि मथत जसोदा झूमि झूमि / बघेली डग्गा तिनताला गीत

दधि मथत जसोदा झूमि झूमि
दधि मथत जसोदा झूमि झूमि
लालन को मुंख चूमि चूमि
दधि मथत जसोदा झूमि झूमि
रितु ललित बसन्ती आवैं लगी
रितु ललित बसन्ती आवैं
ये हरे पात पियराय लगे
रितु ललित बसन्ती आवैं लगी
रितु ललित बसन्ती

ऊंच चउरवा चौखुट बाबा / बघेली डग्गा तिनताला गीत

ऊंच चउरवा चौखुट बाबा
ईंगुर ढारे बान हो मां
ओही चढ़ि बैठे राजा हो ए दशरथ
बैठि संवारे बान हो मां
बान संवारत रहि गये राजा
गड़ी अंगुरियन फांस हो मां
फांस रहइ तौ सरि गलि गै
पीर रही दस मास हो मां
केकई अउर कौशिला रानी
इं दुनौ पहरे जाय हो मां
केकरे पहरे सुख सोवइं राजा
केकरे पहर उसनींद हो मां
केकई के पहरे सुख सोवइं राजा
कौशिला पहर उसनींद हो मां
मांगु मांगु वर केकईं रानी
जौन तोरे मन होय हो मां
जउन वर हम मांगव राजा
दइ तुमसे ना जाइ हो मां
की तो लेबइ समुद्र का फेनुका
की ऊमर का फूल हो मां
बजउन मंगन तुम माग्या रानी
तउन नहीं संसार हो मां
फेरि मंगन तुम मांगा रानी
जउन तुम्हारे मन होय हो मां
जउन मंगन हम मांगव राजा
दइ तुमसे ना जाइ हो मां
चतुर भरत का राज लिखावा
राम लिखा बनवास हो मां

नई आई नारि खेलइ होरी / बघेली डग्गा तिनताला गीत

नई आई नारि खेलइ होरी
पहिलिनि होरी गया जी मां खेलइ
गया गजाधर की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी
दुसरी होरी गंगा जी मां खेलइ
गंगा जमुन की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी
तिसरी होरी बगइचा मा खेलइ
रामा लखन की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी
ये चौथी गोइड़वा मा खेलइ
टोला पड़ोसी की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी
पचइन होरी अगनवा मा खेलइ
देउरा भौजाई की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी
अरे छठई होरी सेजरिया मा खेलइ
सइया सवत की है जोड़ी
नई आई नारि खेलइ होरी

सात बहिनिया है देविया शारदा / बघेली डग्गा तिनताला गीत

सात बहिनिया है देविया शारदा कोउने का रचौ बिआह हो मां
बड़ी बहिनिया हैं देविया शारदा ओही का रचै बिआह हो मां
कउने दिना कै लगन लिखाये देव कौउने दिना कै बारात हो मां
दुइज परीवा कै लगन लिखायों नौमी केर बरात हो मां
के लख मांगइं डोलहा- बजनिहा के लख संगे बरात हो मां
नौ लख मांगइं डोलिहा- बजनिहा दस लख मांगइं बरात हो मां
आई बरात फरिकावा मेलइ घुमड़इं तबल निशान हो मां
दे माता मोरी छुरिया कटारिया देखि आऊं अपन बरात हो मां
या गांव कै कैसेन रितियां दुलहिन देखइं अपन बरात हो मां
उइं दुलहिनि या जान्या मोही जो दुलहा के संगे जाय हो मां
मड़ये तरी पगरैते मारउं दुलहे के रक्त नहांव हो मां

दइ टटिया निकरि चला हो / बघेली डग्गा तिनताला गीत

दइ टटिया निकरि चला हो
अरे निकरि चला महराज हो
दे टटिया निकरि चला हो
कौने माया मा अरझे हैं प्रान हो
दे टटिया निकरि चला

