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बुन्देली बन्ना गीत | Bundeli Banna Geet Lyrics (Lokgeet)

 आज जनकपुर ब्याह सखी री / बुन्देली बन्ना गीत

सीता के चढ़त चढ़ाये,
अवधपति ब्याहन को आये।
सुरहन गौ को गोबर मंगाओ,
ओई से अंगना लिपाये।
अवधपति ब्याहन को आये। सीता...
सोने के पाटा में सीता जी बैठीं
मुतियन चौक पुराये।
अवधपति ब्याहन को आये। सीता...
ठांड़े जनक मन में मुस्काये
समरथ के नात हम पायें,
अवधपति ब्याहन को आये। सीता...
जनकपुर में मंगल छाये, सब के मन हर्षाये।
अवधपति ब्याहन को आये। सीता...

आज भोले बाबा को ब्याह रचो है / बुन्देली बन्ना गीत


आज भोले बाबा को ब्याह रचो है।
आज भोले बाबा...
कैसे-कैसे बराती हैं आये
कैसे-कैसे साज सजो है। आज...
भूत पिशाच बराती हैं आये
नारद वीणा को साज सजो है। आज...
शंकरजी की बैला सवारी
डम-डम डमरू कैसो बजो है। आज...
गिरजा जी तो खुशी भईं हैं
जनम-जनम को साथ मिलों है। आज...

इन गलिन हो के लइयो री / बुन्देली बन्ना गीत


इन गलिन हो के लइयो री,
रघुनाथ बन्ना खों।
मोर मुकुट सिर बांधौ राजा बनरे,
कलगिन साज सजइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।
कानन कुण्डल पैरों राजा बनरे,
झेलन साज सजइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।
छतियन बागौ पैरों राजा बनरे,
पनरस साज सजइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।
हांथन घड़िया बांधो राजा बनरे,
कंगन साज सजइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।
पांवन मौजा पैरों राजा बनरे,
माहुर साज सजइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।
इन गलिन हो कें लइयो री।
रघुनाथ बन्ना खों।

ककड़ी मत मारो हरियाले / बुन्देली बन्ना गीत


कंकड़ी मत मारो हरियाले
नीली घोड़ी बिचक रही हैं
माथे बन्ना के शेहरा सोहे
कलगी उसकी चमक रही है। कंकड़ी...
कानों बन्ना के कुण्डल सोहे
झेले उसके चमक रहे हैं। कंकड़ी...
हाथों बन्ना के कंगन सोहे
घड़ियां चमक रही हैं। कंकड़ी...
संग बन्ना के जोड़ी सोहे
डोली उसकी चमक रही है। कंकड़ी

छूटौ री मोरी गुइया जनकपुर / बुन्देली बन्ना गीत


छूटौ री मोरी गुइयां जनकपुर
अवधपुरी को लये जात हैं,
लक्ष्मणजी के भैया। जनकपुर छूटौ...
राजा जनक से बाबुल छूटे,
रानी सुनैना सी मैया छूटीं
लक्ष्मी निधि से भैया छूटे,
ऋद्धि सी भोजइया। जनकपुर...
मिल लो री सब सखी सहेली,
अब मिलने को नैयां। जनकपुर...
छूटौ री मोरी गुइयां जनकपुर

जगाय लाओ सखी बन्ना सोवत अटरिया / बुन्देली बन्ना गीत


जगाय लाओ सखी बन्ना सोवत अटरिया
मोर मुकुट सिर बांधो राजा बनरे,
कलगिन बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगत नजरिया जगाय...
माथे खौरें काढ़ो राजा बनरे,
टिपकन बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगे न नजरिया। जगाय...
झेलन बीच अनार की कली,
कचनार की कली, सखी लगे न नजरिया
कण्ठन गूंजे पैरों राजा बनरे,
गोपिन बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगे न नजरिया। जगाय...
अंगे बागो पैरों राजा बनरे,
पनरस बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगे न नजरिया। जगाय...
हांथन घड़िया बांधो राजा बनरे,
कंगन बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगे न नजरिया। जगाय...
पांवन मोजा पैरों राजा बनरे,
माहर बीच अनार की कली, कचनार की कली,
सखी लगे न नजरिया। जगाय...

जनक जी सत्य प्रतिज्ञाकारी / बुन्देली बन्ना गीत


जनक जी सत्य प्रतिज्ञाकारी
मिथिलापुर में रचो स्वयंवर,
भयो शोर जग भारी। जनकजी...
देश-देश के जुरे महीपति,
अमित तेज बलधारी। जनकजी...
राजसमाज कुंअर दोऊ आये,
लखि मोहे नर नारी। जनकजी...
राउं सहस दस चाप चढ़ावें,
तिल भर टरे न टारी। जनकजी...
बैठे देख महीपति हारे,
भये मिथलेश दुखारी। जनकजी...
रानी सुनैना व्याकुल सिय लखि,
उठे राम धनुधारी। जनकजी...
गुरु को कर प्रणाम मन ही मन,
दृष्टि चाप पे डारी। जनकजी...
कंचन कुंअरि निमिष महुं टोरयो,
जय धुनि सुरन उचारी।
जनक जी...

जे कौशिल्या के जाये री सखी रूप सलोना / बुन्देली बन्ना गीत



जे कौशिल्या के जाये री, सखी रूप सलोना
धन्य-धन्य इन माता कौशिल्या,
जिनने जे सुत जाये री। सखि रूप सलोना
धन्य-धन्य उन राजा दशरथ खों,
जिनके लाल कहाये री। सखि रूप सलोना
धन्य-धन्य उन माता कैकेयी खों,
जिनने पालना झुलाये री। सखि...
धन्य-धन्य उन राजा जनक खों,
जिन घर ब्याहुन आये री। सखि...
धन्य-धन्य उन बारी सिया खों,
जिनने जे बर पायेगी। सखि...
धन्य-धन्य उन सब सखियन खों,
जिनने मंगल गाये री। सखि...

देखो सखी छवि राम बन्ना की / बुन्देली बन्ना गीत


देखो सखी छवि राम बन्ना की
माथे मौर खौर केसर की,
कजरारी अंखियन सुरमा की। देखो...
श्याम गात केसरिया बागो,
कानन कुण्डल कर कंगना की। देखो...
ब्याह विभूषण राजत अंगन,
शोभा हरन नैन मद बांकी। देखो...
कंचन कुंअरि कहां लग बरनौ,
बाकी अजब झरोखन झांकी।
देखो सखी छवि राम बन्ना की।

बने है बन्ना गणपति देवा / बुन्देली बन्ना गीत


बने हैं बन्ना गणपति देवा,
बने हैं बन्ना गणपति देवा
जिनखों प्रिय हैं, मोदक मेवा। बने हैं...
मां तो पार्वती हैं इनकी
पिता तो इनके हैं महदेवा। बने हैं...
ऋद्धि-सिद्धि घर ब्याहन जायें।
ब्रम्हा विष्णु और महदेवा। बने हैं...
नारद वीणा बजावत आयें
फूले नहीं समायें महदेवा। बने हैं...

बन्ना तो मेरा चाद सा / बुन्देली बन्ना गीत

बन्ना तो मेरा चांद सा,
लग जाये नजरिया ना
बन्ना की माया दौड़ी आई,
काजल टीका लगाई बन्ना,
लग जाये नजरिया ना। बन्ना...
बन्ना की भाभी दौड़ी आई
राई नौन उतारी,
लग जाये नजरिया ना। बन्ना...
बन्ना की बहिना दौड़ी आई,
झट से आरत उतारी,
लग जाये नजरिया ना। बन्ना...
सखियां मिलके बन्ना गावें,
फूलों से करती बौछारें।
लग जाये नजरिया ना। बन्ना...

बन्ना धीरे चलो ससुराल गलिया / बुन्देली बन्ना गीत

बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियां
बन्ना सेहरा संभालेंगी सब सखिया।
जिनके लम्बे-लम्बे हाथ हरीली चुड़ियां। बन्ना...
जिनके कुण्डल संभालेंगी वही सखियां।
जिनके लम्बे-लम्बे हाथ हरीली चुड़ियां। बन्ना...
बन्ना बागों संभालेंगी बोई सखियां
जिनके लम्बे-लम्बे हाथ हरीली चुड़ियां। बन्ना...
बन्ना डोली संभालेंगी बोई सखियां
जिनके लम्बे-लम्बे हाथ हरीली चुड़ियां। बन्ना...

ब्याह के आये अवध नगरिया / बुन्देली बन्ना गीत

ब्याह के आये अवध नगरिया
अवध नगरिया, अवध नगरिया। ब्याह के...
खुशी भये हैं सब नर नारि
नाचै दे दे तारी। ब्याह के...
पंडित गुरू मुनि वेद उचारे
फूलों से करती बौछारें। ब्याह के...
माता कौशिल्या सुमित्रा कैकेयी
आरत उतारे तीनों मैया। ब्याह के...
राम लक्ष्मण भरत शत्रुघन
खुशी भये हैं चारों भैया। ब्याह के...
हीरा मोती लुटायें राजा दशरथ
और लुटायें रुपैया। ब्याह के...

ब्याहन आ दोऊ कुअर जनकपुर / बुन्देली बन्ना गीत

ब्याहन आए दोऊ कुंअर जनकपुर
धन्य-धन्य भाग्य तुम्हारे राजा दशरथ,
जिनने जे सुत पाये री हां कुंअर। जनकपुर...
धन्य-धन्य भाग्य तुम्हारे कौशिल्याजी,
जिनने गोद खिलाये री हां कुंअर। जनकपुर...
धन्य-धन्य भाग्य तुम्हारे सियाजी,
जिनने जे वर पाये री हां कुंअर। जनकपुर...
धन्य-धन्य भाग्य अवधवासिन के,
जिनने दर्शन पाये री हां कुंअर। जनकपुर...

भावे री बन्ना राम सलौना / बुन्देली बन्ना गीत


भावे री बन्ना राम सलौना
श्यामली सूरत माधुरी मूरत
चितवन में सखी डारत टोना। भावे री...
ब्याह विभूषण सोहत सुंदर,
देखि रूप छवि बरन सकों ना। भावे री...
जनक नगर में कहर मचो है,
भूले पलक-ललक सुख सोना। भावे री...
कंचन कुंअरि बन्ना दशरथ को,
मो जीवन धन जगत निरौना। भावे री...

मोरी बन्नी नादान आजुल जी से अरज करे / बुन्देली बन्ना गीत


मोरी बन्नी नादान, आजुल जी से अरज करें
मोको ऐसे घर दिया महाराज,
जहाँ बेटी राज करे। मोरी...
जहाँ ब्राम्हण तपत रसोईं,
कहार जहाँ पानी भरे। मोरी...
मोरी झूलों की झूलनहारी,
कटौरन दूध पिये। मोरी...
मोरी रुपयों की परखनहारी,
भुहरों का मोल करे। मोरी...
मोरी छज्जे की पोड़नहारी,
झरोखन बाव ढरे। मोरी...

राजा दशरथ फूले न समाय / बुन्देली बन्ना गीत


राजा दशरथ फूले न समाय,
लगुन आई मोरे अंगना।
आजुल फूले, आजी फूलीं, फूला सब परिवार।
बन्ना मेरा ऐसा फूला, जैसे फूले गुलाब।
लगुन आई मोरे अंगना।
माया फूली बाबुल फूले, फूला सब परिवार।
बन्ना मेरा ऐसा फूला, जैसे फूले गुलाब।
लगुन आई मोरे अंगना।
मामा फूले मामी फूली, फूला सब परिवार।
बन्ना मेरा ऐसा फूला, जैसे फूले गुलाब।
लगुन आई मोरे अंगना
जीजा फूले जीजी फूली, फूला सब परिवार।
बन्ना मेरा ऐसा फूला, जैसे फूले गुलाब।
लगुन आई मोरे अंगना।

रानी कौशिल्या के ललना / बुन्देली बन्ना गीत


रानी कौशिल्या के ललना,
सुधर बन आये ललना।
शीश पे सोहे कंकरेजी चीरा
कैसे लगे हैं फुंदना। सुधर...
तैंतीस कोटि बराती आये,
राजा जनक के अंगना। सुधर...
रूप रंग सब मोह लिये है,
मणि माणिक लगे कंगना। सुधर...
तन सोहे केसरिया जामा,
सखियां गावें बन्ना। सुधर...

