कहाँ जा रहा है तू ऐ जाने वाले / Kahan Ja Raha Hai Tu Ae Jaane Wale

 कहाँ जा रहा है तू ऐ जाने वाले

अँधेरा है मन का दिया तो जला ले

कहाँ जा रहा है ...


ये जीवन सफ़र एक अंधा सफ़र है

बहकना है मुमकिन भटकने का डर है

सम्भलता नहीं दिल किसी के सम्भाले

कहाँ जा रहा है ...


जो ठोकर न खाए नहीं जीत उसकी

जो गिर के सम्भल जाए है जीत उसकी

निशां मंज़िलों के ये पैरों के छाले

कहाँ जा रहा है ...


कभी ये भी सोचा कि मंज़िल कहाँ है

बड़े से जहां में तेरा घर कहाँ है

जो बाँधे थे बंधन वो क्यों तोड़ डाले

कहाँ जा रहा है ...

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Rajasthani Lokgeet Lyrics in Hindi राजस्थानी लोकगीत लिरिक्स

बुन्देली गारी गीत लोकगीत लिरिक्स Bundeli Gali Geet Lokgeet Lyrics

कुमार विश्वास की कविताएँ | Kumar Vishwas Kavita – कोई दीवाना कहता है