सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

निमाड़ी लोकगीत संग्रह 4 | Nimari / Nimadi Geet Lokgeet Sangrah Chaar


जी हो आज म्हारो पटसाळ सूनो लगऽ / निमाड़ी गीत /लोकगीत

जी हो आज म्हारो पटसाळ सूनो लगऽ
नहीं आया म्हारा दशरथ बाप,
हरकत पगरण आरंभियो।
जी हो आज म्हारो पाळणो सूनो लगऽ
नहीं आई म्हारी कौशल्या माय,
हरकत पगरण आरम्भियो।
जो हो आज म्हारो मण्डप सूनो लगऽ
नहीं आया म्हारा राम-लछमण बीरा,
हरकत पगरण आरम्भियो।
जी हो आज म्हारी आरती सूनी लगऽ
नहीं आई म्हारी सुभद्रा बेण,
हरकत पगरण आरम्भियो।

जी हो आज म्हारो देवमन्दिर लहलहे / निमाड़ी गीत /लोकगीत

जी हो आज म्हारो देवमन्दिर लहलहे,
आया म्हारा गणपत राव,
हरकत पगरण आरम्भियो।
जी हो आज म्हारी पटसाळ लहलहे
आया म्हारा दशरथ बाप,
हरकत पगरण आरम्भियो।
जी हो आज म्हारो पाळणो लहलहे
आई म्हारी कौशल्या माय,
हरकत पगरण आरम्भियो।
जी हो आज म्हारो मण्डप लहलहे
आया म्हारा राम-लछमण बीरा
हरकत पगरण आरम्भियो।
जी हो आज म्हारी आरती लहलहे
आई म्हारी सुभद्रा बेण।
हरकत पगरण आरम्भियो।

जी हो ए ही रे दिवलो इन्द्र लुहार नऽ घड़ियो / निमाड़ी गीत /लोकगीत

जी हो ए ही रे दिवलो, इन्द्र लुहार नऽ घड़ियो
जेमऽ पुरव्यो सवा घड़ो तेल, सोन्ना की डांडी दिया हो बळऽ
जी हाँ ए ही रे दिवलो, मजघर मऽ धर्यो,
मजघर बठी म्हारी सदासुहागेण माय,
सोन्ना की डांडी दिया हो बलळऽ
जी हो ए ही रे दिवलो, मनऽ आरती मऽ धर्यो,
आरती धरऽ म्हारी सदासुहागेण बैण,
सोन्ना की डांडी दिया हो बलळऽ
जी हो ए ही रे दिवलो, मनऽ पटसाळ मऽ धर्यो,
पटसाल खेलऽ म्हारा नारा ताना बाळ,
सोन्ना की डांडी दिया हो बलळऽ
जी हो ए ही रे दिवलो, मनऽ सभा मऽ धर्यो,
सभा मऽ बठ्या छे समधी लोग,
सोन्ना की डांडी दिया हो बलळऽ

जी हो पाँच बधावा म्हारा यहाँ आविया / निमाड़ी गीत /लोकगीत

जी हो पाँच बधावा म्हारा यहाँ आविया,
पाँचई की नवी नवी रीत।
जी हो, नरवरगढ़ को ऊदो चूड़ो नऽ पोचयो सांवळो।
चूड़ीला पर उग्यों सूर्या भान महाराज।
जी हो, पहिलो बधावो म्हारा यहाँ आवियो।
भेज्यो म्हारा ससुराजी द्वार,
जी हो, ससुराजी रंग सु बधाविया,
सासु नारेळ भरया थाळ महाराज,
जी हो दूसरो बधावो म्हारा यहाँ आवियो।
भेज्यो म्हारा पिताजी द्वार,
जी हो पिताजी रंग सु बधाविया,
माया मोतियन भरया थाळ महाराज,
जी हो तीसरो बधावो म्हारा यहाँ आवियो।
भेज्यो ते जेठजी द्वार,
जी हो, जेठजी रंग सु बधाविया,
जेठाणी न लियो पगरण सार महाराज,
जी हो, चौथो बधावो म्हारा यहाँ आवियो।
भेज्यो म्हारा बीराजी द्वार,
जी हो, बीराजी रंग सु बधाविया,
भावज न लियो घूँघट सार,
जी हो, पांचवों बधावो म्हारा यहाँ आवियो।
भेज्यो म्हारी धनकेरी कूख,
जी हो इनी कूख हीरा रत्न नीबज्या,
जे को ते पगरण आरंभियो।

जीवणा है दिन चार जगत में / निमाड़ी गीत /लोकगीत

   जीवणा है दिन चार जगत में
(१) सुबे से हरि नाम सुमरले,
    मानुष जनम सुधारो
    सत्य धर्म से करो हो कमाई
   भोगो सब संसार...
    जगत में...
(२) माता पिता और गुरु की रे सेवा,
    और जगत उपकार
    पशु पक्षी नर सब जीवन में
    ईश्वर आन निहारु...
    जगत में...
(३) गलत भाव मन से बिसराजो,
    सबसे प्रेम बड़ावो
    सकल जगत के अंदर देखो
    पुरण बृम्ह अपार...
    जगत में...
(४) यह संसार सपना की रे माया,
    ममता मोहे निहारे
    हरि की शरण मे बंधन जोड़े
    पावो मोक्ष दुवार...
    जगत में...

झाँझ वाजऽ मिरधिंग वाजऽ म्हारो हार हिलोळा लेय / निमाड़ी गीत /लोकगीत

झाँझ वाजऽ मिरधिंग वाजऽ, म्हारो हार हिलोळा लेय।
बेसर वाळई छोरी हो, तू म्हारी गली मत आव।
थारी बेसर छे हळकणई, म्हारा प्रभुजी को खोटो स्वभाव।।
तूसी वाळई छोरी हो, तू म्हारी गली मत आव।
थारी तूसी छे झळकणई, म्हारा प्रभुजी को खोटो स्वभाव।।

जोगी ढ़ुढ़ण हम गया / निमाड़ी गीत /लोकगीत

    जोगी ढ़ुढ़ण हम गया,
    कोई न देखयो रे भाई
(१) एक गूरु दुजो बालको,
    तीजो मस्त दिवानो
    छोटा सा आसण बैठणा
    जोगी आया हो नाही....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(२) जोगि की झोली जड़ाव की,
    हीरा माणीक भरीया
    जो मांगे उसे दई देणा
    जोगी जमीन आसमानाँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(३) आठ कमल नौ बावड़ी,
    जीन बाग लगाई
    चम्पा चमेली दवणो मोंगरो
    जीनकी परमळ वासँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(४) पान छाई जोगी रावठी,
    फुल सेज बिछाई
    चार दिशा साधु रमी रया
    अंग भभुत लगाईँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....

जोगी ढ़ुढ़ण हम गया / निमाड़ी गीत /लोकगीत

    जोगी ढ़ुढ़ण हम गया,
    कोई न देखयो रे भाई
(१) एक गूरु दुजो बालको,
    तीजो मस्त दिवानो
    छोटा सा आसण बैठणा
    जोगी आया हो नाही....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(२) जोगि की झोली जड़ाव की,
    हीरा माणीक भरीया
    जो मांगे उसे दई देणा
    जोगी जमीन आसमानाँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(३) आठ कमल नौ बावड़ी,
    जीन बाग लगाई
    चम्पा चमेली दवणो मोंगरो
    जीनकी परमळ वासँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....
(४) पान छाई जोगी रावठी,
    फुल सेज बिछाई
    चार दिशा साधु रमी रया
    अंग भभुत लगाईँ....
    .....जोगी ढ़ुढ़णँ.....

झाळ झपकऽ बिन्दी चमकऽ बोलऽ अमृत वाणी / निमाड़ी गीत /लोकगीत

झाळ झपकऽ, बिन्दी चमकऽ बोलऽ अमृत वाणी,
धणियेर आंगणऽ कुआ खणाया, हरिया एतरो पाणी,
जूड़ो छोड़ी न्हावण बठ्या, धणियेर घर की राणी,
धणियेर घर की राणी रनुबाई, बोलऽ अमृत वाणी।
आमुलड़ा री डाल म्हारी माता, सालुड़ो सुखाड़ऽ,
सालुड़ा रा रम्मक झम्मक, नाचऽ ठम्मक ठम्मक,
धणियेर घर की राणी रनुबाई, बोलऽ अमृत वाणी।

डावां हाथ तेल-फुलेल जवणा हाथ आरती जी / निमाड़ी गीत /लोकगीत

डावां हाथ तेल-फुलेल, जवणा हाथ आरती जी।
धणियेर राजा सोया सुख-सेज, रनुबाई रींझणो जी
डोलतज डोलतऽ आई गई झपकी, हाथ की रींझणो भुई गिर्यो जी।
धणियेर राजा की खुली गई नींद, तड़ातड़ मार्यो ताजणा जी।
रनुबाई खऽ लागी बड़ी रीस, आसन छोड़ी भुई सूता जी।
खुटी मऽ को चीर कोम्हलाय, असा कसा रोष भर्या जी।
बेडुला को नीर झोकळाय, असा कसा रोष भर्या जी।
पालणारो बाळो बिलखाय, असा कसा रोष भर्या जी।

डोलो सजायो रे राई आंगणा / निमाड़ी गीत /लोकगीत

    डोलो सजायो रे राई आंगणा,
    आरे तिरीया हल्द लगावे
(१) यम न झंडा रोपीया,
    आरे रोपीया काया का माय
    लुट सके तो लुट ले
    लुट लिया हो बाजार...
    डोलो...
(२) बम का हो बाजा बजी रया,
    आरे बाजी रया रणवास
    सखीयन मंगल गावियाँ
    हुई रई जय-जय कार...
    डोलो...
(३) हाथ म कंडो धरी लियो,
    आरे पाछ रड़ परिवार
    बिच म रे काया जाई रई
    गई स्वर्ग द्वार...
    डोलो...
(४) भाई रे बंधू थारा आई गया,
    आरे सजी धजी रे बारात
    भाई रोव न थारी तिरीया
    चला रेवा किनार...
    डोलो...
(५) रेवा जी के घाट पे,
    आरे सल दियो हो रचाय
    आग लगाई न पछा आवियाँ
    पाणी अंग लगाय...
    डोलो...

ढेल तो परवत भई रे आंगणो भयो परदेश / निमाड़ी गीत /लोकगीत

ढेल तो परवत भई रे, आंगणो भयो परदेश
म्हारा वीरा रे, तीरथऽ करी नऽ वेगा आवऽ।
कचेरी बसन्ता थारा पिता वाटऽ जोवेऽ रे
झुलवा झुलन्ती थारी माता।
म्हारा वीरा रे, तीरथ करी नऽ वेगा आवऽ
गैय्या धुवन्ता थारा भाई वाटऽ जोवऽ रे,
महिया विलन्ती थारी भावज।
म्हारा वीरा रे, तीरथ करी नऽ वेगा आवऽ।
घोड़ीला बसन्ता थारा पुत्र वाटऽ जोवऽ रे,
रसोई करन्ती थारी बहुवर
म्हारा वीरा रे तीरथऽ करी नऽ वेगा आवऽ।
सासर वासेण थारी बईण वाटऽ जोवऽ रे,
फुतल्या खेलन्ती थारी कन्या।
म्हारा वीरा रे, तीरथऽ करी नऽ वेगा आवऽ।

तुम तो जाओ संजा बेण सासरऽ / निमाड़ी गीत /लोकगीत

तुम तो जाओ संजा बेण सासरऽ।
तुम्हारा सासरऽ सी,
हत्थी भी आया, घोड़ा भी आया,
पालकी भी आई, म्याना भी आया,
तुम तो जाओ संजा बेणा सासरऽ
हत्थी सामनऽ उभाड़ो घोड़ा घुड़साल बंधाड़ो,
पालकी छज्जा उतारो, म्याना धाबा रखाड़ो,
हऊँ तो नहीं जाऊँ दादाजी सासरऽ।