लये धनुष बन्ना ठाड़े री / बुन्देली बन्ना गीत


लये धनुष बन्ना ठांड़े री,
कोई जोड़ी तो मिलाय लो।
माथे मोहर बांधो राजा बनरे,
कलगी संवारे सिया जानकी
कोई जोड़ी तो मिलाय लो। लयें...
नैनन सुरमा आंजो राजा बनरे,
भौंहें संवारे सिया जानकी
कोई जोड़ी तो मिलाय लो। लयें...
मुख भर बिरियां चावो राजा बनरे
लाली संवारे सिया जानकी
कोई जोड़ी तो मिलाय लो। लयें...
अंगे जामा पेरों राजा बनरे,
पनरस संवारे सिया जानकी
कोई जोड़ी तो मिलाय लो। लयें...
पांवो जूता पेरों राजा बनरे,
मौजा संवारे सिया जानकी
कोई जोड़ी तो मिलाय लो। लयें...

शहजादी बन्नी लाड़ली फुलबगिया घूमन गयी आज / बुन्देली बन्ना गीत


शहजादी बन्नी लाड़ली, फुलबगिया घूमन गयी आज।
आजा जी उनके वर ढूड़न निकले
शहजादी बन्नी घर चलो,
दरवाजे पे सजी है बारात। शहजादी...
बाबुल जी उनके वर ढूड़न निकले।
शहजादी बन्नी घर चलो, दरवाजे पे सजी है बारात।
चाचाजी उनके वर ढूड़न निकले,
शहजादी बन्नी घर चलो, दरवाजे पे सजी है बारात।
भैया जी उनके वर ढूड़न निकले,
बन्नी घर चलो, दरवाजे पे सजी है बारात।
मामाजी उनके वर ढूड़न निकले,
बन्नी घर चलो, दरवाजे पे सजी है बारात।


श्याम तेरी नजरिया जादू करे / बुन्देली बन्ना गीत


श्याम तेरी नजरिया जादू करे।
तिरछी तकन तीर सी लागे,
नर नारिन बेहाल करे। श्याम...
सिर पर ताज, जुल्फ घुंघरारी,
मोहन माला गुंज गले। श्याम...
श्यामल गात केसरिया जामा,
श्रवणन कुण्डल मुख परे। श्याम...
कुंचन कुंअर देखि छवि मूरत,
नासामणि मोरे प्राण हरे। श्याम...

सखि आये है अवधकुमार / बुन्देली बन्ना गीत


सखि आये हैं अवधकुमार
मिली है शुभ घड़िया।
पचरंग पाग पे मोर सुहावे,
सेहरे पे छाई बहार,
मिली है शुभ घड़िया। सखि...
कानों में कुण्डल हाथ में कंगन,
गले में मुतियन हार,
मिली है शुभ घड़िया। सखि...
श्याम गात केसरिया जामा,
गोटा लगे हैं किनार,
मिली है शुभ घड़िया। सखि...

सखी आज कैसी मनोहर घड़ी है / बुन्देली बन्ना गीत


सखी आज कैसी मनोहर घड़ी है,
गले राम जयमाल सुंदर पड़ी है।
कलियों में कलियाँ और लड़ियों में मोती
चमकती वो शेहरे की पंखुड़ी है। सखी...
जरा बांध दो कोई नौसे का सेहरा,
लये रंगभूमि में मालिन खड़ी है। सखी...
मिले हर लड़ी पे हमें सौ असर्फी
इसी बात पे आज मालिन अड़ी है। सखी...
नहीं आज फूला समाता अवधपुर
खुशी आज रानी कौशिल्या बड़ी है। सखी...
भई आज शादी सियाराम जी की
खुशी आज राजा जनक को बड़ी है। सखी...