चलना-चलना सब कोउ कहैं हो / बघेली डग्गा तिनताला गीत

चलना चलना सब कोउ कहैं हो
अरे चलना हंसी नहि खेल हो
चलन कहै।
अरे चलना वही सराहिये
कि बाबा बोलाई बड़ी दूर से हो
चलन कहें।

साजा सिहाती मैं रहेउं मोरे लालन / बघेली डग्गा तिनताला गीत

साजा सिहाती मैं रहेउं मोरे लालन
मोरे साजन सेन्दुर मैं मांग
साजन होते चन्दन के पांसा
मैं घोटि चढ़उतिउं माथ
चन्दन रंगड़इ ये हां सबै रे मुनि चन्दन रगड़ै
ये नदिया पैसुनी के तीर सबै रे मुनि चन्दन रगड़े
मथुरा सांकर तोरी खोर मैं केसे दधि बेचन जइहौं
एक तौ जमुन दह गहरी जमुन दह गहिरी
दूजै आवइ हिकोर
कैसे दधि बेचन जइहौं मथुरा तोरी ओर
एक तौ कुंजन बन घन हैं कुंजन बन घन हैं
दूजै बोलइ पन्छी मोर
मथुरा तोरी खोर मैं कैसे दधि बेचन जइहौं
एक तौ सकर हैं गलियां संकर हैं गलियां
दूजइ घेरै माखन चोर
मथुरा तोरी खोर कैसे मैं दधि बेचन जइहौं।

सुन्दर फूल गुलाब का रे / बघेली डग्गा तिनताला गीत

सुन्दर फूल गुलाब का रे मोरे रउरे हां
अरे लीला लील न जाय
सो सुन्दर साजा पाइ के लालन
कि मोसे छाड़िउ छाड़ि न जाय
चुनरियां रंग छोड़े ये हां चुनरिया रंग छोड़े।
ये तुम ना छोड़ेउ मोरे सजना ये हां चुनरिया रंग छोड़े
मोरे अंगनइया मा फूलन की बहार है
बेला भी फूला चमेली भी फूली
सब फूलन मां राजा गुलाब है
मोरे अंगनइया मां फूलन की बहार है
तबला बाजै सरंगी रे बाजइ हां
सब बाजन मा राजा सितार रे
मोरी अंगनइया मां फुलन की बहार रे
जयपुर राजा है जोधपुर राजा है
सब राजन मां राजा रघुराज हैं
मोरी अंगनइया मा फूलन की बहार रे

पनही पहिरि चमाचम चन्दा / बघेली डग्गा तिनताला गीत

पनही पहिरि चमाचम चन्दा कन्धा मा डारे नोय
जेहि घर देखइ सुन्दर धनिया गौवइं दुहैं भिनसार
छाड़ि दे चन्दा बजनी पनहिया छाड़ि कन्धा के नीय
छाड़ि दे चन्दा गउवइं दुहाउब डाटत विदेशी लोग
ना हम छांड़ब बजनी पनहियां ना कांघा कै नोय
ना हम छोड़ब गोवैई दुहाउब काहे डाटत विदेशी लोग
सात बिआही नौ उढ़री सोरह सखी कुंवारि
एतने मा ना भावइ चन्दा गेल्ही लाउ उढ़ारि

भैसी निकरी भंवरकली से / बघेली डग्गा तिनताला गीत

भैसी निकरी भंवरकली से छाहुर लिहिन बेराय
दाम-दाम दे माता भैइसी बेसाहन जांव
मरि ना गये तै अहिर के बालक मरिउ न तोरे ज्ञान
छेरी भेड़ी का दाम नहीं घर तै भैइसि बेसाहन जाव
दाम दाम दे माता तै रे हीरा कनी भंजाव
उइं भइसी ना जान्या माता उनखे ठकुरौ लिखे लिलार
गांव का राजा बड़ा शिकारी मारइ सांभर मिरगी रोझ
लोट डबर से पड़िया निकरी राजन लेय बेराय
भूरी भूरी भंइसी चकही चकही सींग
वहै खोर नित निकरै लाग रजन कै लागइ डीठ
कहना कै तै अहिरा आहे काह नाव है तोर
धौ तो चरू ये घर की आही धौ तै तकै बड़खेर
गंगातीर केर अहिरा आहेन छाहुर नाम हमार
दूं तौ चरू आही घर कै बेढ़न जायं बड़खेर

