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महुअक गीत | Mahuak Geet Maithili Lokgeet Lyrics

 


महुअक रान्हल अछि भरि थार / महुअक गीत मैथिली


महुअक रान्हल अछि भरि थार

चारू कात लागल अछि सचार

रामजी महुअक करियौ, सीता संग जनकपुर मे

सखी बदल करै छी धार

सीता जीतथि रामक हार

राम जी महुअक करियौ, सीता संग जनकपुर मे

क्यो सखि मंगल गाउ

क्यो सखि बेनियां डोलाउ

रामजी महुअक करियौ सीता संग जनकपुर मे





मानु मानु ओझाजी हमरो के बात यो / महुअक गीत मैथिली


मानु मानु ओझाजी हमरो के बात यो

कोजगरे मे विदा कऽ देब, घड़ी साइकिल साथ यो

धान नहि उपजल झाजी, रबी के ने आस यो

दुइ चारि बेटी झाजी, भेलहुँ लचार यो

गछऽ काल मे गछि लेलहुँ, देबे काल ने भास यो

कोजगरे मे विदा कऽ देब, घड़ी साइकिल साथ यो

छोटकी जे सरि झाजी, अहीं के दान यो





आउ-आउ साजन आजु मोर अंगना / महुअक गीत मैथिली


आउ-आउ साजन आजु मोर अंगना

खीर परोसल धार, भोजन कऽ लिअ ना

सासु जे ठाढ़ छथि, औंठी नेने हाथ छथि

उठि ने सकब अहां, भोजन कऽ लिअ ना

ससुर जे ठाढ़ छथि, साइकिल नेने हाथ अछि

उठि ने सकब अहां, भोजन कऽ लिअ ना





दुलहा नहु नहु बाजू ने / महुअक गीत मैथिली


दुलहा नहु नहु बाजू ने, रूसल छी किए

आगा पाछा सारि सरहोजि, बीचमे विधिकरी

सोझां मे राखल अछि, महुअक केर दुइ थारी

दुलहा कनी-कनी खइयौने, रूसल छी किए

दूधक दाम सहित जोड़िकऽ, माय नेने छथि टाका

आब की मांगि रहल छी, की सिखा देने छथि काका

कनी हमरो दिस ताकू ने, रूसल छी किए

माथ लगैए चांेचा-खोता, मुँह लगैए टाड़ी

हमर कनियाँ अछि टुनमुनियां, देब आरो गारी

झट दए मूहो फोलू, रूसल छी किए





खीर परोसल थाली / महुअक गीत मैथिली


खीर परोसल थाली दुलहा जल्दी करियौ खाली यौ

माय अहाँ के तमोलिया संगे कचरय पान सुपारी यौ

बहिन अहाँ के सोनरा संगे पहिरै कानक बाली यौ

काकी अहाँ के मड़बड़िया संगे पहिरै साड़ी यौ

पीसी अहाँक पंजबिया संगे घूमथि गाड़ी गाड़ी यौ





खीर खाउ ने लजाउ / महुअक गीत मैथिली


खीर खाउ ने लजाउ सुनू चारू दुलहा

खीर खाउ ने

अहि खीरबा के बड़ बड़ गुनमा

जनती अहाँ केर मइया

खीर खाउ ने

अहि खीरबा के बाबू जनु करू अनादर

मड़बा पर चोर दशरथ रइया

खीर खाउ ने

अपना महल सऽ बहार भेली कौशिल्या

बंहियाँ पकडु दशरथ रइया

खीर खाउ ने

खीर खाउ ने लजाउ सुनू चारू भइया

खीर खाउ ने





बिनु अर्थक मनोरथ / महुअक गीत मैथिली


बिनु अर्थक मनोरथ पुरयबै कोना

ओ जे दरभंगा बजार

घड़ी भेटय हजार

बिनु टाका के घड़ी बेसाहबै कोना

बिनु अर्थक मनोरथ पुरयबै कोना

ओ जे मधुबनी बजार

साइकिल भेटय हजार

बिनु टाका के साइकिल बेसाहबै कोना

बिनु अर्थक मनोरथ पुरयबै कोना

ओ जे समस्तीपुर बजार

सूट बूट भेटय हजार

