कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

कुछ अनोखा वो मेरे नन्द का लाला निकला बिन्दु जी भजन

 Kuch Anokha Wo MereNand Ka Lala Nikla Bindu Ji Bhajan 

कुछ अनोखा वो मेरे नन्द का लाला निकला।
जिसके उल्फ़त का हर एक रूप निराला निकला॥
क्यों न लेते भला वो इसको बड़े शौक के साथ।
उनकी हमशक्ल मेरा दिल भी तो काला निकला॥
इक नज़र में लूटी कुछ ऐसी मेरे दिल की दुकान।
हर तरफ़ ख़्वाहिशें दुनिया का ऐसा दिवाला निकला॥
अपनी चितवन के निशानात जो देखे उसने।
मेरा हर दागे जिगर नाज से पाला निकला॥
श्यामसुन्दर की न हो नज़रे इनायत क्यों कर।
जो कि दृग ‘बिन्दु’ भरा दर्द का प्याला निकला॥ 

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *