कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

ऐ मेरे दिल कहीं और चल / Ae Mere Dil Kahin Aur Chal

 ऐ मेरे दिल कहीं और चल

ग़म की दुनिया से दिल भर गया

ढूंढ ले अब कोई दिल नया


चल जहाँ ग़म के मारे न हों

झूठी आशा के तारे न हों

इन बहारों से क्या फ़ायदा

जिसमें दिल की कली जल गई

ज़ख़्म फिर से हरा हो गया

ऐ मेरे दिल कहीं और चल....


चार आँसू कोई रो दिया

फेर कर मुँह कोई चल दिया

लुट रहा था किसी का जहाँ

देखती रह गई ये ज़मीं

चुप रहा बेरहम आस्माँ

ऐ मेरे दिल कहीं और चल...


फ़िल्म : दाग-1952

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