घट छोड़ दे तिलंगवा भरौ गगरी / बघेली डग्गा तिनताला गीत

घट छोड़ दे तिलंगवा भरौ गगरी - घट छोडद्य दे
सोनेन गगरी रूपेन गोनरी - घट छोड़ दे तिलंगवां
घट छोड़ दे तिलंगवा भरौ गगरी घट छोड़ दे
ठाढ़े भरौ राजा राम देखत हैं
निहुरि भरौ मोर भीजै चुंनरी - घट छोड़ दे
घट छोड़ दे तिलंगवा भरौ गगरी - घट छोड़ दे
चांड़े रेंगों मोर छलके गगरिया
धीरे रेंगों घर रोवइ बलकवा - घट छोड़ दे
घट छोड़ दे तिलंगवां भरौ गगरी - घट छोड़ दे

कमल नयन जबसे गये / बघेली डग्गा तिनताला गीत

कमल नैन जब से गये तब से चित नहि चैन
व्याकुल जल बिन मीन है पल लागे नहि चैन

खबर न पायों श्याम की रहे मधुपुरी छाय
प्रीतम बिछुड़े प्रेम के कीजै कउन उपाय

उयं कुन्जैइ उंइं दु्रमलता उंइ पलास के पात
जा दिन ते बिछुड़े जदुनन्दन कोउ नहि आवत जात

बाल सोना तोहि मैं पालेउं / बघेली डग्गा तिनताला गीत

बाल सोना तोहि मैं पालेउं घिउ गुर दार चबाय
मइके केर संदेशवा दे ससुरे पहुंचाय
मैं तो आह्यों बन कै पन्छी नहि जानउं बोलइं बतायं
पठइ देउ तुम मन्नुख का करैं मुखागर बात
ना मोरे ढीमर बारी ना मोरे लगे कहार
तै तो आहे बन कै पंछी उड़ि आवत उड़ि जात
जाय लिखाय लाव पाती गोरी देहौं पिया के हाथ
काहेन कै मैं कागद बनाऊं काहेन कै मस लेउं
काहेन कै मैं लिखनी बनाऊं लिखौ पिया समुझाय
अंचल फारि कै कागद बनाय लेउ नैन कजल मस लेउ
भरूहर काटि तुम लिखनी बना लेउ लिखै पिया समुझाय

लपकि कै मारौ गुलेल तोरे पागा / बघेली डग्गा तिनताला गीत

लपकि कै मारौ गुलेल तोरे पागा मा
उलटि कै मारों गुलेल तोरी बेंदी मा
कठला लागै धिरिर तोरी तैती मा
भंवरा मांगे बसेर तोरी चोली मां
उलटि कै तोरा लालन केसरइया

सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना / बघेली डग्गा तिनताला गीत

सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना
उड़ि के मैना घुंघुट बैठे
घुंघटौं के दाबे दबाय गये मैना
सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना
उड़ि कै मैना बेसरि पर बैठे
झुलनिउ के दाबे दबाय गये मैना

सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना
उड़ि कै मैना बहुंटा पर बैठे
बाजू के दाबे दबाय गये मैना
सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना
उड़ि कै मैना कंगना पर बैठे
पहुंचिउ के दाबे दबाय गये मैना
सच्ची बोली बोल्या बघेले के मैना

बहियन मा गनेश जिभियन मां / बघेली डग्गा तिनताला गीत

बहियन मा गनेश जिभियन मां बैठी माई शारदा
घर आये मेहमान नहीं जननी कउन रे कहां के
बेंदी चमकै लिलार कजरा कै बड़ी ......आय
खूब मिला है इनाम जाबइ जहाँ तहाँ कहबै


Dagga Teentaal Geet Bagheli Lokgeet lyrics reciting women


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कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

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देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

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