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रघुवीर सहाय की कविताएँ : Raghuvir Sahay Ki Kavita

 परिचय रघुवीर सहाय (1929–1990) हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवि, लेखक और पत्रकार थे। वे नई कविता के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में आम आदमी का जीवन, सामाजिक विषमता, राजनीतिक व्यवस्था, सत्ता का चरित्र और लोकतांत्रिक समाज की विडंबनाएँ प्रमुखता से दिखाई देती हैं। उन्होंने सरल और बोलचाल की भाषा के माध्यम से अपने समय की सामाजिक और राजनीतिक सच्चाइयों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया। ‘लोग भूल गए हैं’, ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ और ‘हँसो हँसो जल्दी हँसो’ उनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में शामिल हैं। आधुनिक हिंदी कविता में रघुवीर सहाय का स्थान एक सजग और जनपक्षधर कवि के रूप में महत्वपूर्ण है। Raghuvir Sahay  किताब पढ़कर रोना रघुवीर सहाय रोया हूँ मैं भी किताब पढ़कर के पर अब याद नहीं कि कौन-सी शायद वह कोई वृत्तांत था पात्र जिसके अनेक बनते थे चारों तरफ़ से मँडराते हुए आते थे पढ़ता जाता और रोता जाता था मैं क्षण-भर में सहसा पहचाना यह पढ़ता कुछ और हूँ रोता कुछ और हूँ दोनों जुड़ गए हैं पढ़ना किताब का और रोना मेरे व्यक्ति का लेकिन मैंने जो पढ़ा था उसे नहीं रोया था पढ...

शमशेर बहादुर सिंह की कविताएँ : Shamsher Bahadur Singh Hindi Kavita

 Shamsher Bahadur Singh  परिचय शमशेर बहादुर सिंह (1911–1993) हिंदी के प्रमुख आधुनिक कवि और साहित्यकार थे। वे नई कविता के महत्वपूर्ण कवियों में गिने जाते हैं। उनकी कविताओं में प्रेम, सौंदर्य, प्रकृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक यथार्थ का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। शमशेर की भाषा में हिंदी और उर्दू का सुंदर मेल मिलता है, जिससे उनकी काव्य-शैली को विशेष पहचान मिली। उनकी कविता में चित्रकार जैसी सूक्ष्म दृष्टि और बिंबों की सुंदरता दिखाई देती है। ‘कुछ कविताएँ’, ‘कुछ और कविताएँ’ और ‘चुका भी हूँ नहीं मैं’ उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं। आधुनिक हिंदी कविता में शमशेर बहादुर सिंह का स्थान अत्यंत विशिष्ट है। टूटी हुई, बिखरी हुई शमशेर बहादुर सिंह टूटी हुई बिखरी हुई चाय की दली हुई पाँव के नीचे पत्तियाँ मेरी कविता बाल, झड़े हुए, मैले से रूखे, गिरे हुए, गर्दन से फिर भी चिपके ...कुछ ऐसी मेरी खाल, मुझसे अलग-सी, मिट्टी में मिली-सी दोपहर बाद की धूप-छाँह में खड़ी इंतज़ार की ठेलेगाड़ियाँ जैसे मेरी पसलियाँ... ख़ाली मेरी पसलियाँ... ख़ाली बोरे सूजों से रफ़ू किए जा रहे हैं... जो मेरी ...

अज्ञेय की कविताएँ : Agyeya Ki Hindi Kavita : Poems

Sachchidananda Hirananda Vatsyayan Agyega परिचय अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) (1911–1987) हिंदी के प्रमुख कवि, लेखक, संपादक और आधुनिकतावादी साहित्यकार थे। वे हिंदी की नई कविता के प्रमुख प्रवर्तकों में माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में व्यक्ति की स्वतंत्रता, आत्मचिंतन, प्रकृति, प्रेम और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने हिंदी साहित्य में प्रयोगधर्मिता को बढ़ावा दिया और ‘तार सप्तक’ का संपादन करके नई कविता के अनेक रचनाकारों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘शेखर : एक जीवनी’, ‘हरी घास पर क्षण भर’, ‘आँगन के पार द्वार’ और ‘कितनी नावों में कितनी बार’ शामिल हैं। आधुनिक हिंदी साहित्य में अज्ञेय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। अपने प्रेम के उद्वेग में अज्ञेय अपने प्रेम के उद्वेग में मैं जो कुछ भी तुमसे कहता हूँ,  वह सब पहले कहा जा चुका है। तुम्हारे प्रति मैं जो कुछ भी प्रणय-व्यवहार करता हूँ,  वह सब भी पहले हो चुका है। तुम्हारे और मेरे बीच में जो कुछ भी घटित होता है  उससे एक तीक्ष्ण वेदना-भरी अनुभूति मात्...