सखी बन्ना लख आई / बुन्देली बन्ना गीत


सखी बन्ना लख आई,
मेरे नैनों से छवि नहिं जाए।
सिर शोभित सोने को सेहरा,
फंुदरी रतन जड़ाय। मेरे नैनों से...
चंदन खौर जुल्फ घुंघराली,
अंजन नयन सुहाय। मेरे नैनों से...
चितवनि बान चलावत मोहिसे,
मारे मृदु मुस्काय। मेरे नैनों से...
कंचन कुंअरि सिया वर प्यारो,
लै गये चित्त चुराय। मेरे नैनों से...
सखी बन्ना लख आई,
मेरे नैनों से छवि नहिं जाए।

सीता के चढ़त चढ़ाये / बुन्देली बन्ना गीत


भोला खों देख ना सुहानी
खड़ी रोवें आज मैना रानी।
अपने जियत बेटी इनखों न ब्याहो
ये तो भले भोला दानी।
खड़ी रोवें आज मैना रानी।
ऐसी बरात कभऊं देखे हम नैयां
लड़का महरिया डरानी।
खड़ी रोवें आज मैना रानी।
बेटी उमा तुमने कहना ना मानो
ऐसन खों तप करवे ठानी।
खड़ी रोवें आज मैना रानी।
पूरब जनम जो लिख दओ विधाता
बा ना टरे तुम हो सयानी।
खड़ी रोवें आज मैना रानी।

सुकुमार प्यारी बन्नी धीरे चलो सुकुमार / बुन्देली बन्ना गीत


सुकुमार प्यारी बन्नी, धीरे चलो सुकुमार
माथे बन्नी के बेंदी भी सोहे,
झूमर को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे...
कानों बन्नी के कुण्डल सोहे,
झुमका को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे...
गले बन्नी के हरवा सोहे,
लाकेट को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे...
हाथ बन्नी के कंगन सोहे,
चूड़ी को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे...
पांव बन्नी के पायल सोहे,
बिछिया को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे...
संग बन्नी के बन्ना भी सोहे,
जोड़ी को लेना संभाल, संभाल प्यारी बन्नी। धीरे


सुकुमार सिया प्यारी / बुन्देली बन्ना गीत


सुकुमार सिया प्यारी,
धीरे चलो सुकुमार।
देश-देश के भूप जुरे हैं,
कर-कर के अपनो शृंगार,
शृंगार सिया प्यारी। धीरे चलो...
कंकन किंकिन नूपर धुन-सुन,
त्रिभुवन की झंकार। धीरे चलो...
राजा जनक की कुंवारी है कन्या,
अति कोमल सुकुमार,
सुकुमार सिया प्यारी।
ले वर माला राम गले डाली,
हो रही है जय-जयकार,
जयकार सिया प्यारी।

सो गये सीताराम चलो सखि / बुन्देली बन्ना गीत


सो गये सीताराम चलो सखि
कंचन महल पलंग जड़ित मणि,
सुन्दर सेज मुलायम। चलो सखि...
प्रीतम प्रिया प्रेम युत पोड़े,
कृपासिंधु सुखधाम। चलो...
जुगल स्वरूप अनूप रूप लखि,
मोहित भये रति राम। चलो...
जिन-जिन ध्यान कियो प्रभु पद नित,
तिन-तिन अमृत अराम। चलो...
वंश गोपाल गोपाल लाल छवि,
निरखत आठों धाम। चलो सखि...

हा हा रे मेरा अच्छा बन्ना देखो री मेरा प्यारा बन्ना / बुन्देली बन्ना गीत


हां हां रे मेरा अच्छा बन्ना, देखो री मेरा प्यारा बन्ना।
सारे बराती पैदल आये, हाथी के हौदे पे आया बन्ना।
हरियाला बन्ना, शहजादा बन्ना, हां हां रे मेरा प्यारा बन्ना।
सारे बराती तारे से चमके, चन्दा सा चमके मेरा बन्ना।
हरियाला बन्ना, शहजादा बन्ना, हां हां रे मेरा प्यारा बन्ना।
सारे बराती रुपया लाये, मोहरे असर्फी लाया बन्ना।
हरियाला बन्ना, शहजादा बन्ना, हां हां रे मेरा प्यारा बन्ना।
सारे बराती नीचे सोये, लाल पलंग पे बन्ना।
हरियाला बन्ना, शहजादा बन्ना, हां हां रे मेरा प्यारा बन्ना।
हां हां रे मेरा अच्छा बन्ना, देखो री मेरा प्यारा बन्ना।
हरियाला बन्ना, शहजादा बन्ना, हां हां रे मेरा प्यारा बन्ना।


 


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कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...