कविता, कहानी, ग़ज़ल - शायरी, गीत -लोकगीत, दोहे, भजन, हास्य - व्यंग्य, भजन आरती चालीसा प्रार्थना और एवं अन्य रचनाएं साहित्य के भंडार से

एक राधा एक मीरा – Ek Radha Ek Meera / Ravindra Jain

 एक राधा, एक मीरा दोनों ने श्याम को चाहा

अन्तर क्या दोनों की चाह में बोलो

इक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी

एक राधा, एक मीरा ...


राधा ने मधुबन में ढूँढा

मीरा ने मन में पाया

राधा जिसे खो बैठी

वो गोविन्द और दरस दिखाया

एक मुरली एक पायल, एक पगली, एक घायल

अन्तर क्या दोनों की प्रीत में बोलो

एक सूरत लुभानी, एक मूरत लुभानी

इक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी ...


मीरा के प्रभु गिरिधर नागर

राधा के मनमोहन

राधा दिन {श}ऋंगार करे

और मीरा बन गयी जोगन

एक रानी एक दासी, दोनों हरि प्रेम की प्यासी

अन्तर क्या दोनों की तृप्ति में बोलो

एक जीत न मानी, एक हार न मानी

इक प्रेम दीवानी, इक दरस दीवानी ...

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

Popular Posts

Categories

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *