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गारी गीत बघेली लोकगीत Gaari Gali Geet Lokgeet Bagheli Lyrics

 अंगने मोरे नीम लहरिया लेय / बघेली गारी गीत

अंगने मोरे नीम लहरिया लेय
अंगने मोरे हो
जहना कउन सिंह गाड़े हिडोलना
गाड़े हिडोलना
अरे उन कर दिद्दा हरसिया झूलि झूलि जायं
अंगने मोरे नीम लहरिया लेय अंगने मां
जहना कउन सिंह गाडे हिडोलना गाड़े हिडोलना
उन कर फूफू हरसिया झूलि झूलि जायं
अंगने मां नीम लहरिया लेय-अंगने मां


काटे कुटे पान लयाये / बघेली गारी गीत

काटे कूटे पान लयाये
खोखली सुपारी रे
बापौ पूत बिआहन आये
लंगड़ी महतारी रे


कहना रे सोन उपजै / बघेली गारी गीत

कहना रे सोन उपजै-कहना रे रूप उपजै
कहना रे उपजी है धेरिया लड़िल देई
मथुरा रे सोन उपजे-गोकुला रे रूप उपजे
माया की कोख उपजै लड़ेलि देई
लड़ेलिरी कै जज्ञ रोपइं हो
कहना रे उपजी है धेरिया लड़ेलिसी देइ
लड़ेलिरी कै जज्ञ रोपइं हो।


पहिली भंवरि फिरि आयउं बाबा / बघेली गारी गीत

पहिली भंवरि फिरि आयउं बाबा
अबहूं तुम्हारी हौं हो
दूसरी भंवरि फिरि आयउं आजी बहूं
अबहूं तुम्हारी हौं हो
तिसरी भंवरि फिरि आयउं बाबू
अबहूं तुम्हारी हौं हो
चौथी भंवरि फिरि आयउं भइया
अबहूं तुम्हारी हौं हो
पंचई भंवरि फिरि आयउं काका
अबहूं तुम्हारी हौं हो
छठई भंवरि फिरि आयउं नाना अबहूं
अबहूं तुम्हारी हौं हो
सतई भंवरि फिरि आयउं माया
अब मैं भयउं पराई हौं हो।


जौ रे हथिनिया मां हउदा कसा है / बघेली गारी गीत

जो रे हथिनिया मां हउदा कसा है
चढ़ि के चले चारिउ भाई
कि हां जिउ चढ़ि के चले चारिउ भाई
चढ़ि के चलेउ चारिउ भाई
जाई के पहुंचे जमुना जी के तीरे
कि मंुज मुंज करत मुखारी कि हां जिउ
मुंज मुंज करत मुखारी
कहरा कै लड़िका धोतिया लयावै
कि धोबिया के धोती पखारै कि हां जिउ
धोबिया के धोतिया पखारै
बंभना का लड़िका चन्दन गारइ
कि दुआदशी तिलक चढ़ाबै कि हां जिउ
दुआदशी तिलक चढ़ाबइ
जाइ के पहुंचे जनक जी के द्वारे
कि जेजम फरद बिछाई कि हां जिउ
जेजम फरद बिछाई
गोड़ धोवन का कोंपर मांगई
कि सहि जमुना ढरि आई कि हां जिउ
सहि जमुना ढरि आई
बस नहि आय कोऊ जौनहरी
कि राम जी का रचे ज्योनारि कि हां ज्यू
राम जी का रचे ज्योनारि
सुधर गई हां राधा औ रूकमिन
कि राम जी का रचै ज्योनार कि हां जिउ
राम जी का रचै ज्योनार
जिरिया के भात उइ रूचि रूचि रांधिनि
कि मुंगिया के दार बघारिन कि हां जिउ
मूंगिया के दार बघारिन
बरा और मुंगोरा दधिया मथि बोरिनि
कि रिकवछिं लौंग बघारिन कि हां जिउ
रिकवछ लोग बघारिन
मइदा के रोटी रूचिन से बेलिनि
कि घिउ सुरही का सुहाई कि हां जिउ जिउ सुरही
घिउ सुरही का सुहाई
कुंदुरूऔ करेला आलू औं भांटा
परवरि के तरकारी कि हां जिउ
परवरि के तरकारी अपना तो जेवइं
भरत जी के पूछइं कि कैसी लाला ज्योनारी
कि हां जिउ कैसी लाला ज्योनारी
चारिउ भाई जेवन बैठे
कि सखिया गावइं सब गारी
कि सखिया गावइं सब गारी कि हां जिउ
हम तो आहेन तीनउ लोक के ठाकुर
हमही न चाही ऐसी गारी कि हां जिउ
हमही न चाही ऐसी गारी
जो तुम आह्या तीनउ लोक के ठाकुर
काहे आया ससुरारी कि हां जिउ
काहे आया ससुरारी
कि हां जिउ


बेलनहाई गारी गीत

मथुरा मा लागी एक बजरिया / बघेली गारी गीत

मथुरा मा लागी एक बजरिया
कि मेंहदी आई बिकाय
जइहा देउरवा मेंहदी लैअइहा
रूपियै सेर विकाय
मेंहदी रचि गई कोइली परि गई
देखन वाले विदेश
काह फारि मैं कागद बनाऊं
काहिन कै मसि लेउं
ए जी काही बनाऊं मैं असल कइथवा
हरि जू का पाती लै के जाय
ए जी अचर फारि मैं कागद बनाऊं
नैनेन से मसि लेउजी
ए जी देउरा बनाऊं असल कयथवा
कि हरि जू का पाती लै के जाय

