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Bundeli Dadre Geet Lokgeet Lyrics बुन्देली दादरे गीत लोकगीत लिरिक्स

सुनो री जीजी जीजा कौ बिलैया लै गई टार कै / बुन्देली दादरे गीत


सुनो री जीजी जीजा कौ बिलैया लै गई टार कै।
अरतन ढूँढो बरतन ढूँढो सो हड़िया में ढूँढो चमचा डार के। सुनो री...
मटका में देखो घिनोचिन देखो सो नरदा में देखे पानी डार कैं। सुनो री...
छत्तन देखे अटारी में देखे सो चकिया में देखे छन्ना झार कै। सुनो री...
आरे में देखे टिपारे में देखे सो तक्का में देखे बेड़ो डार के।
झाँसी में देखे लश्कर में देखे तो देख लिये सारे बाजार में। सुनो री...
इड़ियन देखे छिड़ियन देखे सो हमने देखे मोटर कार में।

मेरे दस्ते की कील मिलेगी कैसे / बुन्देली दादरे गीत


मेरे दस्ते की कील मिलेगी कैसे
बाहर ससुरा लड़े अन्दर सासो लड़े
सेजा सैंया भी लड़े मेरी कदर नहीं
ललना गोद भी नहीं जिसकी आस करूँ
पैसा पास भी नहीं जहर खायके मरूँ
अँगना कुअला भी नहीं जिसमें डूब मरूँ। मेरे दस्ते

राजा जी की चाल बता गऔ देवरिया / बुन्देली दादरे गीत



राजा जी की चाल बता गऔ देवरिया।
बेदी ले आओ बड़े भोर लगा ले भौजइया।
असमानी रंग है चोली बाकी तंग है
तीन वा तिरंगा झंडा काली बाके संग है। राजाजी की...
हार ले आओ बड़े भोर पहिर लै भौजइया। राजाजी की...
कंगन ले आओ बड़े भोर पहिर लै भौजइया।
असमानी रंग है चोली बाकी तंग है
तीन व तिरंगा झंडा काली बाके संग है। राजाजी की...
करधनी ले आओ बड़े भोर पहिर लै भौजइया। राजाजी की...
पायलिया ले आओ बड़े भोर पहिर लै भोजइया। राजाजी की...
असमानी रंग है चोली बाकी तंग है
तीन वा तिरंगा झंडा काली बाके संग है। राजाजी की...

रोये रोये नैना बिगारे बलम कजरौटी न ल्याये / बुन्देली दादरे गीत



रोये रोये नैना बिगारे बलम कजरौटी न ल्याये।
ठंडौ री पानी गरम कर ल्याई सपरत में समझाये।
बलम कजरौटी न ल्याये।
ताती जलेबी दूदा लडुआ ल्याई सो जेवत में समझाये।
बलम कजरौटी...
झंझन झारी गंगा जल पानी सो पीवत में समझाये। बलम...
पाना पचासी कौ बीड़ा लगाओ चावत में समुझाये। बलम...
नौरंग पलका बिछे सोने पाये पौढ़त में समुझाये। बलम...

अटरिया चढ़ गई रे भई बदनाम / बुन्देली दादरे गीत


अटरिया चढ़ गई रे भई बदनाम।
पैली सीढ़ी जब चढ़ी दूजौ रिपटो पाँव।
लाजन मर गई रे भई बदनाम। अटरिया...
तीजी सीढ़ी जब चढ़ी चौथें रिपटो पाँव,
लाजन मर गई रे भई बदनाम। अटरिया...
पाँचई सीढ़ी जब चढ़ी छँठई रिपटो पाँव,
लाजन मर गई रे भई बदनाम। अटरिया...
सातई सीढ़ी जब चढ़ी आँठई रिपटो पाँव,
लाजन मर गई रे भई बदनाम। अटरिया...
नौंवी सीढ़ी जब चढ़ी गोरी उजागर हो गई रे,
लाजन मर गई रे भई बदनाम। अटरिया...
पाँच रूपैया मृगा कौ माँगे औ दस माँगे कुतवाल,
मैं लाजन मर गई रे।