तुम तो जागो न हो अमुक भाई घर की नार / निमाड़ी गीत /लोकगीत

तुम तो जागो न हो अमुक भाई घर की नार,
विहाणो हो श्याम-सुहावणो।
तुम तो जागो न हो बहुवर चीर संवारो
विहाणो हो श्याम-सुहावणो।
तुम तो देवो न हो बहुवर बाजुबन्द खील,
विहाणो हो श्याम-सुहावणो।
तुम तो देवों न हो बहुवर कपिला गाय,
विहाणो हो श्याम-सुहावणो।
तुम देवो रजा घर जावां / निमाड़ी गीत /लोकगीत
तुम देवो रजा घर जावां,
राणी रनु बाई हो।।
चूल्हा पर खीचड़ी खद-बदऽ,
राणी रानु बाई हो।।
अंगारऽ सीजऽ दाळ,
राणी रनु बाई हो।।
ससराजी सूता द्वार,
राणी रनु बाई हो।।
सासुजी दीसे गाळ,
राणी रनु बाई हो।।
म्हारा स्वामी सोया सुख सेज,
राणी रनु बाई हो।।
तुम देवो रजा घर जावां,
राणी रनु बाई हो।।

तुम म्हारी नौका धीमी चलो / निमाड़ी गीत /लोकगीत

    तुम म्हारी नौका धीमी चलो,
    आरे म्हारा दीन दयाला
(१) जाई न राम थाड़ा रयाँ,
    जमना पयली हो पारा
    नाव लावो रे तुम नावड़ा
    आन बैगा पार उतारो....
    तुम म्हारी........
(२) उन्डी लगावजै आवली,
    उतरा ठोकर मार
    सोना मड़ाऊ थारी आवली
    रूपया न को रास....
    तुम म्हारी........
(३) निरबल्या मोहे बल नही,
    मोहे फेरा घड़ावो राम
    म्हारा कुटूंम से हाऊ एकलो
    म्हारो घणो परिवार....
    तुम म्हारी........
(४) बिना पंख को सोरटो,
    आरे पंछी चल्यो रे आकाश
    रंग रूप वो को कुछ नही
    लग भुख नी प्यास....
    तुम म्हारी........
(५) कहत कबीर धर्मराज से,
    आरे हाथ ब्रम्हा की झारी
    जन्म.जन्म का हो दुखयारी
    राखो लाज हमारी....
    तुम म्हारी........

थारो काई काई रूप बखाणूँ रनुबाई / निमाड़ी गीत /लोकगीत

थारो काई काई रूप बखाणूँ रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारी अगळई मूंग की सेंगळई रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारो सिर सूरज को तेज रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारी नाक सुआ की रेख रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारा डोला निंबू की फाक रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारा दाँत दाड़िम का दाणा रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारा ओंठ हिंगुळ की रेख रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारा हाथ चम्पा का छोड़ रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारा पांय केळ का खंब रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।
थारो काई काई रूप बखाणूं रनुबाई,
सौरठ देस सी आई ओ।।

दिया-बत्ती हुओ रे मिलाप बय लड़ी सांजुली / निमाड़ी गीत /लोकगीत

दिया-बत्ती हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
गौआ-बछुआ हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
पंछी-बच्चा हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
रात-दिन हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।
राजा-रानी हुओ रे मिलाप, बय लड़ी सांजुली।।

दया करो म्हारा नाथ / निमाड़ी गीत /लोकगीत

    दया करो म्हारा नाथ
    हुँउ रे गरीब जन ऐकलो
(१) बन म वनस्पति फुलियाँ,
    आरे फुलिया डालम डाल
    वाही म चन्दन ऐकलो
    जाकी निरमल वाँस...
    हुँउ रे गरीब...
(२) कई लाख तारा ऊगीयाँ
    ऊगीयाँ गगन का मायँ,
    वहा म्हारो चन्दाँ ऐकलो
    जाकी निर्मल जोत...
    हुँउ रे गरीब...
(३) अन्न ही चुगता चुंगी रयाँ,
    आरे पंछी पंख पसार
    वहा म्हारो हंसो ऐकलो
    आरे मोती चुग-चुग खाय…
    हुँउ रे गरीब...
(४) कहेत कबीर धर्मराज से,
    आरे साहेब सुण लिजै
    घट का परदा खोल के
    आरे आपणो कर लिजे...
    हुँउ रे गरीब...

टिप्पणियाँ

Popular

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...