आंचर छोरि अंटारी मां चढ़ि / बघेली

आंचर छोरि अटारी मां चढ़ि गई तपै लागीं राम रसोई जी
जो सुधि आई अपने प्रभू जी के मरै विसूरि विसूरि जी
काहेन कै मैं कगदा बनाऊं काहेन कै मसि लेउं जी
आंचर फारि मैं कगदा बनाऊं नैनन कै मसियानी जी
अंगुरी काटि मैं कलम बनाऊं लिखि देउं दुइ दुइ बोल जी
कयथ बैटउना लहुर देवरवा वहै चिठिया लिखि देय जी
हरि जी का पाला है रे सुगना वहै चिठिया लै के जाय जी
लै कै चिठिया कदंब चढ़ि बैठा बोलै लाग बचन सुहात जी
ओही तरी हरि मोर पांसा जो खेलइ चिठिया गिरी छहराय जी
चिठिया जो बाचिनी मन मुसिकियाने असुवन की झरि लाग जी
दै हो साहेब हमरी नौकरिया आजु घरै हम जाब जू
आजु न देबइ काल्हि न देबइ परसों देबइ चुकाइ जी
अगिया लगै तोरे आजु औं काल्हिन बजुर परे तोरे परसों जी
दै देउं साहेब हमरी नौकरिया आजु घरे हम जाब जू
माया मोरी लाई बैठइ का पिल्हुड़िया बहिनी गंगा जल पानी जू
बहिनी तुहिन मोरी बहिनी गोरी धन देआ बताइ जी
तुम्हरी धनिया ताल गई ती होंई लगावै बड़ी देर जी
ताला के ईरे तीरे घोड़ कुदावें गोरी धना कतहूं न देखानी जी
बहिनी तुहिन मोरी बहिनी मोरी गोरी धना दे हो बताइ जी
तुम्हरिन धनिया कुंअना गई ती होई लगावैं बड़ी देर जी
कुंअना के ईरे तीरे घोड़िला कुदावैं गोरी धना कतहूं न देखानि जी
बहिनी तुहिन मोरी बहिनी मोरी गोरी धना दे हो बताइ जी
तुम्हरिन धनिया बागा गई ती बगिया लगावैं बड़ी देर जी
बागा के तरे तरे घोड़िला कुदावैं गोरी धना कहूं न देखानी जी
बहिनी तुहिन मोरी बहिनी मोरी गोरी धना दे हो बताइ जी
तुम्हारी धना नैहर गई ती होई लगावैं बड़ी देर जी
सारी देख्यों सरहज जो देख्यों गोरी धना कहूं न देखानी जी
बहिनी तुहिन मोरी बहिनी मोरी गोरी धना दे हो बताइ जी
आंचर छोरि अटारी मां चढ़ि गई तपैं लागी राम रसोई जी
जो सुधि आई अपने प्रभू जी की मरी बिसूरी बिसूरि जी


बारहमासी गारी गीत


उतरत सावन लागत भादौं आये न विरना तुम्हार हो
काहेन की तोरी माया बनी है काहेन के तोरे बाप हो
काहेन के तोरे भइया बने हैं आये न सावन मास हो
कठवन की तोरी माया बनी है पथरन के तोरे बाप हो
चन्दन विरूछ के तोरे भइया बने हैं आये न सावन मास हो
आवत देख्यौं सासु जी दुइ जन जोरवा एक सावर एक गोर हो
गोरे तौ आही मोर वीरन भइया सांवर ननंद जी के भाई हो
सासु दुआरे निमिया के विरवा ओहीतर उतरे विरना हमार हो
बैठा न मोरे भइया चन्दन पिढुलिया कहा नैहरवा की बात हो
तुम्हरे नैहरे बहिनि छेमिया कुशल है तुम बिन माया उदास हो
बैठा न मोरी बहिनी पाटे दुलइचा कहा ससुररिया की बात हो
सासु तो मोरे भइया मुहंहू न बोलैं ननंदी गरम गुमान हो
जेठनिया विरोगिन बोली जो बोलैं तुम्हरे भइया कुछहूं न लाये हो
एतना जो सुनिन है बीरेन भया रेंगि चले ओही पांव हो
घोड़वा के बाग धर रोवइ बहिनिया भैया तुम घाम नेवारउ हो
घाम रेवारब बहिनी बाग बगैचा और बबुल चौपार हो
ऊंची अंटरिया से भौजी निहारैं चली आंबई ननंदी हमार हो
छूछेन डड़िया छूछेन कहरिया रूठे हैं ननंदी के भाई हो
देअ न मोरी माया दौरी चंगेरिया बहिनी लेवावन जाब हो
निहुंरि निहुंरि बहिनी अंगना बटोरैं चिले आवैं बिरना हमार हो
सासु दुआरे निमिया के विरवा ओही तरे उतरे कहार हो
कहना उतारौ सासु दौरी चंगेरिया कहना भेटौउ अपना भाइ हो
अंगने उतारा बहू दौरी चंगेरिया भितर भेटी अपना भाइ हो
एक बन रेंगे दुसर बन रेंगे तिसरे मा नदिया और नार हो
सावन भादउ के बाढ़ी है नदिया उतरे हैं बहिनी ओ भाई हो
सींक चीर कै नइया बनाइन उतरे हैं बहिनी औ भाई हो
एक खेव खेइन दुसर खेउ खेइन तिसरे मा गये तरबोर हो
ससुरे मा बाजइ अनंद बधइया मइके मा रोवा होई हो
बरहे दिना जब ओसटी है जमुना निकरे हैं बहिनी ओ भाई हो
मइके मां बाजइ अनंद बधइया ससुरे मा रोवन होइ हो


Gaari Gali Geet Lokgeet Bagheli Lyrics


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 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...