नन्हीं सी बुंदिया देख कै भीजन चली आई औ बलमा / बुन्देली दादरे गीत



नन्हीं सी बुंदिया देख कै भीजन चली आई औ बलमा।
मेरा उड़न खटोला ओ बलमा।
सावन रित आई ओ बलमा,
तेरी रंग पलकिया देख कै झूलन चली आई ओ बलमा
मेरा उड़न खटोला ओ बलमा।
सरदी रित आई ओ बलमा।
तेरी लाल रजइया देख कै सोवन चली आई ओ बलमा। मेरा उड़न...
फागुन रित आई ओ बलमा
तेरी रंग पिचकारी देख कै खेलन चली आई ओ बलमा। मेरा...
गर्मी रित आई ओ बलमा
तेरी लाल बिजनिया देख कै इव डोलन चली आई ओ बलमा।
मेरा उड़न खटोला ओ बलमा।

हमसें बलम सें ऐसी बिगरी / बुन्देली दादरे गीत


हमसें बलम सें ऐसी बिगरी
मोरी कतरी सुपारी न खायें।
सोने की थारी में जेवनार परोसा
हमसें बलम सें ऐसी बिगरी
वे तो जेवै बहना घर जायें।
चाँदी के लोटा में पानी परोसो
हमसें बलम सें ऐसी बिगरी
वे तौ पीवे बुआ के घर जायें।
हमसें बलम सें ऐसी बिगरी
मोरी कतरी सुपारी न खायें।
पाना पचासी कौ बीरा लगायौ। हमसें...
वे तो चावन तमोलिन के घर जायें।
फूलों की सेज मोती झालर कौ तकिया
हमसें बलम सें ऐसी बिगरी
वे तो सोवै सोतन घर जायें।

अनबोले रहो न जा ननद बाई / बुन्देली दादरे गीत


अनबोले रहो न जाए ननद बाई,
बीरन तुम्हारे अनबोला।
अरे हां रे ननद बाई,
कैसे के बीरन तोरे बोलिहैं,
अरे कैसे जतन करो आज ननद बाई।
अरे हां रे भौजइया,
गैया दुहाऊं जब तुम जैहों,
उते बछरा खों दियो छोड़ हो भौजी...
बीरन हमारे तबई बोलें
अनबोले रहो न जाए...

इन भोदू के भाग्य मे बदी न लुगाई / बुन्देली दादरे गीत


इन भोंदू के भाग्य में बदी न लुगाई,
मैं कैसी करों माई।
दौड़े-दौड़े गये कुम्हरा नों हां गये कुम्हारा नों,
मट्टी की औरत बनाओ मेरे भाई।
मैं कैसी करों माई।
वा औरत लया के, छज्जे पे धर दई
नीचे गिरी सो फूट गई लुगाई। मैं कैसी...
दौड़े-दौड़े गये मिठया नों,
शक्कर की औरत बनाओ मोरे भाई। मैं कैसी...
वा औरत लया के अंगना में धर दई,
पानी परो सो घुल गई लुगाई। मैं कैसी...
दौड़े-दौड़े गये बजरा नों,
कागज की औरत बनाओ मोरे भाई। मैं कैसी...
वा औरत ल्याके छज्जे पे धर दई,
आंधी चली सो उड़ गई लुगाई। मैं कैसी...

कहा गिरी राम जाने माथे की बिदिया / बुन्देली दादरे गीत


कहां गिरी राम जाने, माथे की बिंदिया
कहां गिरे कंगना, कहां गिरी किलिया,
कहां गिरी राम जाने माथे की बिंदिया।
अंगना गिरे कंगना, पौर गिरी कलिया,
सेज गिरी राम जाने माथे की बिंदिया।
किसे मिला कंगना, किसे मिली किलिया,
सेज गिरी राम जाने माथे की बिंदिया।
सास मिले कंगना, ननद मिली किलिया,
सजन मिली माथे की बिंदिया।
कैसे लाऊँ कंकन, कैसे लाऊँ किलिया,
कैसे लाऊँ राम जाने माथे की बिंदिया।
लड़के लाऊं कंगना, झगड़के लाऊं किलिया,
हंसके लाऊं राजा जी से माथे की बिंदिया। कहां गिरी...

गयो-गयो रे सास तेरो राज जमाना आयो बहुअन का / बुन्देली दादरे गीत


गयो-गयो रे सास तेरो राज, जमाना आयो बहुअन का।
सास बिचारी चक्की पीसे, बहु देखन खों जाय
मोटो-मोटो रे चून, जमाना आयो बहुअन का। सास तोरे...
सास बिचारी खाना बनावे, बहु देखन खों जाय
छोटी-छोटी सैंको रोटी, जमाना आयो बहुअन का।
सास बिचारी बिस्तर बिछावै, बहु देखन खों जाय
अच्छा-अच्छा बिस्तर बिछावौ, जमाना आयो बहुअन का।


गोरे ललार दमक रही बिदिया / बुन्देली दादरे गीत


गोरे ललार दमक रही बिंदिया।
ठंडे से पानी गर्म कर लाये,
सपरें न राजा निरख रहे बिंदिया। गोरे...
सोने की थाली में भोजन परोसे,
जेवें न राजा निरख रहे बिंदिया। गोरे...
सोने की झाड़ी गंगा जल पानी,
पीवें न राजा निरख रहे बिंदिया। गोरे...
लोंगन कील-कील बीड़ा लगाये,
चावें नराजा निरख रहे बिंदिया। गोरे...
चुन-चुन कलियां सेजे लगाईं,
सोवें न राजा निरख रहे बिंदिया। गोरे


जा बालू भीट चढूँ राजा कैसे / बुन्देली दादरे गीत


जा बालू भींट चढूँ राजा कैसे।
ई घर की वे सासो बुरी हैं,
बादल सी गरजें नंदू राजा कैसे। जा...
ई घर की वे जिठनी बुरी हैं,
कोपर सी खनकें नंदू राजा कैसे। जा...
ई घर की वे ननदी बुरी हैं,
बिजली सी चमके रहें राजा कैसे। जा...


तुम कैसे मन मारे गोरी ठाड़ी अगना / बुन्देली दादरे गीत


तुम कैसे मन मारें गोरी ठांड़ी अंगना।।
काहे के तोरे बाजूबंदा, काहे के ककना,
काहे की तोरी मोहन माला, जप रई अंगना। तुम...
सोने के ये बाजूबंदा चांदी के ककना,
रूपे की तोरी मोहनमाला जप रईं अंगना। तुम...
कौना ले दये बाजूबंदा, कौना ने ककना,
ससुरा जी ने ले दई मोहनमाला जप रई अंगना। तुम...
कैसे टूटे बाजूबंदा, कैसे के कंगना,
कैसे टूटी मोहनमाला जप रई अंगना। तुम...
खेलत टूटे बाजूबंदा, निहुरत के ककना,
पहिनत टूटी मोहनमाला जप रई अंगना। तुम.

दशरथ राजकिशोर मोपे जादू कीना रे / बुन्देली दादरे गीत


दशरथ राजकिशोर मोपे जादू कीना रे।
मन मुसकाय के सैन चलाके, मन हर लीना रे,
निस दिन विकल रहत सखि, जैसे जल बिना मीना रे।
हाय दई निरदयी श्याम ने, दरद न चीना रे,
जब से अवध गये रघुनंदन, सुधहुं न लीना रे। दशरथ...
एक बार निज कर कमलन, लिख पत्र न दीना रे,
कंचन कुंअरि प्राण प्यारे बिन, किस विधि जीना रे। दशरथ...

देखो सखि नई साड़ी श्यामलिया ने / बुन्देली दादरे गीत


देखो सखि नई साड़ी श्यामलिया ने,
रनबन की कर डारी मोरे लाल।
कौन शहर की जा नई साड़ी,
कौना की गोट किनारी मोरे लाल। देखो...
बम्बई शहर की जा नई साड़ी,
दिल्ली की गोट किनारी मोरे लाल। देखो...
किनने बिसा दई जा नई साड़ी,
किनने गोट किनारी मोरे लाल। देखो...
ससुरा बिसा दई जा नई साड़ी,
सासो ने गोट किनारी मोरे लाल। देखो...
कैसे के फट गई जा नई साड़ी,
कैसे के गोट किनारी मोरे लाल। देखो.

दैहो-दैहो कनक उर दार / बुन्देली दादरे गीत


दैहों-दैहों कनक उर दार,
सिपईरा डेरा तो करो मोरी पौरी में।
अरे हां हां री सहेली
कहना गये तोरे घर वाले?
कहना गये राजा जेठ लटकनी,
ऊंचे महल दियरा जारें,
अरे हां रे सिपइरा हारे गये हैं घरवारे
और परदेश गये मोरे जेठ,
डेरा तो करो मोरी पौरी में।
अरे हां री सहेली, काहां ल्यावे तोरे घरवारे,
और का हो ल्यावे राज जेठ,
ऊंचे महल दियरा जारे।
अरे हां रे सिपइरा, वो तो लोंगे ल्यावे मोरे घरवारे,
और लायची ल्यावें राजा जेठ,
सिपइरा डेरा तो करो मोरी पौरी में। दैंहो कनक.

न जानू राम कहा गिरी मोरी बेसर / बुन्देली दादरे गीत



न जानू राम कहां गिरी मोरी बेसर
ससुरा जी कहें ढूंढ़ो बेसर,
नई तो सासो न पहिने देहें एकऊ जेबर।
मोरे जेठा जी कहे बहू ढूंढ़ो बेसर,
नई तो जिठनी के देखत बने तेवर। न जानू राम...
देवरा जी कहें भौजी ढूंढ़ो बेसर।
नई तो भैया जी मारे सरर सरर। न जानू राम...
ननदी कहें भौजी ढूंढ़ो बेसर
नई तो भैया न बनवायें एकऊ जेबर। न जानू राम...
सैयां जी कहें धना जाने दो बेसर
मैं तो नये बनबाय दूं तुम्हें जेबर।

न मारो ककड़िया लाग जैहे / बुन्देली दादरे गीत


न मारो कंकड़िया लाग जैहे।
कंकड़िया के मारे, कंकड़िया के मारे,
हमारी गागरिया फूट जैहें। न मारो...
हमारी चुनरिया भीग जैहें। न मारो...
हमारी सासो रानी रूठ जैहें। न मारो...
हमारे दोऊ नैना भीग जैहें। न मारो...
हमारो काजरवा फैल जैहें। न मारो...
हमारे पीहरवा छूट जैहें। न मारो...
हमारे मैया बाबुल छूट जैहें। न मारो...
हमारे भैया भौजी छूट जैहें। न मारो...
न मारो कंकड़िया लाग जैहें।
गागरिया के फूटे, गागरिया के फूटे।

नजर लागी पिया पानी न जैहो / बुन्देली दादरे गीत


नजर लागी पिया पानी न जैहों।
पनिया भरन खों गई पनघट पें,
देखत छैला लोट भागी,
पिया पानी न जैहों।
जब से देखी सांवरी सुरतिया,
तब से नैना भये पाजी, पिया पानी न जैहों।
करत न बैन बहत दोऊ नैना,
कुसमी चुनरिया भई दागी, पिया पानी न जैहों।

नजरिया मोई सो लगइयो मोरे राजा / बुन्देली दादरे गीत



नजरिया मोई सों लगइयो मोरे राजा।
कै मोरे राजा अंगना में कुंअला खुदइयो,
के पनिया मोई सों भरइयो मोरे राजा।
कै मोरे राजा अंगना में बगिया लगइयो,
मलिनिया मोई खों बनइयो मोरे राजा।
के मोरे राजा अंगना में चोपड़ डरइयो,
के बाजी मोई खों जितइयो मोरे राजा।
नजरिया...

पायल का इशारा हो गऔ रे पिया / बुन्देली दादरे गीत


पायल का इशारा हो गऔ रे पिया।
ये लम्बी सी धनियां किसकी रे खड़ी
वांसा जैसे लग रई मोरे पिया। पायल...
ये पतली सी धनिया किसकी रे खड़ी
कामिनिया सी लग रई मोरे पिया। पायल...
ये गोरी सी धनिया किसकी रे खड़ी
चांदनी सी छिटक रही मोरे पिया। पायल...
ये काली सी धनिया किसकी रे खड़ी
अंधियारी सी लग रई मोरे पिया। पायल...।
ये मोटी सी धनिया किसकी रे खड़ी
बेलन जैसी लग रई मोरे पिया। पायल...
ये छोटी सी धनिया किसकी रे खड़ी
गोदी में मचल रई मोरे पिया। पायल...

बलम मोहे चूनर रगाय दियो रे / बुन्देली दादरे गीत


बलम मोहे चूनर रंगाय दियो रे।
कहत सुनत जो चूनर रंगाई,
बलम मोहे सिर से उढ़ाय दियो रे। बलम...
कहत सुनत सिर से ओढ़ाई
बलम मोहे मायके भिजाय दियो रे। बलम...
कहत सुनत जो मायके भिजायो,
बलम मोहे जल्दी बुलाय लियो रे। बलम...
बाप-महतारी जो मोहे न भेजे,
बलम नेक रोके दिखाय दियो रे। बलम...
जो बलम तोरे आंसू न आवे,
बलम नेक मिरची लगाय लियो रे। बलम...

महुआ के तरै तरै रैहो / बुन्देली दादरे गीत


महुआ के तरैं तरैं रैहों,
मरोरा की एकऊ न सैहों।
अपने ससुर की सब सुन लैहों,
सासों से बीन बीन कैहों। मरोरा की...
अपने जेठ की सब सुन लैहों,
जिठानी से रार ठान लैहों। मरोरा की...
अपने ननदेऊ की सब सुन लैहों,
ननदी की विदा कर दैहों। मरोरा की...
अपने देवर की सब सुन लैहों,
छोटी को घर से भगा दैहों। मरोरा की...
महुआ के तरैं तरैं रैहों।

मै बार-बार बगिया न जैहो ननदी / बुन्देली दादरे गीत


मैं बार-बार बगिया न जैहों ननदी।
वा बगिया में मेरे ससुरा को डेरा,
मैं बार-बार परदा न करहौं ननदी। मैं...
वा बगिया में मेरे जेठा को डेरा,
मैं बार-बार घुुंघटा न डरिहौं ननदी। मैं...
वा बगिया में मेरे देवर का डेरा,
मैं बार-बार ररियां न करिहौं ननदी। मैं...
वा बगिया में मोरे ननदेऊ का डेरा,
मैं बार-बार सैनें न करिहौं ननदी। मैं...

मोती हजार जड़े नथनी मे / बुन्देली

मोती हजार जड़े नथनी में।
ठंडे से पानी गर्म कर लाये,
तुम सपरो हम ठांड़े बखरी में। मोती...
सोने की थाली में भोजन परोसे,
तुम जेलो हम ठांड़े बखरी में। मोती...
सोने की झाड़ी गंगा जल पानी,
तुम पीलो हम ठांड़े बखरी में। मोती...
लोंगन कील-कील बीड़ा लगाये,
तुम चाबो हम ठांड़े बखरी में। मोती...
चुन-चुन कलियां सेजें लगाऊं,
तुम सोलो हम ठांड़े बखरी में। मोती...

मोहे धानी चुनरियाँ मगाय दो पिया / बुन्देली दादरे गीत


मोहे धानी चुनरियाँ मंगाय दो पिया।
धानी चुनरी खों देख अगर सासो जलें,
उन सासो को धीरज बंधा दो पिया। मोहे...
मोरी चुनरी खों देख अगर जिठनी जलें,
उन जिठनी को न्यारो करा दो पिया। मोहे...
धानी चुनरी खों देख अगर ननदी जलें,
उन ननदी खों गोनों करा दो पिया। मोहे...
मोरी चुनरी खों देख अगर छोटी जले,
उन छोटी को मायके भिजा दो पिया। मोहे...

सूरज मुख न खोलूगी / बुन्देली दादरे गीत


सूरज मुख न खोलूंगी,
मोरी बेंदी का मीना झड़ जाय,
सोने की झाड़ी गंगा जल पानी,
पति से पहिले न पियूं रे,
मोरा नारी धर्म घट जाय। सूरज...
सोने की थाली में भोजन परोसे,
पति से पहिले न खाऊं रे
मोरा नारी धर्म घट जाय। सूरज...
लोंगे इलायची पानों का बीड़ा,
पति से पहिले न खाऊं रे
मोरा नारी धर्म घट जाय। सूरज...
चुन-चुन कलियां सेजें लगाऊं,
पति से पहले न सोऊं रे,
मोरा नारी धर्म घट जाय।
सूरज मुख न खोलूंगी,
मोरी बेंदी का मीना झड़ जाय।

हमारो दिल तुमसे नाराज महाराज / बुन्देली दादरे गीत


हमारो दिल तुमसे नाराज महाराज।
ठांड़े बाग में कलियां तुड़ावें,
हमें क्या मालिन बनाई महाराज। हमारो...
ठांड़े कुंअला में झाड़ी भरावें,
हमें क्या कहारिन बनाई महाराज। हमारो...
ठांड़े ताल पे कपड़ा धुलावे,
हमें क्या धोबिन बनायी महाराज। हमारो...
ठांड़े रसोई में खाना बनवायें,
हमें महराजिन बनाई महराज। हमारो...

हेजी नई लड़ो सासो हमे न्यारा करा दो / बुन्देली दादरे गीत


ऐजी नई लड़ो सासो, हमें न्यारा करा दो।
न चहिए हमें अर्तन बर्तन, न चहिए हमें थारी रे
मोरी अम्मा की परांत, हमें वापस कर दो। ऐजी...
न चहिए हमें अहने गहने, न चहिए हमें जेवर रे
मेरी अम्मा की नथुनियां हमें वापस कर दो। ऐजी...
न चहिए हमें कपड़े लत्ते, न चहिए हमें साड़ी रे
मोरी अम्मा की चुनरिया, हमें वापस कर दो। ऐजी...
न चहिए हमें जेठा ननदी, न चहिए हमें देवर रे
मोरे अम्मा के जमाई हमें वापस कर दो। ऐजी...

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कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...