सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Bundeli Sohar Geet Lokgeet Lyrics बुन्देली सोहर गीत लोकगीत लिरिक्स

 अगना मे बाजे बधैया बाजे हो बधैया / बुन्देली सोहर गीत

अंगना में बाजे बधैया, बाजे हो बधैया
यशोदा जी के द्वारे।
रार करें पानी में हिलोरें, खेले को मांगे जुन्हैया।
यशोदा जी के द्वारे
तुम जिन सोच करो मनमोहन देहैं
चांद ल्याकें यशोदा के द्वारे
गोरी नंद गोरी यशोदा,
तुम काय मोहन कारे। अंगना...

अवध मे जन्मे राम सलोना / बुन्देली सोहर गीत

अवध में जन्मे राम सलोना
बंधनवारे बंधे दरवाजे
कलश धरे दोऊ कोना। अवध...
रानी कौशिल्या ने बेटा जाये
राजा दशरथ के छौना अवध...
रानी कौशिल्या ने कपड़े लुटाये
राजा दशरथ ने सोना। अवध...
हीरा लाल जड़े पलना में
नजर लगे न टोना। अवध...

आज भई मोरे मन की, सुनो सैंया / बुन्देली सोहर गीत

आज भई मोरे मन की, सुनो सैंया
सासो न आवे हमारो का बिगरे,
चरुजा चढ़ाई बच जैहें, सुनो सैंया। आज...
तुम उठके पिया चूल्हा जलइयो,
हम चरुआ धर लैहें, सुनो सैंया। आज...
जिठनी न आवे हमारो का बिगरे,
लड्डू बंधाई बच जैहें, सुनो सैंया। आज...
तुम उठ के पिया मेवा ले अइयो,
हम लड्डू बांध लैहें, सुनो सैंया। आज...
ननदी न आवें हमारो का बिगरे,
संतिया धराई बच जैहें, सुनो। सैंया...
तुम उठके पिया गोबर ले आइयो,
हम संतिया धर लैहें, सुनो सैंया। आज...
पड़ोसन न आवे हमारो का बिगरे,
सोहर गबाई बच जैहें, सुनो सैंया। आज...
तुम उठके पिया ढोलक बजइयो,
हम सोहर गा लैहें, सुनो सैंया। आज...

ऊपर बादल घुमड़ाये हो / बुन्देली सोहर गीत

ऊपर बादल घुमड़ाये हो,
नीचे गोरी पनियां खों निकरी। ऊपर...
जाय जो कइयो उन राजा ससुर से,
अंगना में कुइयां खुदाव हो,
तुम्हारी बहू पनियां खों निकरी। ऊपर बादल...
जाय जो कइयो उन राजा जेठ से,
सोने के घइला मंगाव हो,
तुम्हारी बहू पनियां खों निकरी। ऊपर बादल...
जाय जो कइयो उन राजा नन्देऊ से,
मुतियन कुड़री जड़ाव हो,
तुम्हारी सरहज पनियां खों निकरी। ऊपर बादल...
जाय जो कइयो उन राजा देवर से,
रेशम की रस्सी मंगाव हो,
तुम्हारी भौजी पनियां खों निकरी। ऊपर बादल...
जाय जो कइयो उन राजा साहब से,
कुंअला पे गर्रा डराव हो,
तुम्हारी धना पनियां खों निकरी,
ऊपर बादल घुमड़ाये हो,
नीचे गोरी पनियां खों निकरी।

गलियन-गलियन फिरे मनहारिन / बुन्देली सोहर गीत

गलियन-गलियन फिरे मनहारिन
ले लियो कोऊ ललन को खिलौना
अपने महल से यशोदा रानी बोली
दे जाओ तुम ललन को खिलौना। गलियन...
आओ मनिहारिन, बैठो आंगन में
का तुम लाईं, ललन को खिलौना। गलियन...
छोटी सी बंशी दे दो लाल खों
प्यारो लागो ये ही खिलौना। गलियन...
थाल भर मोती जशोदा लाईं
खुश होकर दे दीन्हो खिलौना। गलियन...
जुग जुग जीये यशोदा तेरा लालन
फिर लाऊं मैं लालन ओ खिलौना। गलियन...


