कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

प्रभो अपने दरबार से अब न टालो बिन्दु जी भजन

 Bhajan Prabhu Apne Darbar SeAb Na Talo Bindu Ji Bhajan

प्रभो अपने दरबार से अब न टालो।
गुलामी का इकरार मुझसे लिखा लो॥
दीनानाथ अनाथ का भला मिला संयोग।
यदि तारोगे नहीं तो हँसी करेंगे लोग॥
है बेहतर कि दुनिया की बदनामियों से।
बचो आप ख़ुद और मुझको बचा लो॥
पशु निषाद खल भीलनी नीच जाति कुल कुल नाम।
बिना योग जप तप किए गए तुम्हारे धाम॥
ये जिस प्रेम के सिन्धु में जा रहे हैं।
उसी सिन्धु में ‘बिन्दु’ को भी मिला लो॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *