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Main Dekhun Jis Aur Sakhi Ri Lyrics – मैं देखूँ जिस ओर सखी री

 मैं देखूँ जिस ओर सखी री

सामने मेरे साँवरिया


प्रेम ने जोगन मुझ को बनाया

तन को फूँका मन को जलाया


प्रेम के दुख में डूब गया दिल

जैसे जल में गागरिया


रो रो कर हर दुख सहना है

दुख सह सह कर चुप रहना है


कैसे बताऊँ कैसे बिछड़ी

पी के मुख से बाँसुरिया


दुनिया कहती मुझ को दीवानी

कोई न समझे प्रेम की बानी


साजन साजन रटते रटते

अब तो हो गई बावरिया


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