जशोदा के महलन बेग चलो री / बुन्देली सोहर गीत

जशोदा के महलन बेग चलो री।
महल के अंदर बेग चलो री।
बंदनवारे बंदे अति सोहें
लगी आम की धौरें। जशोदा...
सोने के कलश धरे अति सोहें
उनहू की ऊंची पौरें। जशोदा...
अरे हाथ गुलेरी एड़िया महावर
नाइन फिरी दौड़ी-दौड़ी। जशोदा...
कोई सखी गावे कोई बजावे
कोई नाचें दै दै तारी। जशोदा...
कोई सखी गोरी कोई कारी
कोई सखी लड़कौरी। जशोदा...


जो बदनवारो कहा लये जाती / बुन्देली सोहर गीत

जो बंदनवारो कहां लये जातीं,
किते लये जाती हैं। जो...
नगर अयोध्या में सुत भये सजनी,
राजा महीपत के नाती, उतईं जातीं
राजा दशरथ के पुत्र भये हैं
रघुकुल वंश उजार दई बाती, उतईं लये जातीं
रानी कौशिल्या की कूख जुड़ानी
राजा दशरथ की छाती, उतई लये जातीं
सब सखियन खों दान दये हैं
फूली नाहिं समाती। उतईं...


झूले नदलाल झुलाओ सखी पालना / बुन्देली सोहर गीत

झूलें नंदलाल झुलाओ सखी पालना
काहे के तोरे बनो पालना,
काहे के लागे फंुदना। झूलें नन्दलाल...
अगर चंदन के बने हैं पालना,
रेशम की डोरी रुपे के लागे फंुदना। झूलें नन्दलाल...
को झूलें को जो झुलावे,
को जो बलैया लेत मुख चूमना। झूलें नन्दलाल...
कान्हा झूले, सखिया झुलावें,
यशोदा बलैया नंद मुख चूमना। झूलें नन्दलाल..


नद घर बजत बधा लाल हम सुनके आ / बुन्देली सोहर गीत

नंद घर बजत बधाए लाल हम सुनकें आए।
मथुरा हरि ने जनम लिया है,
गोकुल बजत बधाए। लाल हम...
कौना ने जाए जशोदा खिलाए,
बाबा नंद के लाल कहाए। लाल हम...
सोरा गऊ के गोबर मंगाए,
कंचन कलश धराये। लाल हम...
चंदन पटली धरायी जशोदा,
चौमुख दियल जलाये। लाल हम...
हीरालाल लुटाए यशोदा,
मनमोहन को कंठ लगाये। लाल हम...
नन्द घर बजत बधाए, लाल हम सुनकें आए।

पलग पर रोय रहयो मेरो नदलाला / बुन्देली सोहर गीत

पलंग पर रोय रहयो, मेरो नंदलाला
बुला दो सासो को, बुला दो सासो को
दादी कह टेर रहयो, मेरो नंदलाला। पलंग...
बुला दो जिठनी खों, बुला दो जिठनी खों
वो ताई कह टेर रहयो, मेरो नंदलाला। पलंग...
बुला दो ननदी को, बुला दो ननदी को
बुआ-बुआ टेर रहयो, मेरो नंदलाला। पलंग...
बुला दो देवर को, बुला दो देवर को,
वो चाचा कह टेर रहयो, मेरो नंदलाला। पलंग...


पहले पहर को सपनो सुनो मोरी सासो जी महाराज / बुन्देली सोहर गीत

पहले पहर को सपनो, सुनो मोरी सासो जी महाराज।
राम लखन दोऊ भइया, अंगन बिच तप करें महाराज।
ननदी लयें बेला भर तेल, सांतिया लिख रही महाराज।
भौजी बैठी मांझ मंझौटे, हार नौने गुह रही महाराज।
इतने में आ गई बारी ननदी, विहंस के बोलिये महाराज।
भौजी हुए लालन तुम्हारे, हार हम लै लैहें महाराज।
चूमो बैयां तुम्हरी हथुरिया, घिया गुड़ मुँह भरो महाराज।
सुनो बारी ननदी हमारी, हार तुम लै लियो महाराज।

पिया कैसे झुलाऊ रस के बिजना / बुन्देली सोहर गीत


पिया कैसे झुलाऊं रस के बिजना,
बेंदी के बोझ लिलाट दुखत है,
हरवा को भर सहो जाय न। पिया...
कंगन को बोझ कलाई दुखत है,
मुंदरी को भार सहो जाय न। पिया...
साड़ी को बोझ मोरी कमर दुखत है,
माहुर के भार उठे पग ना। पिया...
काजल के बोझ मोरी आँख दुखत है,
काम करत नहीं दोऊ नैना। पिया...

बधइया बाजै माधौ जी के / बुन्देली सोहर गीत

बधइयां बाजै माधौ जी के
गोकुल बाजें बृंदावन बाजें
और बाजे मथुरैया।
बारा जोड़ी नगाड़े बाजें
और बाजे शहनैया। बधइयां...
गोपी गावें ग्वाला बजावें
नाचें यशोदा मैया। बधइयां...
बहिन सुभद्रा बधाव ले आई
नित उठ अइये जेई अंगना।
बधइयां... नंद बाबा अंगनइयां।


बधाये नन्द के घर आज सुहाये नन्द के घर आज / बुन्देली सोहर गीत

बधाये नन्द के घर आज, सुहाये नन्द के घर आज।
टैरो टैरो सुगर नहनिया, घर-घर बुलावा देय
बधाये...
अपने-अपने महलिन भीतर, सब सखि करती सिंगार
पटियां पारे, मांग संवारे, वेंदी दिपत लिलार।
बधाये...
आवत देखी सबरी सखियां, झपट के खोले किवाड़
बूढ़न-बड़ेन की पइयां पड़त हूं, छोटेन को परणाम।
बधाये...
बाबा नन्द बजारे जइयो, साड़ी सरहज खों ले आओ
पहिनो ओढो सबरी सखियां, जो जी के अंगे भाये।
बधाये...
पहिन ओढ़ ठांड़ी भई सखियां, मुख भर देतीं आशीष
जुग-जुग जिये माई तेरो कन्हैया, राखे सभी को मान।
बधाये...

मथुरा मे जन्मे नद के कुमार... / बुन्देली सोहर गीत

मथुरा में जन्मे नंद के कुमार...
खुल गई बेड़ी खुल गये किवाड़
जागत पहरुआ सो गयें द्वार। मथुरा...
गरजे ओ बरसे घटा घनघोर
ले के वासुदेव चले गोकुल के द्वार। मथुरा...
बाढ़ी वे जमुना आई चरणन लाग
छू के चरणाबिंद हो गई पार। मथुरा...
देवकी के मन में आनंद अपार
गोकुल में हो रहो मंगलचार। मथुरा...

राजा दशरथ के चारो लाल दिन-दिन प्यारे लगे / बुन्देली सोहर गीत

राजा दशरथ के चारों लाल दिन-दिन प्यारे लगें
अंगना में खेलें चारों भैया,
चलत घुटरुअन चाल, दिन-दिन प्यारे लगे। राजा...
खुशी भई है तीनऊ मैया।
दशरथ खुशी अपार, दिन-दिन प्यारे लगे। राजा...
गुरू की दीक्षा लेके उनने
मारे निशाचर तमाम, दिन दिन प्यारे लगें। राजा...
स्वयंबर भयो जनक नगर में
ब्याहे चारों-भाई, दिन-दिन प्यारे लगें। राजा...
ब्याह के आये अवध नगर खों
खुशी भये नर नारि, दिन-दिन प्यारे लगें। राजा

लूटन चलो श्याम की अमरैया / बुन्देली सोहर गीत


लूटन चलो श्याम की अमरैयां।
कहना कन्हैया प्यारे जन्म लियो हैं
हां कहना बाजे बधैयां लूटन...
मथुरा कन्हैया प्यारे जन्म लिवो हैं
गोकुल बाजे बधैयां। लूटन...
कहां तो बाजे ढोलक मंजीरा
कहां बाजे शहनैयां। लूटन...
मथुरा बाजे ढोलक मंजीरा
गोकुल बाजे शहनैयां। लूटन...

