फेरों-कन्यादान का गीत / 10 / राजस्थानी गीत लोकगीत लिरिक्स - Feron Kanyadan Ka Geet 10 Rajasthani Geet Lokgeet Lyrics
डेरे से लौटते समय का गीत
सायब ऊंची सी मेडी रे रही, जठ दिवलो बल रे मंझिल,
कसूमल बीर बधावणे।
जठ जाय… पोड़ीया, ब्यान आईछ सुख भर निंद्र। कसूमल बीर बधावणो।
ब्यान जाय सायर दे जगाविया, सायब थे क्यें सूता नचीत जी। कसूमल बीर बधावणो।
बाई बनड़ी परणायर मेला सासर, गोरा जंवाई रा झेला नारेलजी। कसूमल बीर बधावणो।
गोरी क्यों कर मेला सागर, गोरी क्यों कर झेला नारेलजी। कसूमल बीर बधावणो।
गोरी हंस हंस मेला सासर, गोरी मूलकर झेला नारेल। कसूंमल बीर बधावणो।
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