बिनु टाका के ओ सब बैसाहबे कोना

बिनु अर्थक मनोरथ पुरयबै कोना

कनक धार खीर पौरल, हुलसि हुलसि मधु ढारल हे

गौरी सऽ थार बदल करू बर सऽ परसि मांगू हे

विधिकरी बड़ होशियार झट दए आंचर पसारल हे

लगाओल लौंग अड़ांची दए पान से वर के खुआओल हे

बर बड़ा होशियार मुठियहि पान दबाओल हे

भनहि विद्यापति गाओल उचित बर गौरी पाओल हे





नगर मे पड़ल हकार पुकार / महुअक गीत मैथिली


नगर मे पड़ल हकार पुकार जनक ऋषिके

चलू सखि देखन जाहु नाथ रघुपति जी के

मंडिल निपब आजु पिठारक अरिपन

बैसलि जानकी साथ नाथ रघुपति जी के

खोआ दूध मिश्री दय डालल

भोजन करू शिव आज लाज नहि मानिय

भनहि विद्यापित गाओल फल पाओल

धन गौरी के भाग सुन्दर बर पाओल





मुदित लेलनि दहि चीनी / महुअक गीत मैथिली


मुदित लेलनि दहि चीनी

करू मधुपर्क ललन जी

भेटल फरके एकर गिन्नी

करू मधुपर्क ललन जी

फेरो ने आओत ई दिन कहियो

सासुर मे करू मधुपर्क

करू मधुपर्क ललन जी

माय अहाँक दूध कहियो ने पौरथि

मिथिला मे करू मधुपर्क

करू मधुपर्क ललन जी

सरहोजि सारि बीच मुसुकनि मनमा

जुनि करू लाज-विचार

करू मधुपर्क ललन जी





करय चलल हर मौहक हे / महुअक गीत मैथिली


करय चलल हर मौहक हे मानस घर हे

खीर खांड ते भाबनि करथि हर मौहक हे

भस्म पोटरिया हरि खोलल अंटकारि टोअल हे

भांग भिजाय भकोसथि करथि हार मौहक हे

कोनटा लागल मनाइनि गीतगाइनि हे

देखल हरक बेबहार, करथि हर मौहक हे





थारक भात सेरायल वर रूसल / महुअक गीत मैथिली


थारक भात सेरायल वर रूसल

गौरी गेली उठाबऽ करहु हर भोजन

आँख गुरड़ि वर ताकल गौरी के डांटल

आनु गऽ आंक धतुर करब हम भोजन

भनहि विद्यापति गाओल फल पाओल

धन गौरी के भाग, बताह बड़ पाओल





मनाइन इहो दूध आनल / महुअक गीत मैथिली


मनाइन इहो दूध आनल, खीर रान्हल

महुअक भेल तैयार, चीनी धय डालल

धारी भरि खीर पउरल, वर रूसल

करू गऽ भोजन आजु, लाज नहि मानिय


करू शिव भोजन आजु, लाज नहि मानिय

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

हे धन गौरी केर भाग, सुन्दर वर पाओल





महुअक करऽ वर चललाह / महुअक गीत मैथिली


महुअक करऽ वर चललाह, वर चललाह हे

दुनू दिस अरिपन जोड़ि, कन्या वर बैसाओल

खीरियो ने खाइ छथि सुन्दर वर, खिर केँटारय

कहियनु गऽ हे ससुर के, खीरियो ने खाइ छथि हे

खीर खाउ-खीड़ खाउ, सुन्दर वर हे महुअक करू हे

अँउठी जे देबनि गढ़ाय, सुन्दर वर करू महुअक हे

सासु ससुर के मनाओल हे, मोहर तोरि गढ़ाएब

ननुआ जमाए हे

भनहि विद्यापति गाओल, फल पाओल

धन गौरी केर भाग, सुन्दर वर पाओल


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Biyah Sa Diragaman Dharik Geet Maithili Lokgeet Lyrics


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