श्री रामचन्द्र जन्म लिये चैत सुदि नौमी / बुन्देली सोहर गीत

श्री रामचन्द्र जन्म लिये चैत सुदि नौमी।
दाई जो झगड़े नरा की छिनाई
कौशिल्या जी की साड़ी लैहों, सोर की उठाई। श्री...
नाइन झगड़े नगर की बुलाई
कौशिल्या जी को हार लैहों, महल की पुताई। श्री...
पंडित जो झगड़ें वेद की पढ़ाई
दशरथ जी को घोड़ा लैहों वेद की पढ़ाई। श्री...
ननदी जी झगड़े आँख की अंजाई
तीन लोक राज लैहों सांतिया धराई। श्री...

सो जा वा रे वीर तुम तो सो जाओ वा रे वीर / बुन्देली सोहर गीत

सो जा वा रें वीर, तुम तो सो जाओ वा रे वीर।
बीरन की बलैयां ले गईं जमुना के तीर।।
वर पे डाले पालना, पीपल पे डारी डोर।
जो लों कन्हैंया सोवन लागे ऊपर बोली मोर।
सो लो मोरे लाड़ले, तुम जब लो होने भोर।
आवत-जावत झोंका देहों, कबहूं न टूटे डोर।
माई गई है मायके, बीरन गये ससुराल।
भैया गयें हैं चाकरी, भाभी ठांढ़ी द्वार।
ताती-ताती खीर बनाईं, जामे डारो घी।
दो कौर खा लो लाड़ले, ठण्डो पड़ जाये जी।

हम पहिरे मूगन की माला / बुन्देली सोहर गीत

हम पहिरे मूंगन की माला,
हमारी कोऊ गगरी उतारो
कहां गये मोरे सैंया गोसंइयां,
कहां गये वा रे लाला,
हमारी कोऊ गगरी उतारो। हम पहिरे...
एक हाथ मोरी गगरी उतारो,
दूजे घूंघट संभालो,
हमारी कोऊ गगरी उतारो। हम पहिरे...
एक हाथ मोरी गगरी उतारो,
दूजे से चूनर संभालो,
हमारी कोऊ गगरी उतारो। हम पहिरे...
एक हाथ मोरी गगरी उतारो,
दूजे से लालन संभालो,
हमारी कोऊ गगरी उतारो। हम पहिरे.

हमखो तो चिन्ता हो रही / बुन्देली सोहर गीत

हमखों तो चिन्ता हो रही,
पिया कैसे मनाऊं सबको।
सासो हमारे घर आयेंगी पिया,
चरूआ चढ़ाई नेग मांगेंगी पिया।
कैसे मनाऊं उनको। हमखों...
काहे की चिन्ता तुम करो धना,
चरूआ चढ़ाई नेग मांगेंगी धना।
अपने नैहर के कंगना,
तुम देना पहिनाय उनको। हमखों...
जिठानी हमारे घर आयेंगी, भला
लड्डू बंधाई नेग मांगेंगी
अपने नैहर के झुमका जिठनी,
रानी को देना पहिनाय। हमखों...
ननदी हमारे घर आयेंगी,
भला छठिया धराई नेग मांगेंगी
अपने नैहर के कंगना,
ननदी रानी को देना पहिनाय। हमखों...
देवर हमारे घर आयेंगे धना,
बंशी बजाई नेंग मांगेगे धना।
तुम देना मनाय उनको। हमखों...

हमरे हु नन्दलाल चली आना ननदिया / बुन्देली सोहर गीत

हमरे हुए नन्दलाल, चली आना ननदिया।
चांदी के गहने न लाना ननदिया,
सोने के हमरे रिवाज री। चली...
सूती कपड़े न लाना ननदिया,
रेशम के हमरे रिवाज री। चली...
काठ का पलना न लाना ननदिया,
चन्दन का हमारे रिवाज री। चली...
लड़के बच्चे न लाना ननदिया,
अकेले का हमरे रिवाज री। चली...
रुपये पैसे न मांगो ननदिया,
खाली जाने का रिवाज री। चली...
हमरे हुए नन्दलाल...।

Bundeli Sohar Geet Lokgeet Lyrics


टिप्पणियाँ

Popular

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...