सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

उर्दू शैली के हास्य व्यंग्य लेख / Hasya Vyangya Lekh

ईद की जूती / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Eid ki Jooti
ख़ुदा परस्ती का नुसख़ा / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Khuda Parasti ka Nuskha
यहाँ कुछ फूल रखे हैं / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Yahan Kuchh Fool Rakhe Hain
मूज़ी मुश्ताक़ /अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Moozi
चंद तस्वीर-ए-बुताँ / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Chand Tasveer Ae Butaa
दस्त-ए-ज़ुलैख़ा / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Dast E Julaikha
हिल स्टेशन / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Hil Station
बॉय-फ़ोकल क्लब / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Boy Focal Club
मेरी शादी की पच्चीसवीं सालगिरह / फ़िक्र तौंसवी Hasya Vyangya : Meri Shadi Saalgirah
हॉस्टल में पड़ना / पतरस बुख़ारी Hasya Vyangya : Hostel Mein Padna
सवेरे जो कल आँख मेरी खुली / पतरस बुख़ारी Hasya Vyangya : Savere Jo Kal Meri Aankh Khuli
मरहूम की याद में / पतरस बुख़ारी Hasya Vyangya : Marhoom ki Yaad Mein
रिश्ता या ख़ुदा / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Rishta Ya Khuda
लाख नाव नहीं करोड़ नाव / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Laakh Naav Nahi Karod
मेरा मन-पसंद सफ़्हा / कृष्ण चंदर Hasya Vyangya : Mera Man Pasand Safhah
सिन्फ़-ए-लाग़र / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Silf e Lagar
ग़ालिब जदीद शु'अरा की एक मजलिस में / कन्हैया लाल कपूर Ghalib Jadid Hasya Vyangya
तरक़्क़ी-पसंद ग़ालिब कन्हैया लाल कपूर / Hasya Vyangya : Tarakki Pasand Ghalib
साईं बाबा का मशवरा कन्हैया लाल कपूर / Hasya Vyangya : Sai Baba ka Mashvara
सामेअ' कन्हैया लाल कपूर Hasya Vyangya : Saamea
मिर्ज़ा जुगनू कन्हैया लाल कपूर : Mirza Jugnu Hasya Vyangya
नया शिकंजा कन्हैया लाल कपूर Hasya Vyangya : Naya Shikanja
यूनीवर्सिटी के लड़के अहमद जमाल पाशा Hasya Vyangya : University ke Ladke
मकान की तलाश अहमद जमाल पाशा Makan ki Talash : Hasya Vyangya
क्रिकेट मैच शौकत थानवी Hasya Vyangya : Cricket Match
ससुराली रिश्तेदार शौकत थानवी Hasya Vyangya : Sasurali Rishtedar
वकील शौकत थानवी Hasya Vyangya : Vakeel
मैं एक शायर हूँ शौकत थानवी Hasya Vyangya : Main ek Shayar Hun
समाज शफ़ीक़ुर्रहमान Hasya Vyangya : Samaaj
कॉफ़ी / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Coffee
हवेली / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Haveli
शादी हिमाक़त है शौकत थानवी Hasya Vyangya : Shadi Himaqat Hai
मुशाइर शौकत थानवी Hasya Vyangya : Mushaair
मकान की तलाश में शफ़ीक़ुर्रहमान Hasya Vyangya : Makan Ki Talash Mein
क्लब शफ़ीक़ुर्रहमान Hasya Vyangya : Club
फ़िलॉसफ़र शफ़ीक़ुर्रहमान Hasya Vyangya : Philosopher
अब और तब / पतरस बुख़ारी Hasya Vyangya : Ab aur Tab
अंजाम बख़ैर / पतरस बुख़ारी Hasya Vyangya : Anjaam Bakhair
मिस चिड़िया की कहानी / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Mis Chidiya ki Kahani
बिंत-ए-छिपकली / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Bint ae Chipkali
एक वाक़िअ: / रशीद अहमद सिद्दीक़ी Hasya Vyangya : Ek Waqia
घाग / रशीद अहमद सिद्दीक़ी Hasya Vyangya : Ghaag
हुए मर के हम जो रुस्वा / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Hue Mar ke Ham Jo Ruswa
पड़िए गर बीमार / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Padie Gar Bimar
जुनून-ए-लतीफ़ा / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Junoon E Latifa
चारपाई और कल्चर / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Charpai aur Culture
क्रिकेट / मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी Hasya Vyangya : Cricket
गवाह / रशीद अहमद सिद्दीक़ी Hasya Vyangya : Gawaah
सिब्ग़े एंड संस (सोदागरान-ओ-नाशिरान-ए-कुतुब) मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी / Hasya Vyangya : Sibge and Sons
इश्क़बाज़ टिड्डा / ख़्वाजा हसन निज़ामी Hasya Vyangya : Ishqbaaz Tidda

टिप्पणियाँ

Popular

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

 घूमर गीत राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने काजळ टिकी लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने रमता ने लाडूङो लादयो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने परदेशियाँ मत दीजो रे माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ म्हाने राठोडा रे घर भल दीजो ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हाने राठोडा री बोली प्यारी लागे ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ओ राजरी घूमर रमवा म्हें जास्यां ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ घूमर रमवा म्हें जास्याँ ... इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स हिंदी  इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बाईसा रा बीरा लहेरियो सा म्हाने ल्याईदो ल्याईदो ल्याईदो ढोलालहेरियो सा म्हाने ल्याईदो नी बादिला ढोला लहेरियो सा म्हारा सुसराजी तो दिल्ली रा राजवी सा म्हारा सासूजी ...

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है

कुमार विश्वास का जन्म 10 फ़रवरी (वसंत पंचमी), 1970 को पिअखुआ (ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय स्कूल, पिलखुआ में प्राप्त की। उनके पिता डा चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कालेज (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध), पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कालेज से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। डा कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढाई में नहीं रमा, और उन्होंने बीच में ही वह पढाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्प्श्चात उन्होंने "कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना" विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया। पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो...

देशभक्ति कविताओं का कोश – भाग 3 | Deshbhakti Kavita Sangrah 3

 उठो धरा के अमर सपूतों -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी/देशभक्ति की कविता उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नई प्रात है नई बात है नया किरन है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगें नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों में नई-नई मुस्कान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।1।। डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ नए स्वरों में गाते हैं। गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें मस्त उधर मँडराते हैं। नवयुग की नूतन वीणा में नया राग, नव गान भरो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।2।। कली-कली खिल रही इधर वह फूल-फूल मुस्काया है। धरती माँ की आज हो रही नई सुनहरी काया है। नूतन मंगलमय ध्वनियों से गुँजित जग-उद्यान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।3।। सरस्वती का पावन मंदिर शुभ संपत्ति तुम्हारी है। तुममें से हर बालक इसका रक्षक और पुजारी है। शत-शत दीपक जला ज्ञान के नवयुग का आह्वान करो। उठो, धरा के अमर सपूतों। पुन: नया निर्माण करो।।4।। -द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी ऐ मेरे वतन के लोगों- प्रदीप/देशभक्ति कविता ऐ मेरे वतन के लोगो...

देशभक्ति कविताओं का कोश - भाग 2 | Deshbhakti Kavita Sangrah 2

 आज जीत की रात- गिरिजाकुमार माथुर/देशभक्ति कविता आज जीत की रात पहरुए! सावधान रहना खुले देश के द्वार अचल दीपक समान रहना २ प्रथम चरण है नये स्वर्ग का है मंज़िल का छोर इस जन-मंथन से उठ आई पहली रत्न-हिलोर अभी शेष है पूरी होना जीवन-मुक्ता-डोर क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की विगत साँवली कोर ले युग की पतवार बने अंबुधि समान रहना। ३ विषम शृंखलाएँ टूटी हैं खुली समस्त दिशाएँ आज प्रभंजन बनकर चलतीं युग-बंदिनी हवाएँ प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं यह सिमटी सीमाएँ आज पुराने सिंहासन की टूट रही प्रतिमाएँ उठता है तूफान, इंदु! तुम दीप्तिमान रहना। ४ ऊंची हुई मशाल हमारी आगे कठिन डगर है शत्रु हट गया, लेकिन उसकी छायाओं का डर है शोषण से है मृत समाज कमज़ोर हमारा घर है किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी यह विश्वास अमर है जन-गंगा में ज्वार, लहर तुम प्रवहमान रहना पहरुए! सावधान रहना।। गिरिजाकुमार माथुर   चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण,- सुमित्रानंदन पंत/देशभक्ति कविता १५ अगस्त १९४७ चिर प्रणम्य यह पुण्य अह्न जय गाओ सुरगण, आज अवतरित हुई चेतना भू पर नूतन! नवभारत, फिर चीर युगों का तिमिर आवरण, तरुण अरुण-सा उदित हुआ परि...

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

 खोय देत हो जीवन बिना काम के भजन करो कछु राम के / बुन्देली लोकगीत  खोय देत हो जीवन बिना काम के, भजन करो कछु राम के। जी बिन देह जरा न रुकती, चाहो अन्त समय में मुक्ती ऐसी करो जतन से जुक्ती, ध्यान करियों सबेरे न तो शाम के। भजन... लख चौरासी भटकत आये, मानुष देह कठिन से पाये, फिर भी माने न समुझायें, गलती चक्कर में फंसे बिना राम के। भजन... ईश्वर मालिक से मुंह फेरे, दिल से नाम कभऊं न टेरे, वन के नारि कुटुम्ब के चेरे, कोरी ममता में फंसे इते आन के। भजन... छोड़ो मात पिता और भ्राता, जो हैं तीन लोक के दाता, करियो उन ईश्वर से नाता, क्षमा करिहें अपराध अपना जान के। भजन... गगा को मान बड़ा भारी / बुन्देली लोकगीत  गंगा को मान बड़ा भारी, चलो बहनों मुक्ती सुधारी। तारन के लाने सहज में न आई, तप करके भागीरथ निकारी। चलो दीदी.... गंगा की धार शम्भू रोकी जटन में भोला शिवत्रिपुरारी। चलो दीदी.... तीरथ व्रत ऐसे चारों तरफ हैं गंगा की महिमा है न्यारी। चलो दीदी.... जावे के लाने कछु अड़चन नैयां दिन भर चले मोटर गाड़ी। चलो दीदी.... गंगा जी जावें परम गति पावें मन में विश्वास करो भारी। चलो दीदी.... ग...